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ज़मी ये हमारी वतन ये हमारा  - सलीम 'रज़ा' रीवा

ज़मी ये हमारी वतन ये हमारा 

उजड़ने न देंगे चमन ये हमारा 

वतन के लिए जो मेरी जान जाए

ख़ुदारा यहीं  फिर जनम लें दुबारा 

 

 

जो सरहद पे अपने सरों को कटाकर

अमर हो गये जो वतन को बचाकर

वो ख़ुश्बू के जैसे महकते रहेंगे

चमकते रहेंगे वो बनकर सितारा

 

भगत बोष सुखदेव बलिदानियो को

न भूलेंगे हम उनकी क़ुर्बानिओं को

वो फांसी में भी चढ़ गए हँसते हँसते

वतन के लिए हर सितम था गवारा 

 

तुम्हे याद करते हैं चाँद और तारे

तुम्हे  सरहदों की है मिट्टी पुकारें 

मोहब्बत की शम्मा जलाते रहेंगे

न टूटेगा रिश्ता हमारा तुम्हारा

 

न मज़हब सिखाता है तकरार बाँटो

अगर बाँटना हो सदा प्यार बाँटो 

अमन चैन हो सारी दुनिया में क़ाएम

ज़माने में हो हर तरफ भाई चारा 

_________________________

    सलीम रज़ा रीवा 

Views: 577

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Comment by vijay nikore on August 22, 2019 at 8:56pm

//

न मज़हब सिखाता है तकरार बाँटो

अगर बाँटना हो सदा प्यार बाँटो 

अमन चैन हो सारी दुनिया में क़ाएम

ज़माने में हो हर तरफ भाई चारा //

बहुत ही खूबसूरत भाव। आपको हार्दिक बधाई, मित्र सलीम जी।

Comment by Pratibha Pandey on August 16, 2019 at 4:33pm

आदरणीय सलीम जी बहुत ही  अच्छी रचना , बधाई 

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on August 16, 2019 at 6:30am

आ. भाई सलीम जी, सुंदर रचना हुई है । हार्दिक बधाई।

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