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गणतंत्र - एक सूक्ष्म कविता - डॉo विजय शंकर

सूक्ष्म कविता - गणतंत्र - डॉo विजय शंकर

गण का तंत्र
या
तंत्र का गण ?

मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment by Dr. Vijai Shanker on February 4, 2019 at 4:51am

आदरणीय सुरेन्द्रनाथ कुशक्षत्रप जी , आपका ह्रदय से आभार एवं धन्यवाद , सादर।

Comment by नाथ सोनांचली on January 30, 2019 at 10:42pm

आद0डॉ विजय शंकर जी सादर अभिवादन। प्रश्न छोड़ती इस सूक्ष्म कविता पर आपको बधाई देता हूँ। सादर

Comment by Dr. Vijai Shanker on January 30, 2019 at 6:41am

आदरणीय समर कबीर साहब , नमस्कार , आपका बहुत बहुत आभार , बात कितनी भी छोटी हो आपकी नज़र में आ ही जाती है।आभार। न जाने क्यों कभी कभी मुझे लगता है कि क्या हमारी समस्याएं सच में इतनी बड़ी हैं या बस बात इतनी सी है कि सही छोर हाथ नहीं लग रहा है वरना उलझाव इतना भी नहीं है कि गुच्छा सुलझ न सके। आपकी विशद सराहना के लिए ह्रदय से बहुत बहुत आभार। बधाई के लिए दिल से धन्यवाद , सादर।

Comment by Dr. Vijai Shanker on January 30, 2019 at 6:27am

आदरणीय शैख़ शहजाद उस्मानी जी , आभार ! आपकी नज़र का जो पद ही गई वरना मुझे तो लगा था कि शायद ही किसी की नज़र में आये यह सूक्ष्म कविता।
कोशिश तो हाईकू की भी कर लेते हैं पर यह तो मात्र एक सूक्ष्म प्रश्न है , अक्सर हम अपने सामने की सर्वोच्च प्राथमिकताओं पर ध्यान ले ही नहीं जा पाते और एक ढपली बजाते रह जाते हैं। बस , लक्ष्य उसी को उजागर करना था , सफल भी हुआ , आपने सराहा , बहुत बहुत धन्यवाद। सादर।

Comment by Samar kabeer on January 28, 2019 at 3:06pm

जनाब डॉ. विजय शंकर जी आदाब,क्या बात है,वाह, दो पंक्तियों में आपने पूरी किताब लिख दी,इसे कहते हैं हुस्न-दस्तकारी, बहुत ख़ूब इस शानदार प्रस्तुति पर दिल से बधाई स्वीकार करें ।

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on January 28, 2019 at 10:58am

वाह। बेहतरीन सारगर्भित कटाक्ष, विचारोत्तेजक सृजन। हार्दिक बधाई आदरणीय डॉ. विजय शंकर साहिब। हाइकु काव्य-विधा में भी 17 वर्ण व्यवस्था 5-7-5 परिपालन करते हुए बीच की पंक्ति में 'या' के स्थान पर 7 वर्णों की लघु पंक्ति जोड़ कर बेहतरीन संदेश वाहक हाइकु आप कह सकते हैं। यथा : गण का तंत्र (5) सत्ता,जत्था,व्यवस्था (7)[आधा वर्ण नहीं गिना जाता)
तंत्र का गण। (5)

वैसे क्या आप हाइकु भी लिखते रहे हैं?

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