For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

भोजपुरी साहित्य Discussions (249)

← Back to भोजपुरी साहित्य
Discussions Replies Latest Activity

देखि केतना परेशान हम बानी

एगो लड़की के बाप हम बानी , देखि केतना परेशान हम बानी     सगरी धन पढ़ाई में ओराइल , बेटी पढ़ल बड़ा खुश हम बानी     बचपन से पढ़वनी मर मर के ,…

Started by Rash Bihari Ravi

3 Aug 2, 2011
Reply by आशीष यादव

इ का हो रहल बा ,

इ का हो रहल बा , समझ में नइखे आवत , का मनमोहन बाबु के, बुद्धि कही चरे चल गइल बा,कि उनकर बछरुआ , सब के सब बे हाथ हो गइल बा, एगो राजा साहेब ब…

Started by Rash Bihari Ravi

4 Jul 26, 2011
Reply by shrikantpandey

सावन महिना मन भावन लागेला सुहावन हो ,

सावन महिना मन भावन लागेला सुहावन हो , आवs बलम चली आवs उठईब हम कावर हो , सुनी ले कि सुनेले मनवा के बतिया पूरा करेले , प्रभु हमारो बिपतिया ना…

Started by Rash Bihari Ravi

0 Jul 21, 2011

हो गइनी मजबूर हजूर जब मालिक किनले गाड़ी ,

हो गइनी मजबूर हजूर जब मालिक किनले गाड़ी , बन गइनी बंजारा छुट गइल हमार घर बाड़ी , आज इहा कल उहा रहिले जब ले चक्का घुमेला , हो जाला ख़राब गा…

Started by Rash Bihari Ravi

4 Jul 6, 2011
Reply by आशीष यादव

बतकही ( गपसप ) अंक ७

बतकही ( गपसप ) अंक ७ हम एक हप्ता खातिर नासिक का गइनी कि लछुमन भाई के चाय दोकान पर के बईठका एक दमे ख़तम, आदत के मोताबिक हम सुबेरे पहुच गइनी,…

Started by Rash Bihari Ravi

5 Jun 23, 2011
Reply by Shakur Khan

बतकही ( गपसप ) अंक 6

बतकही ( गपसप ) अंक 6 लछुमन भाई के चाय दुकान पर गहमा गहमी रहुऐ बाकिर लछुमन भाई के चेहरा उतरल रहुऐ, हमरा के देख के उ ब़ोलुअन प्रणाम गुरु जी ब…

Started by Rash Bihari Ravi

1 Jun 13, 2011
Reply by Saurabh Pandey

भक्त अपने भगवान से.

भक्त अपने भगवान से. खेल खेलिला राउर नज़ारा रहल, हम नाचीं ला राउर इशारा रहल. चाहे प्यारा रहल या किनारा रहल, जे बा आईल राउरे सहारा रहल. चाहे…

Started by R N Tiwari

0 Jun 10, 2011

बतकही ( गपसप ) अंक 5

 बतकही ( गपसप ) अंक 5 लछुमन भाई के चाय दुकान बंद रहे उनकर दुकान के सामने रोज के अपेक्षा लोग कम रहे, आदत के अनुसार हम उहा पहुच गईनी हमरा…

Started by Rash Bihari Ravi

6 Jun 8, 2011
Reply by Neelam Upadhyaya

फूट फूट के रोवत बाड़ी महतारी भारती,

फूट फूट के रोवत बाड़ी महतारी भारती, कईसन कुलछना के माई हम कहइनी, बे शरमा इ मूंग दरत बा माई के हो छाती, हमरा त इ लागत बाटे होगइल कुल घाती…

Started by Rash Bihari Ravi

1 Jun 6, 2011
Reply by Er. Ganesh Jee "Bagi"

दुधवा के जगे जहा, मरवा पिआवे ली,

दुधवा के जगहां जहा, मड़वा पियावे ली, वोकरा के गरीब कही, मति दुत्करीह |   अपने ना खाली कुछु, बचवा ला धरी देली, माई के मनवा के , जनि तू टटोलिह…

Started by Rash Bihari Ravi

0 Jun 6, 2011

RSS

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक - - - - शोखी

दोहा पंचक. . . . . शोखीशोख उमर की शोखियाँ, चंचल दृग संकेत ।भीगा यौवन मद भरा, दिल को करे अचेत…See More
18 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय अशोक भाईजी, वर्षा ऋतु, विशेषकर सावन मास, के नम क्षणों का रागात्मक वर्णन रोचक बन पड़ा है.…"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आ. भाई अशोक जी, सादर अभिवादन। पावस पर सुंदर चौपाइयों की रचना हुई है। हार्दिक बधाई।"
Saturday
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

चौपाइयाँ

दोहाबरखा के बढ़ते क़दम, आये  हैं  अब पास।दूर नहीं है साजना, सुरभित सावन मास।। चौपाईवह फुहार वह साथ…See More
Jul 14
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"  आदरणीय चेतन प्रकाश साहब सादर नमस्कार, यही तो मुख्य है विषय है इस रचना का. नदी नहीं उफ़नाई है.…"
Jul 14
Chetan Prakash commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय,  अशोक  रक्ताले साहब, नमस्कार  !  लेकिन  यह कैसी "रिमझिम…"
Jul 14
Profile IconShyamsundar Chatterjee , Alamseti ajita kumar and Dr. Mohd Israr joined Open Books Online
Jul 14
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत रचना की सारगर्भित समीक्षा कर आपने मेरे सृजन कार्य को सार्थकता…"
Jul 11
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"परम आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम - सर सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार…"
Jul 10

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"वायव्य दशा के प्रस्तुतीकरण के क्रम में बना विश्वास प्रस्तुति की शाब्दिकता को स्थापित करता हुआ सफल…"
Jul 10

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"संसार का मंच एक गंभीर विषय है. तदनुरूप आपका प्रयास श्लाघनीय है, आदरणीय सुशील सरना जी.  कई…"
Jul 10

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय अशोक भाईजी, कितनी निष्कपट, कितनी भोली, कितनी सरस कविता हुई है ! जैसे, कोई अबोध बच्चा…"
Jul 10

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service