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मिथिलेश वामनकर's Discussions (7,388)

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प्रधान संपादक

"बेहतर लगे तो मान ले तू मेरा मशविरा हामी की तेरी वरना तलबगार हम नहीं  क्या तेवर है…"

मिथिलेश वामनकर replied Apr 25, 2015 to "ओबीओ लाइव तरही मुशायरा" अंक २३ में सम्मिलित सभी ग़ज़लें (चिन्हित बेबहर मिसरों के साथ)

108 Apr 25, 2015
Reply by मिथिलेश वामनकर

"कहिये तो आसमाँ को ज़मीं पर उतार लाएँ  मुश्किल नहीं है कुछ भी अगर ठान लीजिये  -शहरयार…"

मिथिलेश वामनकर replied Apr 25, 2015 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक - २२ सभी ग़ज़लें एक साथ

26 Apr 25, 2015
Reply by मिथिलेश वामनकर

सदस्य टीम प्रबंधन

"अब सिरे से आओ फिर कोशिश करे एक बार हम कामयाबी पर नज़र टिकती नहीं तो क्या हुआ वाह वा…"

मिथिलेश वामनकर replied Apr 25, 2015 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक - २०(सभी प्रविष्टियाँ एक साथ)

21 Apr 25, 2015
Reply by मिथिलेश वामनकर

सदस्य टीम प्रबंधन

"मुझ तक कब उनकी बज़्म में आता था दौर-ए-जाम साक़ी ने कुछ मिला न दिया हो शराब में  ग़ा…"

मिथिलेश वामनकर replied Apr 25, 2015 to ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा- अंक १९-सभी प्रविष्टियाँ एक साथ

7 Apr 25, 2015
Reply by मिथिलेश वामनकर

सदस्य टीम प्रबंधन

"वाह नए अंदाज़ में संकलन  तभी दुनिया है ठेंगे पे ......वाला शेर जबरदस्त ............."

मिथिलेश वामनकर replied Apr 25, 2015 to ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा १८-सभी प्रविष्टियाँ एक साथ

17 Apr 25, 2015
Reply by Saurabh Pandey

सदस्य टीम प्रबंधन

"इबादत काम की करते औ ‘ होता खेत ही मंदिर कुदाली , हल को अपनी देह का जेवर बना लेते. अ…"

मिथिलेश वामनकर replied Apr 25, 2015 to ओबीओ तरही मुशायरा अंक - १७ की सभी प्रविष्टियाँ (ग़ज़लें) संग्रहीत

6 Apr 25, 2015
Reply by मिथिलेश वामनकर

प्रधान संपादक

"ये खिली धूप तजुर्बे की हुनरमंदी है, छोड़ ए सी की हवा धूप में जा कर देखो. वाह वाह "

मिथिलेश वामनकर replied Apr 25, 2015 to "ओबीओ लाईव तरही मुशायरा" अंक १६ में सम्मिलित सभी रचनाएँ

17 Apr 25, 2015
Reply by मिथिलेश वामनकर

मुख्य प्रबंधक

"गर तना कमज़ोर हो तो, बढ़ नहीं पाता दरख़्त|फ़लसफ़ा तालीम का, दमदार होना चाहिये वाह "

मिथिलेश वामनकर replied Apr 25, 2015 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक १५ की सभी प्रस्तुतियां एक जगह...

31 Apr 25, 2015
Reply by मिथिलेश वामनकर

प्रधान संपादक

"ओबीओ पर इन आयोजनों का उद्देश्य केवल वाह-वाही कर किनारा कर लेना नहीं है, बल्कि एक वर्…"

मिथिलेश वामनकर replied Apr 25, 2015 to "ओबीओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-१५ का लेखा जोखा

8 Apr 25, 2015
Reply by मिथिलेश वामनकर

प्रधान संपादक

"जब वक्त आ गया तो इरादे बदल गए, बातें तो हमसे करते थे दुनिया - जहान की  उड़ने लगे तो…"

मिथिलेश वामनकर replied Apr 25, 2015 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-१४ में शामिल सभी ग़ज़लें

94 Apr 25, 2015
Reply by मिथिलेश वामनकर

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"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। प्रदत्त विषय पर सुंदर दोहे हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
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"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। प्रदत्त विषय पर सुंदर गजल हुई है। हार्दिक बधाई।"
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"दोहा एकादश. . . . . दिल दिल से दिल की कीजिये, दिल वाली वो बात । बीत न जाए व्यर्थ के, संवादों में…"
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