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क्षणिकायें - 4 -डॉo विजय शंकर

प्यार का
अर्थ खोजोगे
प्यार खो दोगे

दोस्ती की
वजह खोजोगे
दोस्ती खो दोगे

रिश्तों का अर्थशास्त्र
न काम करे अर्थ ,
न करे शास्त्र

राजनीति
बिना दूध दही
ढेरों नवनीत

शाश्त्रों का अर्थ
अपना अपना
अर्थशास्त्र

मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment

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Comment by Dr. Vijai Shanker on December 3, 2014 at 6:58pm
आदरणीय राम शिरोमणि पाठक जी, बधाई के लिए ह्रदय से धन्यवाद।
Comment by Dr. Vijai Shanker on December 3, 2014 at 6:53pm
आदरणीय श्याम नारायण वर्मा जी, सोमेश जी, हरी प्रकाश दुबे जी , रचना को स्वीकार करने और मेरा उत्साहवर्धन करने हेतु आभार , सादर।
Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on December 3, 2014 at 6:28pm

विजय सर  i

आपकी  इस बुद्धि प्रधान रचना पर आपको  बधाई

Comment by Dr. Vijai Shanker on December 2, 2014 at 7:23pm
आदरणीय मैठाणी जी ,
आपकी इस बात से मैं पूर्णतया सहमत हूँ कि विचार या भाव ही मुख्य होते हैं , और मैंने आपकी बात मान भी ली।
पर मेरा एक निवेदन है कि हाइकू की वर्ण सीमा हेतु एक बार अवसर मिले तो गूगल कर लें , विविधतायें हैं।
सादर।
Comment by Dayaram Methani on December 2, 2014 at 2:30pm

आदरणीय डा. विजयशंकर जी,

मेरी राय में हाईकु की जो विधा है उसे वैसे ही रखा जाये तो बेहतर होगा। आप अपनी इस सुंदर रचना को क्षणकिाये लिख दें तो कुछ भी अनुचित नहीं होगा। आपके भाव तो तारीफ के काबिल है ही।

Comment by ram shiromani pathak on December 2, 2014 at 1:37pm

सुन्दर प्रस्तुति आदरणीय बाकी गुणीजनों ने कह दिया है //हार्दिक बधाई आपको

Comment by Hari Prakash Dubey on December 2, 2014 at 12:48pm

प्यार का
अर्थ खोजोगे
प्यार खो दोगे...बहुत खूब कहा आपने ,हार्दिक बधाई आदरणीय डॉ ० विजय शंकर जी !

Comment by Dr. Vijai Shanker on December 2, 2014 at 1:32am
आदरणीय मैठाणी जी ,
जो माजरा आपने उठाया वह उलझन मुझे भी थी , पर मैंने सोचा जापान से आयातित इस विधा का हिंदी - देवनागरी में कुछ न्यूनाधिक परिवर्तन कर , कुछ नव- प्रयोग कर लिया जाये , बस। अब आप बताये कि मान्य होगा या फिर बदल कर शीर्षक क्षणिकायें ही कर दूँ। आपके सुझाव का इन्तेजार यहेगा।
सादर।
Comment by Dayaram Methani on December 1, 2014 at 10:53pm

आदरणीय डा. विजयशंकर जी,

 मेरी जानकारी के अनुसार हाईकु में तीन पंक्तियों होती है आैर उसमें 5, 7, 5 वर्ण होते है। आपके उपरोक्त हाईकु इस दृष्टि से मुझे कुछ समझ नहीं आ रहे है। यहां मैं इसे समझने के लिये लिख रहा हूं। आप इसे आलोचना न समझें।

आपके पहले हाईकु की प्रथम पंक्ति में "प्यार का" है। इसकी गिनती 3 होती है यदि यहां आपके प्यार का आधे अक्षर को गिन लें तो फिर तीसरी पंक्ति में सात अक्षर हो जायेंगे जबकि यहां 5 अक्षर ही आने चाहिये। इस दृष्टि से दूसरी पंक्ति में सात के बजाय पांच अक्षर की गिनती है बैठ रही है। कृपया मेरी जानकारी के लिये बतायें कि ये माजरा क्या है?आपने किस तरह गिनती की है? मार्गदर्शन का कष्ट करे।

Comment by somesh kumar on December 1, 2014 at 10:38pm

haiku hote hue bhi ye kavita si anubhuti kra rhi hain ,sunder prstuti 

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