For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

मुख़्तलिफ़ हमने यहाँ सोच के पहलू देखे (३३ )


मुख़्तलिफ़ हमने यहाँ सोच के पहलू देखे
अक़्ल हैरान है,ऐसे मियाँ जादू देखे
**
आदमी शह्र में हैरान परेशाँ देखा
जब कि जंगल में बिना ख़ौफ़ के आहू देखे
**
जब अमावस को गया चाँद मनाने छुट्टी
नूर फ़ैलाने को बेताब से जुगनू देखे
**
दिल में इंसान के अल्लाह नदारद देखा
और हैवान बने आज के साधू देखे
**
प्यार अहसास है,महसूस किया जाता है
कैसे मुमकिन है कोई चश्म से ख़ुशबू देखे
**
रोटियाँ थोक में मिलती हैं कहीं कूड़े में
और कहीं भूख़ से दम तोड़ते 'चंदू ' देखे
**
शान से बेटी को रुख़्सत यहाँ करता कोई
और दुख़्तर को कहीं बेचते अब्बू देखे
**
दिन कभी ऐसा न आये किसी अब्बू पे 'तुरंत'
कोई फ़र्ज़न्द की मय्यत सरे-बाजू देखे
**
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' बीकानेरी |
०१/०३/२०१९
(मौलिक एवं अप्रकाशित )

Views: 469

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' on March 4, 2019 at 2:44pm

भाई बृजेश कुमार 'ब्रज' जी ,

हार्दिक आभार और अभिनंदन आपका।

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on March 4, 2019 at 12:03pm

बहुत ही खूब ग़ज़ल कही है आदरणीय..वाकई में बेमिसाल

Comment by गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' on March 3, 2019 at 7:13pm

आदरणीय Samar kabeer साहेब आदाब | रचना की सराहना और हौसला आफ़जाई के लिए सादर आभार | आप द्वारा दिए गए सभी सुझाव निश्चित रूप से बहुत ही सुन्दर है | तदनुसार संशोधन कर रहा हूँ | 

Comment by Samar kabeer on March 3, 2019 at 2:53pm

जनाब गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत' जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें ।

'खूब हैरत से थे लबरेज़ वो जादू देखे'

इस मिसरे को यूँ कर लें गेयता बढ़ जाएगी,और भर्ती के शब्द भी निकल जाएंगे:-

'अक़्ल हैरान है,ऐसे मियाँ जादू देखे'

'प्यार एहसास है महसूस फ़क़त होता है'

इस मिसरे को यूँ कर लें,गेयता बढ़ जाएगी:-

'प्यार अहसास है,महसूस किया जाता है' 

'कौन किस घर में है बैठा हुआ राहू देखे'

इस मिसरे पर थोड़ा विचार करें ।

'दिन कभी ऐसे न आये किसी अब्बा के 'तुरंत''

इस मिसरे को यूँ कर लें:-

'दिन कभी ऐसा न आये किसी अब्बू पे 'तुरंत'

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Admin added a discussion to the group चित्र से काव्य तक
Thumbnail

'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176

आदरणीय काव्य-रसिको !सादर अभिवादन !!  ’चित्र से काव्य तक’ छन्दोत्सव का यह एक सौ…See More
9 hours ago
Admin posted a discussion

"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183

आदरणीय साहित्य प्रेमियो, जैसाकि आप सभी को ज्ञात ही है, महा-उत्सव आयोजन दरअसल रचनाकारों, विशेषकर…See More
9 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . संयोग शृंगार
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। संयोग शृंगार पर सुंदर दोहे हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
12 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . . संयोग शृंगार

दोहा पंचक. . . .संयोग शृंगारअभिसारों के वेग में, बंध हुए निर्बंध । मौन सभी खंडित हुए, शेष रही…See More
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२१/२१२१/१२२१/२१२ ****** घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये उघड़े  शरीर  आप  ही  सम्मान  हो गये।१। *…See More
Saturday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
Friday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"क्षमा कीजियेगा 'मुसाफ़िर' जी "
Thursday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसफ़िर' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला आपकी…"
Thursday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। सुंदर गजल हुई है। भाई रवि जी की सलाह से यह और निखर गयी है । हार्दिक…"
Feb 5
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
Feb 4
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"ग़ज़ल 2122   1212  22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत में क्या से क्या हो गए महब्बत में मैं…"
Feb 4

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ
"  आपका हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी ’मुसाफिर’ जी   "
Feb 4

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service