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ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा

साथियों,

विगत कई माह से ओ बी ओ लाइव आयोजनों में कतिपय कारणवश सदस्यों की भागीदारी बहुत ही कम हो रही है । विगत दिनों एक अनौपचारिक बातचीत के क्रम में आदरणीय तिलक राज कपूर जी का सुझाव आया कि क्यों न सभी चारों लाइव आयोजनों को माह के प्रथम सप्ताह में लगा दी जाय और एक साथ पूरे माह के लिए लाइव कर दिया जाय, जिससे सदस्यों की सहभागिता बढ़ सकेगी ।

मित्रों, इस विषय पर आप सभी अपना मंतव्य, नवीन विचार रखें ताकि कुछ बेहतर किया जा सके ।

सादर

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सभी सदस्यों को सादर सप्रेम राधे राधे

सभी चार आयोजन को दो भागों में विभक्त किया जा सकता है।

( 1 ) महा- उत्सव एवं छंदोत्सव ----- मास के प्रथम शनिवार से द्वितीय रविवार तक ( कुल 9 दिन )

( 2 ) तरही मुशायरा एवं लघु कथा ---- मास के तृतीय शनिवार से चतुर्थ रविवार तक  ( कुल 9 दिन )

नव वर्ष 2083 की शुभकामनाओं के साथ

अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव  

यह भी व्यवहारिक सुझाव है। इस प्रकार प्रयोग कर अनुभव प्राप्त किया जा सकता है। 

आदरणीय प्रबंधन,

यह निश्चित ही चिंता का विषय है कि विगत कालखंड में यहाँ पर सहभागिता एकदम नगण्य हो गयी है.
इस के कई कारण हैं लेकिन चूँकि हम सुधार की संभावनाओं की ओर देख रहे हैं अत: कुछ सुझाव प्रस्तुत हैं.
१) चारो आयोजन माह के 1 से 7 के बीच पोस्ट हो जाएं .
२) चारो आयोजन एकसाथ 21 से 30 तक जारी रहे. (एकसाथ होने से कई साथी अन्य विधाओं में भी झांकेंगे और टिप्पणी करेंगे -ऐसा मुझे लगता है.
३) आयोजन प्रमुख के इतर सक्रीय सदस्यगण में से (हर बार भिन्न) कोई आयोजन अध्यक्ष बनाया जाए और उस की अध्यक्षता में सर्वश्रेष्ठ रचना चुनी जाए  और प्रथम तीन श्रेष्ठ रचनाकारों को डिजिटल सर्टिफिकेट दिया जाए.
४) नियमावली में यह स्पष्ट किया जाए कि रचनाकार पहले आई ग़ज़लों पर टिप्पणी करें फिर ही अपनी रचना पोस्ट करें. साथियों को भी कॉपी पेस्ट टिप्पणियों से बचना चाहिए.
५) कई वरिष्ठ और कनिष्ठ सदस्य जो आजकल निष्क्रीय हैं, उन्हें ससम्मान मुनहार कर के वापस लाया जाए.
६) आयोजन का प्रचार अन्य सोशल मीडिया माध्यमों पर भी हो.
७) एक विडियो पोस्ट सेगमेंट भी बनाया जाए जिस में रचनाकार अपने रचनापाठ का विडियो शेयर कर सकें.
८) पटल की रीच बचाने हेतु इसी नाम से एक यू tube चैनल भी बनाया जाए जहाँ पर (दूसरों की )  सर्वश्रेष्ठ रचनाओं को भिन्न भिन्न सहभागी पढ़ कर पेश करें 
और जैसे भी कुछ सूझेगा ..अवश्य साझा करूँगा 

सादर 
नूर 

इन सुझावों पर भी विचार करना चाहिये। 

नीलेश भाई के विचार व्यावहारिक हैं और मैं भी इनसे सहमत हूँ। 

डिजिटल सर्टिफिकेट अब लगभग सभी मंचों पर चल रहें हैं पर प्राप्त करने वाला उन्हें अपने सोशल मीडिया पर प्रचारित तो करता ही है। और इससे निःसंदेह मंच को प्रचार लाभ प्राप्त होता है। 

टिप्पणी वाली बात मेरी राय भिन्न है। मैं अब भी यही विचार कहता हूँ कि टिप्पणी का रॉल-डाउन केवल क्लिक करने पर खुलना चाहिए। अभी जटिलता है कि एक क्षण पहले जो रचना पहले पेज पर हो, वही कुछ समय बाद कहीं और पहुँच जाती है। 

सदस्यों को मंच पर बनाए रखना और दूर हुए सदस्यों को लाने का सुझाव सराहनीय और उदारता पूर्ण है। बहुत साधूवाद नीलेश भाई। 

सादर 

आपकी बात से सहमत हूँ। यह बात मंच के आरंभिक दौर में भी मैंने रखी थी। उससे सहजता रहती। लेकिन उसमें समस्या यह रही कि यह पोर्टल जिस कंटेट मैनेजमेंट सर्वर पर बना है उसमें ऐसा प्रावधान नहीं है।

सादर नमस्कार, अब तक आए सभी विचार पढ़े हैं। अधिक विचार आयोजन अवधि बढ़ाने पर सहमति के हैं किन्तु इतने मात्र से उपस्थिति बढ़ा पाना संभव होगा, कह पाना मुश्किल है। फिर भी यह प्रयोग किया जा सकता है। मेरा अनुभव है कि आयोजन की पोस्ट अनियमित होने से सदस्य निरुत्साहित हुए हैं। पूर्वानुसार आयोजनों की पोस्ट 5 तारीख तक आना सुनिश्चित किया जाए यह मेरा सुझाव है। दूसरा कारण मंच संचालक की पोस्ट उपस्थिति की क्षीणता रहा है। मैं क्षमा सहित कहता हूँ, इस चर्चा में अब तक भी obo के मुखियाजी के विचार न आनाइस चर्चा के स्तर को कहीं न कहीं कम कर रहा है। आयोजनों के प्रति नये सदस्यों के रुझान की न्यूनता निराश करती है। इनको कैसे आयोजन तक लाया जाए इस पर विचार करने की आवश्यकता है। भाई निलेशजी के कुछ सुझावों से सहमति है जैसे प्रमाण-पत्र देना, आयोजन में सम्मिलित होकर भी अन्य सदस्यों की रचनाओं पर प्रतिक्रिया न देने वाले सदस्य को हतोत्साहित करना। एक साथ सभी आयोजनों को चलाने का विचार भी प्रायोगिक तौर पर स्वागत योग्य है। सादर

साथियों, आप सभी के बहुमूल्य विचारों का स्वागत है, इस बार के लिए निर्णय लिया गया है कि सभी आयोजन एक साथ लगा दिया जाय और एक सप्ताह हेतु ओपन कर दिया जाय, यदि यह प्रयोग सफल रहता है तो आगे इसे कंटिन्यू किया जा सकेगा अन्यथा अन्य विकल्पों पर विचार किया जाएगा ।

अतः सभी आयोजन एक साथ 25 मार्च से 31 मार्च तक अर्थात एक सप्ताह आप के पोस्ट्स एवं टिप्पणियों के लिए खुले रहेंगे ।

सुलभ प्रसंग हेतु आयोजनों का लिंक निम्नानुसार है...

"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-184

*

'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177

*

"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189

*

"ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)

सभी की नमस्कार,

यूँ तो आज आयोजन प्रारंभ ही हुए हैं और किसी प्रकार की टिप्पणी करना उचित नहीं है, किन्तु मंच और कार्यकारिणी को अपने अनुभव से अवगत करवाना भी मैं अपना कर्त्तव्य समझता हूँ। 

ईमानदारी से कहूँ तो मैं चारों आयोजन एक साथ खुले होने के बावजूद किसी एक आयोजन पर ध्यान नहीं लगा पा रहा हूँ। साथ ही उलझन इस बात की है कि कौन से आयोजन में नई रचनाएं आईं होंगी। हर बार टिप्पणी करने के लिए चारों आयोजनों को खोलना भी जटिल लगता है। 

फिर भी, आयोजन पूरे होते होते स्थिति पूरी स्पष्ट हो जाएगी। इस बार यूँ भी समय कम था तो वो भी एक कारण हो सकता है। फिलहाल हम सब आयोजनों की सफलता के लिए आशान्वित ही रहना चाहेंगे। अन्य सदस्यों के अनुभव मुझ से भिन्न हों, इस बात से भी कोई इनकार नहीं है। 

सादर 

एक सप्ताह के लिए सभी चार आयोजन के द्वार खुल गए। अच्छी बात ये है कि यह एक प्रयोग है ..... लेकिन किसी को नहीं मालूम यह कितने मास के लिए है। प्रयोग सफल हो गया  तो शायद इसे ही जारी रखेंगे ।

पुनः एक अनुरोध है ........  अप्रैल मास से प्रयोग 9 दिन का कर दीजिए। 

तृतीय शनिवार से चतुर्थ रविवार तक  [  दो शनिवार और दो रविवार तो मिलना ही चाहिए ]

 दिल रुलाना नहीं कि तुझसे कहें

 हम ज़माना नहीं कि तुझसे कहें 

 फ़क़त अहसास है वो गुनाह का है

 दुख फ़साना नहीं कि तुझसे कहें (गिरह)

 मर चुके जिन्दा ही कहीं हम तो

 प्यार जाना नहीं कि तुझ से कहें 

 तू जो भाया हमें बहुत बात समझ 

 हक़ जताना नहीं कि तुझ से  कहें

 ढूढ़ते प्यार उम्र हो गई है सुन!

 हार जाना नहीं कि तुझ से कहें 

 रू ब रू ज़िन्दगी कभी मिल सकें

 वस्ल होना नहीं कि तुझ से कहें 

 बेसबब जीस्त हो गई 'चेतन'

 तूने माना नहीं कि तुझ से कहें 

मौलिक व अप्रकाशित 

 

 

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