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खूब कहा कुरसी का किस्सा आदरणीय डॉ विजय शंकर सर, हार्दिक बधाई
ये कुर्सी - सभ्यता है ,
कुर्सी है तो सभ्यता है,
नाम है, शान है, उत्थान है
नाम के आगे पीछे महान है ,
वरना दुनियाँ बड़ी बेईमान है ,
आपकी नहीं कोई पहचान है |......... दमदार पंक्तियाँ
सबसे शक्तिशाली कुर्सी ही है....इस कुर्सी महिमा हेतु बधाई आदरणीय डॉ विजय शंकर जी.
कुर्सी महिमा और उसके चरित्र का सुंदर वर्णन |बधाई सर
कुर्सी है तो आस है ,
अपना चतुर्दिश विकास है.....बहुत बढ़िया गुणगान. बधाई स्वीकारें आदरणीय डा. विजय जी.
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