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भोजपुरी साहित्य Discussions (249)

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आवअ लवट चलीं गाँव के ओर

गोईठा-लकड़ी के चूल्हा में भाप उठत ऊ भात बोलावे, संक्रांति के दही-चुड़ा-तिलवा  कऊड़ा में के आग बोलावे, बहुत हो गईल शहर में रहल आवअ लवट चलीं…

Started by R. K. PANDEY "RAJ"

11 Jan 16, 2012
Reply by Neelam Upadhyaya

सुनलिस नू ललमतिया ?

अन्यायी के अब तू खोर खईहे  अब ना केकरो से तू डेरईहे, आपन हक़ खातिर डेग बढ़ईहे  ना मिले त छीन भी लीहे, मत लजईहे, मत सकुचईहे सुनलिस नू ललमति…

Started by R. K. PANDEY "RAJ"

0 Jan 14, 2012

सुनलिस नू ललमतिया ?

अन्यायी के अब तू खोर खईहे  अब ना केकरो से तू डेरईहे, आपन हक़ खातिर डेग बढ़ईहे  ना मिले त छीनभी लीहे, मत लजईहे, मत सकुचईहे सुनलिस नू ललमतिय…

Started by R. K. PANDEY "RAJ"

0 Jan 14, 2012

याद केहू क अब आ रहल बा

आज  दिल पर नशा छ रहल बा, याद केहू क अब आ रहल बा| किश्मत में रहे मुलाकात हो गईल देखsते देखsते इक दिन बात हो गईल| बात के गीत दिल गा रहल बा; य…

Started by आशीष यादव

0 Nov 17, 2011

ज्ञान के देवी हई माई सुरसती ,

माई सुरसती  हो माई सुरसती , ज्ञान के देवी हई माई सुरसती , कमवा बिगरी जबे मार लिहे मति , ज्ञान के देवी हई माई सुरसती ,  इहे जबे मंथरा जिभि…

Started by Rash Bihari Ravi

0 Sep 15, 2011

अइसन कब होई , "भोजपुरी धारावाहिक कहानी" "पांचवा कड़ी"

पांचवा कड़ी . पंडित जी देवव्रतबाबू के साथ मंदिर में पूजा कईला के बाद कहले जजमान अब कवनो प्रकार के बाधा न रह गईल, अब राउआ आराम से चली लोग छे…

Started by Rash Bihari Ravi

0 Sep 14, 2011

अइसन बुझात बा

जनलो -चिन्ह्लको लोग आज कतरात बा I दिन आपन लद गइल अइसन बुझात बा I   दिन -रात पाछे -पाछे काल्ह तक जे लागल रहे I उहो आज हमरा के देखिके परात बा…

Started by satish mapatpuri

8 Sep 9, 2011
Reply by satish mapatpuri

अइसन कब होई , "भोजपुरी धारावाहिक कहानी" "चउथका कड़ी"

 "तिसरका कड़ी" इहवाँ क्लिक करीं चउथकी कड़ी  . देवव्रतबाबू के दुआर पर अब्दुलमियाँ आउर उनकरा संगे चार पाँच आदमी बइठल रहन. पंडितजी पतरा निकाल…

Started by Rash Bihari Ravi

4 Sep 8, 2011
Reply by Rash Bihari Ravi

मुख्य प्रबंधक

भोजपुरी लघु कथा :- धोबी के बकरा

रज्जू रजक के जवान खस्सी (बकरा) गाँव के मनबढ़ूवन के आँख के किरकिरी बन गइल रहे, जब खस्सी पर नजर जाए तब जीभ लपलपा जात रहे, सांझ के संतोष पांडे…

Started by Er. Ganesh Jee "Bagi"

7 Sep 8, 2011
Reply by Brij bhushan choubey

अब त बाबू इंजीयर बा (हमार पहिला भोजपुरी कहानी) भाग-१

               परसिद्धन के दुआरे लोगन क भीड़ जुटल रहे| खटिया मचिया चौकी कुर्सी कुल पर लोग बईठल रहलं| अंगना में मेहरारू आ लईकी गजाइल रहलीं| प…

Started by आशीष यादव

6 Sep 8, 2011
Reply by Brij bhushan choubey

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"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189

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मशीनी मनुष्य

आज के समय में मनुष्य मशीन बनता जा रहा है या उसको मशीन बनने पर मजबूर किया जाता है. कारपोरेट जगत…See More
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Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव साहब, प्रस्तुत दोहों की सराहना हेतु आपका हार्दिक आभार। सादर"
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Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय जयहिंद रायपुरी जी सादर, प्रदत्त चित्र पर आपने  दोहा छंद रचने का सुन्दर प्रयास किया है।…"
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अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अशोक भाईजी  सही कहना है हम भारतीय और विशेषकर जो अभावों में पलकर बड़े हुए हैं, हर…"
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अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीया प्रतिभाजी हार्दिक धन्यवाद आभार आपका"
Sunday
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अशोक भाईजी  हार्दिक धन्यवाद आभार आपका।"
Sunday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी जी सादर, प्रदत्त चित्र पर मेरी प्रस्तुति की सराहना के लिए आपका हार्दिक…"
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Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"    आदरणीया प्रतिभा पाण्डे जी सादर, प्रस्तुत दोहों की सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार ।…"
Sunday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"किल्लत सारे देश में, नहीं गैस की यार नालियाँ बजबजा रही, हर घर औ हर द्वार गैस नहीं तो क्या हुआ, लोग…"
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आ. भाई सौरभ जी, सादर अभिवादन। दोहों पर आपकी विस्तृत टिप्पणी और सुझाव के लिए हार्दिक…"
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आ. प्रतिभा बहन, सादर अभिवादन। चित्रानुरूप सुंदर दोहे हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
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