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हाईकू
----------------------
जंगो-जुनून
हर आदमी अँधा 
किसे सुकून.
--------------------
मस्तक सजे
माटी मेरे देश की
दिल ही पूजे
-------------
क्या स्वाद है 
संस्कार पीढ़ियों का
बुनियाद है.
-------------
परवाने को
राह दिखाती शम्मा
घर आने को.
-------------
दल-दल है 
सियासी गलियारा
हल-चल है
------------
ये छुई-मुई
हांथों की रिश्तेदारी
मित्रता हुई.
-----------------
जिस्मानी-रिश्ता
रूह की राह ढूंढ़ 
बन  फ़रिश्ता.
------------------
बातों में बात
जलेबियाँ तैयार
बुरी ये बात.
----------------
फसल खेत
एक दूजे क़े लिए
साहिल रेत.
--------------
पद आरूढ़
किंकर्तव्यविमूढ़
राज है गूढ़.
---------------
साँस पे साँस
चलती है ज़िन्दगी
है अहसास.
--------------
सवाल उठा
बढ़ी हैं जरूरतें
जीवन घटा.
---------------
--avinash bagde.

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सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on June 20, 2012 at 10:16pm

एक से बढ़कर एक हाइकु 

Comment by SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR on June 20, 2012 at 8:43pm

मस्तक सजे

माटी मेरे देश की
दिल ही पूजे
-------------
क्या स्वाद है 
संस्कार पीढ़ियों का
बुनियाद है.
-------
जिस्मानी-रिश्ता
रूह की राह ढूंढ़ 
बन  फ़रिश्ता.
------------------
आदरणीय अविनाश  जी    बहुत सुन्दर हाइकु ....थोड़े में इतना सारा पिरो डाला आप ने ....
एक शब्द आप का किमकर्त्तव्यमूढ़................ किंकर्तव्यविमूढ़  तो नहीं ....काश ये राजनीति सुन्दर और जन मन भावन नीति बने 
भ्रमर ५ 
Comment by Rekha Joshi on June 20, 2012 at 6:56pm

Avinash ji 

साँस पे साँस

चलती है ज़िन्दगी
है अहसास.,kam sbdon me bnti hae baat ,achchha hae hiiku 
Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on June 20, 2012 at 3:02pm

सर जी बधाई, 

हाई कु हैं या हातिम ताई 

Comment by AVINASH S BAGDE on June 19, 2012 at 8:56pm
Comment by Albela Khatri on June 19, 2012 at 8:38pm

ek se badh kar ek

tohfe aaj laaye anek

__jai ho !

Comment by कुमार गौरव अजीतेन्दु on June 19, 2012 at 8:18pm
पुनः अच्छे हाइकु अविनाश सर...बधाई

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