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धार्मिक साहित्य Discussions (167)

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खंडकाव्य : जय गणेश

जय गणेश - सर्ग १ - उपसर्ग १ छंद : दोहा   है ग्यारह आयाम से, निर्मित यह संसार सात मात्र अनुमान हैं, अभी ज्ञात हैं चार।   तीन दिशा आयाम हैं,…

Started by धर्मेन्द्र कुमार सिंह

2 Aug 2, 2011
Reply by धर्मेन्द्र कुमार सिंह

प्रभु की रेल.

प्रभु की रेल. थक जाते हैं लोग जब, कष्ट हजारो झेल, कम बिगड़ते देख कर ,बुद्धि होती फेल. दुश्मन धक्का मारता,हँसे ठठाय ठठाय, हित भी मुखड़ा फेरत…

Started by R N Tiwari

1 May 9, 2011
Reply by कमल वर्मा "गुरु जी"

Abhay Deepraaj krit - Saraswatee vandanaa - 2

अभय कान्त झा दीपराज कृत -              सरस्वती वंदना - २ हे   वीणावादिनी,   हंसवाहिनी,   हमें   ज्ञान  का  वर  दे | देवतुल्य  मानवता  से …

Started by Abhay Kant Jha Deepraaj

0 Apr 26, 2011

Dharmik Sahitya

is manch par aaake kuch dharmik vicharon se parichit hui hoon..aagae aur padhne ki iccha hai..

Started by Devi Nangrani

0 Mar 1, 2011

भोला हैं अघरदानी सारा ये दुनिया माने मन में यही उतार ले ,

भोला हैं अघरदानी सारा ये दुनिया माने मन में यही उतार ले , हर हर महादेव के नाम ले भाई हर हर महादेव के नाम ले , डमरू बजने वाला दुःख घटाने वाल…

Started by Rash Bihari Ravi

0 Feb 24, 2011

"मेरे मन मधुबन में आओ"

मेरे मन  मधुबन में आओ-२- श्याम हम झूला झूलें रे  प्रेम के हिंडोले पर मुझको बिठाकर श्याम प्रीत की पींगे बढ़ावो रे श्याम हम ...............…

Started by vandana gupta

2 Jan 19, 2011
Reply by vandana gupta

Abhay Kant Jha Deepraaj Krit - Hanumaan Ram ko sandeshaa do......................By Abhay Deepraaj

अभय कान्त झा दीपराज कृत-          हनुमान , राम को संदेशा दो......                हनुमान,  राम  को   जाकर  ये  संदेशा  दो-   प्रभु  आ  जायें…

Started by Abhay Kant Jha Deepraaj

1 Jan 18, 2011
Reply by vandana gupta

Abhay Kant Jha Deepraaj Krit - Prarthanaa .................................By Abhay Deepraaj

अभय कान्त झा दीपराज कृत -                      प्रार्थना मैं   विवेक  के  गंगा  जल से,  सारे जग  का  मल  धोऊँ |हे  प्रभु  मुझको  शक्ति  दे,…

Started by Abhay Kant Jha Deepraaj

0 Jan 13, 2011

Abhay Kant Jha Deepraaj Krit - Chakradhar Stuti.....................by Abhay Deepraaj

 अभय कान्त झा दीपराज कृत -                    चक्रधर स्तुतिराम बन कब ? आओगे, प्रभु कृष्ण बन कब ? आओगे |अपने  भक्तों को भला प्रभु ,  कब  तलक…

Started by Abhay Kant Jha Deepraaj

0 Jan 12, 2011

Durgaa Stuti ...................................By Abhay Kant Jha Deepraaj

अभय कान्त झा दीपराज कृत -                       दुर्गा स्तुतिजय  माँ  दुर्गा,  जय  माँ  शक्ति,  जय   माँ   कंचन   काया | आदि - अनादि, अनंत…

Started by Abhay Kant Jha Deepraaj

0 Jan 8, 2011

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"कर्मवीरों के ऊपर आपकी छांदसिक अभिव्यक्ति का स्वागत है, आदरणीय रामबली गुप्त जी.  मनहरण…"
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2122    1212    22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत मेंक्या से क्या हो गए महब्बत में मैं ख़यालों में आ गया उस…See More
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"कुंडलिया छत्तीसगढ़ी छत्तीसगढ़ी ह भाखा, सरल ऐकर बिधान सहजता से बोल सके, लइका अऊ सियान लइका अऊ…"
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"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय "
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तब मनुज देवता हो गया जान लो,- लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२१२/२१२/२१२/२१२**अर्थ जो प्रेम का पढ़ सके आदमीएक उन्नत समय गढ़ सके आदमी।१।*आदमीयत जहाँ खूब महफूज होएक…See More
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . रिश्ते
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। सुंदर दोहै हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
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Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . . रिश्ते

दोहा पंचक. . . . रिश्तेमिलते हैं  ऐसे गले , जैसे हों मजबूर ।निभा रहे संबंध सब , जैसे हो दस्तूर…See More
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post देवता क्यों दोस्त होंगे फिर भला- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई सौरभ जी, सादर अभिवादन व आभार।"
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post सच काफिले में झूठ सा जाता नहीं कभी - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई रवि जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और सुंदर सुझाव के लिए हार्दिक आभार।"
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Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
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