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भोजपुरी साहित्य Discussions (249)

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देखि केतना परेशान हम बानी

एगो लड़की के बाप हम बानी , देखि केतना परेशान हम बानी     सगरी धन पढ़ाई में ओराइल , बेटी पढ़ल बड़ा खुश हम बानी     बचपन से पढ़वनी मर मर के ,…

Started by Rash Bihari Ravi

3 Aug 2, 2011
Reply by आशीष यादव

इ का हो रहल बा ,

इ का हो रहल बा , समझ में नइखे आवत , का मनमोहन बाबु के, बुद्धि कही चरे चल गइल बा,कि उनकर बछरुआ , सब के सब बे हाथ हो गइल बा, एगो राजा साहेब ब…

Started by Rash Bihari Ravi

4 Jul 26, 2011
Reply by shrikantpandey

सावन महिना मन भावन लागेला सुहावन हो ,

सावन महिना मन भावन लागेला सुहावन हो , आवs बलम चली आवs उठईब हम कावर हो , सुनी ले कि सुनेले मनवा के बतिया पूरा करेले , प्रभु हमारो बिपतिया ना…

Started by Rash Bihari Ravi

0 Jul 21, 2011

हो गइनी मजबूर हजूर जब मालिक किनले गाड़ी ,

हो गइनी मजबूर हजूर जब मालिक किनले गाड़ी , बन गइनी बंजारा छुट गइल हमार घर बाड़ी , आज इहा कल उहा रहिले जब ले चक्का घुमेला , हो जाला ख़राब गा…

Started by Rash Bihari Ravi

4 Jul 6, 2011
Reply by आशीष यादव

बतकही ( गपसप ) अंक ७

बतकही ( गपसप ) अंक ७ हम एक हप्ता खातिर नासिक का गइनी कि लछुमन भाई के चाय दोकान पर के बईठका एक दमे ख़तम, आदत के मोताबिक हम सुबेरे पहुच गइनी,…

Started by Rash Bihari Ravi

5 Jun 23, 2011
Reply by Shakur Khan

बतकही ( गपसप ) अंक 6

बतकही ( गपसप ) अंक 6 लछुमन भाई के चाय दुकान पर गहमा गहमी रहुऐ बाकिर लछुमन भाई के चेहरा उतरल रहुऐ, हमरा के देख के उ ब़ोलुअन प्रणाम गुरु जी ब…

Started by Rash Bihari Ravi

1 Jun 13, 2011
Reply by Saurabh Pandey

भक्त अपने भगवान से.

भक्त अपने भगवान से. खेल खेलिला राउर नज़ारा रहल, हम नाचीं ला राउर इशारा रहल. चाहे प्यारा रहल या किनारा रहल, जे बा आईल राउरे सहारा रहल. चाहे…

Started by R N Tiwari

0 Jun 10, 2011

बतकही ( गपसप ) अंक 5

 बतकही ( गपसप ) अंक 5 लछुमन भाई के चाय दुकान बंद रहे उनकर दुकान के सामने रोज के अपेक्षा लोग कम रहे, आदत के अनुसार हम उहा पहुच गईनी हमरा…

Started by Rash Bihari Ravi

6 Jun 8, 2011
Reply by Neelam Upadhyaya

फूट फूट के रोवत बाड़ी महतारी भारती,

फूट फूट के रोवत बाड़ी महतारी भारती, कईसन कुलछना के माई हम कहइनी, बे शरमा इ मूंग दरत बा माई के हो छाती, हमरा त इ लागत बाटे होगइल कुल घाती…

Started by Rash Bihari Ravi

1 Jun 6, 2011
Reply by Er. Ganesh Jee "Bagi"

दुधवा के जगे जहा, मरवा पिआवे ली,

दुधवा के जगहां जहा, मड़वा पियावे ली, वोकरा के गरीब कही, मति दुत्करीह |   अपने ना खाली कुछु, बचवा ला धरी देली, माई के मनवा के , जनि तू टटोलिह…

Started by Rash Bihari Ravi

0 Jun 6, 2011

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"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189

ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरे के 190 वें अंक में आपका हार्दिक स्वागत है | इस बार का मिसरा नौजवान शायर…See More
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आशीष यादव posted a blog post

मशीनी मनुष्य

आज के समय में मनुष्य मशीन बनता जा रहा है या उसको मशीन बनने पर मजबूर किया जाता है. कारपोरेट जगत…See More
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Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव साहब, प्रस्तुत दोहों की सराहना हेतु आपका हार्दिक आभार। सादर"
Sunday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय जयहिंद रायपुरी जी सादर, प्रदत्त चित्र पर आपने  दोहा छंद रचने का सुन्दर प्रयास किया है।…"
Sunday
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अशोक भाईजी  सही कहना है हम भारतीय और विशेषकर जो अभावों में पलकर बड़े हुए हैं, हर…"
Sunday
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीया प्रतिभाजी हार्दिक धन्यवाद आभार आपका"
Sunday
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अशोक भाईजी  हार्दिक धन्यवाद आभार आपका।"
Sunday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी जी सादर, प्रदत्त चित्र पर मेरी प्रस्तुति की सराहना के लिए आपका हार्दिक…"
Sunday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"    आदरणीया प्रतिभा पाण्डे जी सादर, प्रस्तुत दोहों की सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार ।…"
Sunday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"किल्लत सारे देश में, नहीं गैस की यार नालियाँ बजबजा रही, हर घर औ हर द्वार गैस नहीं तो क्या हुआ, लोग…"
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आ. भाई सौरभ जी, सादर अभिवादन। दोहों पर आपकी विस्तृत टिप्पणी और सुझाव के लिए हार्दिक…"
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आ. प्रतिभा बहन, सादर अभिवादन। चित्रानुरूप सुंदर दोहे हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
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