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सत्य का सम्मान - डॉo विजय शंकर

सत्य का
सम्मान करते हैं ,
दूर से
प्रणाम करते हैं।
उसके पास आने से
डरते हैं।
जानते हैं ,
काट नहीं लेगा
पर झूठ
जो फैला रखा है
अपने चारों ओर
उसे दूर करने से
डरते हैं।

मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment by shree suneel on March 7, 2016 at 11:03am
बहुत ख़ूब.. चंद पंक्तियों की इस सार्थक और सशक्त प्रस्तुति के बहुत बहुत बधाइयाँ आपको आदरणीय विजय शंकर सर जी. सादर
Comment by Dr. Vijai Shanker on March 7, 2016 at 2:19am
प्रिय मिथिलेश वामनकर जी , धन्यवाद , आपकी हार्दिक बधाई हेतु ह्रदय से आभार , सादर।

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on March 7, 2016 at 12:27am

आदरणीय डॉ.विजय शंकर  सर, गहन चिंतन का परिणाम हुआ करती है ऎसी सर्जना, इस प्रस्तुति हेतु हार्दिक बधाई 

Comment by Dr. Vijai Shanker on March 6, 2016 at 6:39am
आदरणीय समर कबीर साहब, नमस्कार , इन चार पंक्तियों ने आपको आकर्षित किया और बेहद प्रभावित किया , इससे इन पंक्तियों का मान बढ़ा. . आपकी प्रशस्ति एवं बधाई के लिए आपका ह्रदय से बहुत बहुत आभार , धन्यवाद , सादर।
Comment by Dr. Vijai Shanker on March 6, 2016 at 6:25am
आदरनीय तेजवीर सिंह जी , चार पंक्तियों में अंकित छोटी सी कविता ( ? ) को पसंद करने के लिए आभार एवं धन्यवाद , सादर।
Comment by Samar kabeer on March 5, 2016 at 5:51pm
आली जनाब डॉ.विजय शंकर जी आदाब,मुख़्तसर लेकिन मुकम्मल इस प्रस्तुति ने बेहद मुतास्सिर किया,दाद के साथ मुबारकबाद कुबूल फरमाएँ ।
Comment by TEJ VEER SINGH on March 5, 2016 at 3:42pm

हार्दिक बधाई आदरणीय डॉ विजय शंकर जी!बेहतरीन प्रस्तुति!

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