For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

जवन चलीं हम नीक बा, तहरे बाउर चाल !                             [बाउर - ग़लत
राजनीति के खेल में, कूल्हि पैंतरा गाल !!                               [गाल - बेईमानी

बात-बात में फर्क बा, बतिया लीहऽ मान !
एक बढ़ावसु संत जी, दोसर के शैतान ॥

अइले रैली देखि के, अइसन चढ़ल बतास !                              [बतास - हवा
उड़त रहल मन रात भर, आङन भइल अकास ॥                       [अकास - आकाश

जेहि अघाइल लोग बा, उनके हऽ उतजोग ।                             [अघाइल - संतृप्त, अतिसंतुष्ट
लोकतंत्र के नाँव पर, शासन-सत्ता भोग ॥

कवन भरोसा का करीं, काहें मति के फेर ?
चलीं उठाईं आसनी, गइल चुनावी टेर !!                                 [आसनी - बैठकी का आसन या पीढ़ा

कवन समै आइल कहऽ, भइल सोच में भेद ।                          [समै - समय
सभके सजल परात में, लउक रहल बा छेद ॥                          [परात - विशेष रूप से बड़ी थाली
***************
(मौलिक आ अप्रकाशित)

Views: 1094

Replies to This Discussion

बहुत अच्छी दोहावली है बहुत बहुत बधाई

सादर

भोजपुरी दोहों को पसंद करने के लिए हार्दिक धन्यवाद आदरणीय श्याम नारायण जी. 

सुंदर अति सुंदर।सही कटाक्ष करते हुए दोहे।हार्दिक बधाई पूज्य सौरभ पांडे जी।

रचना को अनुमोदित करने केलिए हार्दिक धन्यवाद आदरणीय सतविन्दरजी. 

  दोहा के कारण से मन इतना प्रसन्न हो गइल कि चुनाव के हरासी त खत्म हो गइल । दोहा के खातिर अनेक गो बधाई स्वीकार करी।

आदरणीय इन्द्रविद्यावाचस्पति तिवारीजी,  रउआ हई दोहा छन्द रुचकर लगलन सऽ, हम नत-मस्तक बानीं. नेह-छोह बनल रहो,

दिल से शुक्रिया कहि रहल बानीं. 

आदरणीय पाण्डेय जी, चुनाव को लेकर ये व्यंग्यात्मक दोहे मर्म पर उँगली रख रख रहे हैं --"सभके सजल परात में, लउक रहल बा छेद ॥" ...हार्दिक साधुवाद एवं सद्भावनाएँ ! 

RSS

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक - - - - शोखी

दोहा पंचक. . . . . शोखीशोख उमर की शोखियाँ, चंचल दृग संकेत ।भीगा यौवन मद भरा, दिल को करे अचेत…See More
12 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय अशोक भाईजी, वर्षा ऋतु, विशेषकर सावन मास, के नम क्षणों का रागात्मक वर्णन रोचक बन पड़ा है.…"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आ. भाई अशोक जी, सादर अभिवादन। पावस पर सुंदर चौपाइयों की रचना हुई है। हार्दिक बधाई।"
Saturday
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

चौपाइयाँ

दोहाबरखा के बढ़ते क़दम, आये  हैं  अब पास।दूर नहीं है साजना, सुरभित सावन मास।। चौपाईवह फुहार वह साथ…See More
Jul 14
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"  आदरणीय चेतन प्रकाश साहब सादर नमस्कार, यही तो मुख्य है विषय है इस रचना का. नदी नहीं उफ़नाई है.…"
Jul 14
Chetan Prakash commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय,  अशोक  रक्ताले साहब, नमस्कार  !  लेकिन  यह कैसी "रिमझिम…"
Jul 14
Profile IconShyamsundar Chatterjee , Alamseti ajita kumar and Dr. Mohd Israr joined Open Books Online
Jul 14
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत रचना की सारगर्भित समीक्षा कर आपने मेरे सृजन कार्य को सार्थकता…"
Jul 11
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"परम आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम - सर सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार…"
Jul 10

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"वायव्य दशा के प्रस्तुतीकरण के क्रम में बना विश्वास प्रस्तुति की शाब्दिकता को स्थापित करता हुआ सफल…"
Jul 10

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"संसार का मंच एक गंभीर विषय है. तदनुरूप आपका प्रयास श्लाघनीय है, आदरणीय सुशील सरना जी.  कई…"
Jul 10

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय अशोक भाईजी, कितनी निष्कपट, कितनी भोली, कितनी सरस कविता हुई है ! जैसे, कोई अबोध बच्चा…"
Jul 10

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service