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ग़ज़ल (दिल ने जिसे बना लिया गुलफाम दोस्तो)

ग़ज़ल (दिल ने जिसे बना लिया गुलफाम दोस्तो)
(मफ ऊल _फाइ लात _मफा ईल _फाइ लुन)

दिल ने जिसे बना लिया गुलफाम दोस्तो l
उसने दिया फरेबी का इल्ज़ाम दोस्तो l

मैं ने खिलाफे ज़ुल्‍म जुबां अपनी खोल दी
अब चाहे कुछ भी हो मेरा अंजाम दोस्तो l

दिल को अलम जिगर को तड़प अश्क आँख को
मुझ को दिए ये इश्क़ ने इनआम दोस्तो l

लाए हैं अंजुमन में किसी अजनबी को वह
दिल में न यूँ उठा मेरे कुहराम दोस्तो l

सच्चा है यार वो उसे पहचान लीजिए
बद वक़्त पर जो आए सदा काम दोस्तो l

जिसने किया तबाह वही मेरा यार है
उसका जुबां से कैसे मैं लूँ नाम दोस्तो l

तस्दीक तब से भूल गया राहे मैकदा
उसने नज़र का जबसे पिया जाम दोस्तो l

(मौलिक व अप्रकाशित

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Comment by Tasdiq Ahmed Khan on January 22, 2019 at 6:07pm

जनाब राज़ नवाद्वी साहिब, ग़ज़ल में आपकी शिर्कत और हौसला अफज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया I 

Comment by राज़ नवादवी on January 19, 2019 at 12:12am

आदरणीय तस्दीक़ अहमद खान साहब, आदाब. सुन्दर ग़ज़ल की प्रस्तुति पे दाद के साथ मुबारकबाद. सादर. 

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on January 18, 2019 at 8:30pm

जनाब भाई लक्ष्मण धा मी साहिब , ग़ज़ल में आपकी शिर्कत और हौसला अफज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया I 

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on January 18, 2019 at 8:30pm

मुहतरम जनाब समर साहिब आ दाब, ग़ज़ल पर आपकी खूबसूरत प्रतिक्रिया और हौसला अफज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया I 

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on January 18, 2019 at 7:08pm

आ. भाई तस्दीक अहमद जी, सुंदर गजल हुयी है । हार्दिक बधाई ।

Comment by Samar kabeer on January 18, 2019 at 2:09pm

जनाब तस्दीक़ अहमद साहिब आदाब,अच्छी ग़ज़ल हुई है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ ।

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on January 18, 2019 at 12:27pm

जनाब अनीस शेख साहिब  , ग़ज़ल में आपकी शिर्कत और हौसला अफज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया I 

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on January 18, 2019 at 12:26pm

जनाब सुरेन्द्र नाथ साहिब, ग़ज़ल पर आपकी सुंदर प्रतिक्रिया और हौसला अफज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया I 

Comment by Md. Anis arman on January 18, 2019 at 10:53am
  • जनाब तस्दीक़ अहमद खान साहब ग़ज़ल के लिए मुबारकबाद क़ुबूल कीजिए अच्छी ग़ज़ल हुई है 
Comment by नाथ सोनांचली on January 18, 2019 at 9:46am

आद0 तस्दीक अहमद खान जी सादर अभिवादन। बढ़िया ग़ज़ल कही आपने। दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ।

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