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ग़ज़ल : ख़ून से मैंने बनाए आँसू

अरकान : 2122 1122 22

चाहा था हमने न आए आँसू
उम्र भर फिर भी बहाए आँसू

कोई तो हो जो हमारी ख़ातिर
पलकों पे अपनी सजाए आँसू

मार के अपने हसीं सपनों को
ख़ून से मैंने बनाए आँसू

वक़्त बेवक़्त कहीं भी आ कर
याद ये किसकी दिलाए आँसू

कोई भी तेरा न दुनिया में हो
रात दिन तू भी गिराए आँसू

दुनिया में इनकी नहीं कोई क़द्र
इसलिए मैंने छुपाए आँसू

आपसे मिल के ये पूछूँगा मैं
आपने कितने बहाए आँसू

(मौलिक व अप्रकाशित)

Views: 519

Comment

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Comment by Mahendra Kumar on December 10, 2019 at 10:29am

बहुत-बहुत शुक्रिया आदरणीय लक्ष्मण धामी जी। हृदय से आभारी हूँ। सादर।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on December 9, 2019 at 6:22am

ख. भाई महेंद्र जी, उम्दा गजल हुई है हार्दिक बधाई।

Comment by Mahendra Kumar on December 8, 2019 at 6:19pm

बहुत-बहुत शुक्रिया आदरणीय समर कबीर सर। हृदय से आभारी हूँ। सादर आदाब।

Comment by Samar kabeer on December 8, 2019 at 12:17pm

जनाब महेन्द्र कुमार जी आदाब,ग़ज़ल का अच्छा प्रयास हुआ है,बधाई स्वीकार करें ।

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