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फ्रोज़न माइंड ( लघुकथा)

अस्पताल में एक रूम में बैठी हुई थी। तभी एक नर्स दौड़ती हुई आई और कहने लगी, " मिस्टर सुदर्शन के साथ कौन है?"
काव्या के कान चौकन्ने हो गए, उसने उस नर्स से कहा," जी मैं हूँ। क्या बात है सिस्टर?"
"आई.सी.यू. में आपको तुरंत बुलाया है...।
नर्स की बात पूरी भी नही हुई और काव्या चीते की गति से उस ओर दौड़ पड़ी।
आई.सी. यू. का दरवाजा खोलते ही उसने कमरे में चारों तरफ नज़र घुमाई, उसके पिताजी पिछले एक माह से कोमा में थे, डॉक्टरों ने फिर भी उम्मीद नही छोड़ी थी। उसने डॉक्टर की तरफ देखते हुए पूछा," क्या हुआ डॉक्टर साहब?"
" काव्या जी! टुडे वी हेव डिसाइडेड टू डू सिटी स्कैन फॉर योर फाथर! इन द मॉर्निंग ही हेड़ ऑपणड हिज आईज...।"
" इस इट!... "
काव्या को लगा जैसे उसके पिताजी अपनी मानसिक परेशानी की क़ैद से बाहर आ रहे हैं... लगा जैसे उसके अँधेरे जीवन में रौशनी की एक किरण किसीने दिखाई है... और क्यों न हो पिताजी के अलावा उसका अपना था ही कौन! माँ को कभी देखा नही था। पिताजी ने ही दोनों दायित्वों को निभाया था।
उसकी तुन्द्रा तब भंग हुई जब डॉक्टर ने उसके सामने कुछ पेपर्स रखे ," प्लीज साइन योर कंसेंट!"
काव्या ने साइन कर दिये और अपने पिताजी के पास जाकर उनके कान में कहा," डैडी! यू विल हेव तो कम आउट ऑफ़ योर इलनेस। योर डॉटर वांट्स यू, लव यू डैडी...।"
उसके आँखों से अश्रु की कुछ बुँदे उसके पिताजी के हाथों पर पड़ी।काव्या का हाथों ने उनको थामे हुए था, उसको लगा जैसे पिताजी ने उसके स्पर्श को आज एक माह के बाद मेहसूस किया था, उनमें आज हरकत आई थी...
"हाँ डैडी! आपको इस क़ैद से बाहर लाकर ही रहूँगी।" और वह आत्मविश्वास से आई.सी.यू . से बाहर आ गयी।


मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment by Neelam Upadhyaya on March 6, 2019 at 4:13pm

आदरणीया कल्पना भट्ट जी, नमस्कार। बहुत ही अच्छी भावपूर्ण लघुकथा। प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई स्वीकार करें।

Comment by Nita Kasar on March 5, 2019 at 7:45pm

बेहद कठिन फैसला परंतु बेटी ने पिता की पीड़ा को समझा ।संवेदनशील कथा के लिये बधाई आद० कल्पना भट्ट जी ।

Comment by Hariom Shrivastava on March 4, 2019 at 11:05pm

वाह,वाहहह,बहुत सुंदर व मार्मिक लघुकथा

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on March 4, 2019 at 12:04pm

बढ़िया भावो से ओतप्रोत लघुकथा है आदरणीया

Comment by Samar kabeer on March 3, 2019 at 2:57pm

बहना कल्पना भट्ट "रौनक़" जी आदाब,अच्छी लघुकथा लिखी आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

पटल की दूसरी रचनाओं पर भी अपनी टिप्पणी दें ।

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on March 3, 2019 at 1:24pm

बहुत बढ़िया। हार्दिक बधाई आदरणीया कल्पना भट्ट जी।

कृपया ध्यान दे...

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