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महाशिवरात्रि की शुभकामनाओं सहित कुछ
- कह मुकरिंयाँ-
---------------------
1-
उसे कहें सब औघड़दानी,
फिर भी मैं उसकी दीवानी,
बड़ा निराला उसका वेश,
क्या सखि साजन? नहीं महेश !!
2-
खाता है वह भाँग धतूरा,
फक्कड़नाथ लगे वह पूरा,
पर मेरा मन उस पर डोले,
क्या सखि साजन ? ना बम भोले !!
3-
लोग कहें वह पीता भंग,
मुझ पर चढ़ा उसी का रंग,
मेरा मन उस पर ही डोले,
क्या सखि साजन ? ना बम भोले !!
4-
भस्म रमाता वह  वेताली,
लेेेकिन मैं उसकी मतवाली,
क्रोध करे तब धरती डोले,
क्या सखि साजन? ना बम भोले !!


(मौलिक व अप्रकाशित)
**हरिओम श्रीवास्तव**

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Comment by Hariom Shrivastava on March 11, 2019 at 10:53am

हार्दिक आभार आदरणीय सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुश त्रप' जी। आपकी प्रेरक प्रतिक्रिया से सृजन सार्थक हुआ।

Comment by नाथ सोनांचली on March 10, 2019 at 5:02pm

आद0 हरिओम श्रीवास्तव जी सादर अभिवादन। अच्छी कह मुकरी के लिए बधाई

Comment by Hariom Shrivastava on March 7, 2019 at 5:33pm

आदरणीय समर कबीर जी आपकी उपस्थिति व हौसलाअफजाई हेतु हार्दिक आभार।

Comment by Samar kabeer on March 7, 2019 at 2:15pm

जनाब हरिओम श्रीवास्तव जी आदाब,अच्छी रचना हुई है,बधाई स्वीकार करें ।

Comment by Hariom Shrivastava on March 5, 2019 at 9:25pm

आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी,आपकी उपस्थिति व उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया से सृजन सार्थक हुआ। हृदयतल से आपका आभार।।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on March 5, 2019 at 4:13pm

आ. भाई हरिओम जी, सुंदर कहमुकरियाँ हुयी हैं । हार्दिक बधाई।

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