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भूख गरीबी जाति धर्म से लड़ना नूतन साल यहाँ - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२२२/२२२२/२२२२/२२२

बर्षों  से  जब  रहते  आये  दुख  से  मालामाल  यहाँ
सुख आकर भी कर पायेगा फिर कितना कंगाल यहाँ।।


तुम रख लेना शायद तुमको उम्मीदों का साल मिले
हमने तो हर पल  है  खोया  उम्मीदों का साल यहाँ।।


शीष झुकाये रहे सहिष्णुता जैसे सब की दोषी हो
खूब मजहबी झगड़े रहते ताने अब तो भाल यहाँ।।


साल नया कितनी उम्मीदें जनता को बचने की देगा
नित्य नया लेकर आती है राजनीति अब जाल नया।।


भाई-चारा  प्यार-मुहब्बत  सब  एक  तरफा  बातें हैं
नफरत के दावानल हर घर ठोक रहे अब ताल यहाँ।।


मानवता के  सत्कर्मों  से  मजहब  दिखते  दूर  बहुत
गलत काम को जाति धर्म की बन जाती है ढाल यहाँ।।


शायर लेखक कवि मजहबी वर्ग बनाकर लिखते हैं
कौन उधेड़ेगा दंगों  की  बोलो  फिर अब खाल यहाँ।।


रोकर कहता साल  पुराना  मैं  हो बेबस जाता हूँ
भूख गरीबी जाति धर्म से लड़ना नूतन साल यहाँ।।

मौलिक.अप्रकाशित
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

****

ओबीओ परिवार के समस्त सदस्यों को नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ...

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Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on January 5, 2020 at 4:36am

आ. भाई  तेजवीर जी, सादर अभिवादन।  गजल पर उपस्थिति और सराहना के लिए आभार।

Comment by TEJ VEER SINGH on January 4, 2020 at 11:21am

हार्दिक बधाई आदरणीय  लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी।बेहतरीन गज़ल।

भाई-चारा  प्यार-मुहब्बत  सब  एक  तरफा  बातें हैं
नफरत के दावानल हर घर ठोक रहे अब ताल यहाँ।।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on January 4, 2020 at 6:25am

आ. भाई प्रदीप देवीशरण जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और सराहना के लिए आभार।

Comment by प्रदीप देवीशरण भट्ट on January 2, 2020 at 12:51pm

वाह वाह क्या कहने लक्ष्मण जी

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on January 1, 2020 at 8:08pm

आ. सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' जी, गजल की प्रशंसा के लिए हार्दिक धन्यवाद।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on January 1, 2020 at 8:07pm

आ. भाई आशीष यादव जी, गजल पर उपस्थिति और प्रशंसा के लिए आभार।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on January 1, 2020 at 8:07pm

आ. भाई डॉ छोटेलाल जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद।

Comment by नाथ सोनांचली on January 1, 2020 at 6:28pm

आद0 लक्ष्मन धामी मुसाफिर जी नववर्ष के परिपेक्ष्य में अच्छी रचना सृजित की आपने। बधाई स्वीकार कीजिए।

Comment by आशीष यादव on January 1, 2020 at 1:24pm

इसी फ़रेब में सदियां गुजार दी हमने,

गुज़िश्ता साल से शायद ये साल बेहतर हो। 

समय-काल की बातों को बखूबी बयाँ किया है। बधाई स्वीकार करें।

Comment by डॉ छोटेलाल सिंह on January 1, 2020 at 1:14pm

आदरणीय लक्ष्मण धामी जी नव वर्ष की मंगल कामनाओं सहित इस सुंदर रचना के लिए बहुत बहुत बधाई

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