For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

गाँव के दोहे - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

गाँव के दोहे

संगत में जब से पड़ा, सभ्य नगर की गाँव
अपना घर वो त्याग कर, चला गैर के ठाँव।१।
***
मिलना जुलना बतकही, पनघट पर थी खूब
सब  अपनापन  मर  गया, मोबाइल  में  डूब।२।
***
बिछी सड़क कंक्रीट की, झुलसे जिसमें पाँव
पीपल कटकर गुम हुये, कौन करे फिर छाँव।३।
**
सेज माल  के  वास्ते, कटे  खेत  खलिहान
जिससे लोगों मिट गयी, गाँवों की पहचान।४।
**
सड़क योजना खा गयी, पगडंडी हर ओर
पहले सी होती  नहीं, अब  गाँवों  की भोर।५।
**
मौलिक/अप्रकाशित
लक्ष्मण धामी "मुसाफिर'

Views: 615

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on August 12, 2019 at 11:19am

आ. भाई विजय जी, दोहों पर उपस्थिति और प्रशंसा के लिए आभार।

Comment by Dr. Vijai Shanker on August 9, 2019 at 9:21pm

आदरणीय लक्ष्मण धामी जी , दोहे बहुत ही सटीक हैं , मोबाइल वाला भी , अब संबंधों का नहीं सिर्फ सूचना का युग है , आदमी आदमी को सूचना देता है , संवेदना- शून्य होकर। बधाई इस प्रस्तुति हेतु , सादर।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on August 9, 2019 at 11:23am

आ. भाई समर जी, सादर अभिवादन। आपकी सकारात्मक प्रतिक्रिया से मन आस्वस्थ हुआ । दोहों का मान बढ़ाने के लिए आभार।

Comment by Samar kabeer on August 8, 2019 at 3:38pm

जनाब लक्ष्मण धामी 'मुसाफ़िर' जी आदाब,गाँव का दर्द समेटे अच्छे दोहे लिखे आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on August 7, 2019 at 4:51pm

आ भाई विजय जी, सादर आभार।

Comment by vijay nikore on August 7, 2019 at 10:04am

आपने दोहे बहुत अच्छे लिखे हैं। बधाई, आदार्णीय लक्ष्मण जी।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on August 7, 2019 at 5:25am

आ.सीएम उपाध्याय जी, सादर अभिवादन।दोहों की प्रशंशा के लिए हार्दिक धन्यवाद।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on August 7, 2019 at 5:23am

आ. भाई प्रदीप जी, सादर अभिवादन।दोहों पर उपस्थिति और प्रशंसा के लिए आभार।

Comment by C.M.Upadhyay "Shoonya Akankshi" on August 6, 2019 at 7:06pm

 लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी,
कथ्य और शिल्प  दोनों दृष्टि से बेजोड़ दोहों के लिए हार्दिक बधाई | 

Comment by प्रदीप देवीशरण भट्ट on August 6, 2019 at 4:49pm

उत्तम दोहे बधाई धामी जी

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"ग़ज़ल   बह्र ए मीर लगता था दिन रात सुनेगा सब के दिल की बात सुनेगा अपने जैसा लगता था…"
5 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

हरकत हमें तो वैद की रखती तनाव में -लक्ष्मण धामी 'मुसफिर'

बदला ही राजनीति के अब है स्वभाव में आये कमी कहाँ  से  कहो  फिर दुराव में।१। * अवसर समानता का कहे…See More
5 hours ago
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
" दोहा मुक्तक :  हिम्मत यदि करके कहूँ, उनसे दिल की बात  कि आज चौदह फरवरी, करो प्यार…"
6 hours ago
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"दोहा एकादश. . . . . दिल दिल से दिल की कीजिये, दिल वाली वो बात । बीत न जाए व्यर्थ के, संवादों में…"
8 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"गजल*****करता है कौन दिल से भला दिल की बात अबबनती कहाँ है दिल की दवा दिल की बात अब।१।*इक दौर वो…"
17 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"सादर अभिवादन।"
17 hours ago
Admin replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"स्वागतम"
22 hours ago
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post ग़ज़ल
"  आदरणीय रवि भसीन 'शाहिद' जी सादर नमस्कार, रास्तो पर तीरगी...ये वही रास्ते हैं जिन…"
yesterday
Admin added a discussion to the group चित्र से काव्य तक
Thumbnail

'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176

आदरणीय काव्य-रसिको !सादर अभिवादन !!  ’चित्र से काव्य तक’ छन्दोत्सव का यह एक सौ…See More
Tuesday
Admin posted a discussion

"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183

आदरणीय साहित्य प्रेमियो, जैसाकि आप सभी को ज्ञात ही है, महा-उत्सव आयोजन दरअसल रचनाकारों, विशेषकर…See More
Tuesday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . संयोग शृंगार
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। संयोग शृंगार पर सुंदर दोहे हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
Tuesday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . . संयोग शृंगार

 अभिसारों के वेग में, बंध हुए निर्बंध । मौन सभी खंडित हुए, शेष रही मधुगंध ।। प्रेम लोक की कल्पना,…See More
Feb 8

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service