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तुम्हारा मौन जो कह गया -- डॉo विजय शंकर

दिल में जो था मेरे ,
मैंने कहा , मैं कह गया ॥
सब कुछ कह गया ॥
सुन लिया तुमने ,
और कुछ ,
कुछ भी नहीं कहा ॥
शांत , सब सुन लिया ,
मौन एक , बस , धर लिया।
ये मौन तुम्हारा ,
दीर्घ मौन तुम्हारा ,
कितना कुछ कह गया ,
कितना गहरा उतर गया ||
इसी में डूबता - उतराता रहूंगा
मैं , अब उम्र भर ,
और समझता रहूंगा ,
विवशता तुम्हारी ,
सब सुनना , सुन लेना ,
कुछ न कहना , कुछ भी न कहना ,
एक बोझ , लिए रहना ,
उस बोझ को सहते रहना ||
भारी मजबूरी तुम्हारी ॥

मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment by Dr. Vijai Shanker on December 18, 2014 at 7:44pm
सही कहा आपने , मौन बोलता है, तौलता है। आपकी प्रतिक्रिया हेतु धन्यवाद आदरणीय श्रीमती मंजरी पांडे जी , सादर।
Comment by Dr. Vijai Shanker on December 18, 2014 at 7:10pm
मौन प्रेम की निगूढ़ भाषा है i और कहीं कहीं तो वाणी रहित भाषा है , मौन अभिव्यक्ति, स्वीकृति है, समझ है, उपेक्षा भी है, तिरस्कार भी है , ख़ुशी है, दुःख है, विवशता है, वेदना है, लाचारी है, …… और भी बहुत कुछ है।
आपकी सारगर्भित प्रतिक्रिया के लिए आभार , आदरणीय डॉ o गोपाल नारायण जी, सादर।
Comment by mrs manjari pandey on December 18, 2014 at 6:31pm
बहुत सुन्दर आदरणीय विजय शंकर जी । मौन ही तो बोलता है , तोलता है । बोलता है तो बकता है. ।
Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on December 18, 2014 at 5:53pm

विजय सर !

मौन प्रेम की निगूढ़ भाषा है i  आपका मौन अंतस में कितना मुखर है i  सादर i

Comment by Dr. Vijai Shanker on December 18, 2014 at 12:35pm
रचना को स्वीकृति प्रदान करने के लिए और आपकी बधाई के लिए बहुत बहुत धन्यवाद आदरणीय हरी प्रकाश दुबे जी , सादर।
Comment by Hari Prakash Dubey on December 18, 2014 at 11:59am

दीर्घ मौन तुम्हारा ,
कितना कुछ कह गया....आदरणीय डॉ विजय शंकर जी सुन्दर रचना पर मेरी भी बधाई स्वीकार करें ! सादर !

Comment by Dr. Vijai Shanker on December 18, 2014 at 10:20am
आदरणीय मिथिलेश वामनकर जी, रचना को स्वीकार करने हेतु आभार , बधाई के लिए धन्यवाद , सादर।

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on December 17, 2014 at 10:56pm

आदरणीय डॉ विजय शंकर जी सुंदर रचना के लिए बहुत बहुत बधाई

Comment by Dr. Vijai Shanker on December 17, 2014 at 9:55pm
बहुत सही कहा आपने जो मौन कहता है वह लाख शब्दों में भी बयान नहीं हो पाता है , न प्रकृति का कहा, न ईश्वर का कहा। , आदरणीय सोमेश कुमार जी ,रचना को पसंद करने हेतु धन्यवाद , सादर।
Comment by Dr. Vijai Shanker on December 17, 2014 at 9:51pm
रचना आपको पसंद आई , आभार , आदरणीय शिज्जु शकूर जी , बधाई हेतु धन्यवाद , सादर।

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