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युग है , उसी को समर्पित -क्षणिकाएँ- डॉo विजय शंकर

1 .
भगवान है ,
कैसे भी पूजो
चलता है ,
ये तो शैतान है
जिसको
पूजने के तरीके
निराले है।

2 .
झूठ है ,
सब जानते हैं
झूठ का सच
सब जानते हैं
फिर भी किस कदर
अनजान बनते हैं ..............

3 .
आदमी आज का
कल पुर्जों सा ,
जीवन उसका , यांत्रिक ,
संवेदनशीलता से मुक्त ,
मशीनें बेहद सेंसिटिव,
सम्भाल के , कलयुग है …………

4 .
वफ़ा के प्रतीक कुत्ते
गली गली मिल जाते हैं
लावारिस।
कभी कहीं कोई
गधा भी देखा है ,
लावारिस ?

मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on May 24, 2016 at 10:44pm
वाह्ह्ह्ह्!बहुत सुंदर तार्किक क्षणिकाएँ।हार्दिक बधाई सर।

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on May 24, 2016 at 8:45pm

तर्क की कसौटी पर भी ये क्षणिकायें विमर्श को न्यौतती हुई सी हैं आदरणीय विजय शंकर जी. हर एक के अलग-अलग अंदाज़ हैं.

हार्दिक शुभकामनाएँ

 

Comment by Dr. Vijai Shanker on May 20, 2016 at 6:07am
ह्रदय से आभार , आदरणीय डॉo गोपाल नारायण जी , सादर नमन।
Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on May 19, 2016 at 8:40pm

वाह वाह विजय सर ! क्या कमाल का  आब्जर्वेशन है . नतमस्तक .

Comment by Dr. Vijai Shanker on May 18, 2016 at 8:59pm
आदरणीय डॉo आशुतोष मिश्रा जी , थोड़ी व्यस्तता अवश्य है पर लिखना जारी है ,कुछ कम आ शाय हुआ है। आपको क्षणिकाएँ पसंद आईं , आभार एवं धन्यवाद , सादर
Comment by Dr Ashutosh Mishra on May 18, 2016 at 4:48pm

आदरणीय विजय सर एक मुद्दत बाद आपकी रचना पढने का सौभाग्य मिला ..सभी छनिकाएं बेहद पसदं आई हार्दिक बधाई स्वीकार करें सादर  

Comment by Dr. Vijai Shanker on May 18, 2016 at 7:51am
आदरणीय सुशील सरना जी आपको क्षणिकाएँ पसंद आईं एवं आपकी हार्दिक बधाई के लिए ह्रदय से आभार एवं धन्यवाद , सादर।
Comment by Dr. Vijai Shanker on May 18, 2016 at 7:48am
आदरणीय समर कबीर साहब , नमस्कार , आपको क्षणिकाएँ पसंद आईं और उन्हें स्वीकृति प्रदान करने एवं आपकी हार्दिक बधाई के लिए ह्रदय से बहुत बहुत आभार एवं धन्यवाद , सादर।
Comment by Dr. Vijai Shanker on May 18, 2016 at 7:43am
प्रिय मिथिलेश वामनकर जी , रचना को स्वीकृति प्रदान करने एवं आपकी हार्दिक बधाई के लिए ह्रदय से आभार एवं धन्यवाद , सादर।
Comment by Dr. Vijai Shanker on May 18, 2016 at 7:41am
प्रिय कृष्ण मिश्रा जी , रचना को स्वीकृति प्रदान करने के लिए ह्रदय से आभार एवं धन्यवाद , सादर।

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