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दिव्या
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Prashant Priyadarshi commented on दिव्या's blog post बेबसी (कहानी)
"आदरणीय दिव्या जी, आपकी कहानी का विषय मार्मिक है, प्रस्तुति भी बढ़िया हुई है आपकी, भाषा में थोड़ी कसावट यदि और होती तो चार चाँद लग जाते. कुछ टाइपिंग की अशुद्धियाँ भी हैं जो मामूली हैं. वैसे मुझे पसंद आई आपकी ये कहानी. "
Aug 1, 2015
aman kumar commented on दिव्या's blog post बेबसी (कहानी)
"दिव्या जी आपने उत्तराखंड आपदा पर कथा लिख कर उनकी आवाज़ को अपनी कलम दे दी है  अच्छी प्रस्तुति है !"
Aug 13, 2013
Sulabh Agnihotri liked दिव्या's blog post बेबसी (कहानी)
Jul 31, 2013
JAWAHAR LAL SINGH commented on दिव्या's blog post बेबसी (कहानी)
"बेहत दर्दनाक और मार्मिक सत्य के करीब दिखती कहानी ... बधाई दिव्या बहन!"
Jul 31, 2013
जितेन्द्र पस्टारिया commented on दिव्या's blog post बेबसी (कहानी)
"आदरनीया दिव्या जी,  बहुत  बढ़िया  व्  मार्मिक  लघु कथा पर  हार्दिक बधाई ,  शेष  आदरणीय  शुभ्रांशु  जी व्  आदरणीय किशन  जी कह ही चुके है ,"
Jul 31, 2013
दिव्या commented on दिव्या's blog post बेबसी (कहानी)
"आदरणीय शुभ्रांशु जी,  मैं उत्तराखंड से हूँ कल ही दैनिक समाचार पत्र में पढ़ा था ये दर्द भरी दास्ताँ जिसमे अपने बच्चो को कुछ गाँव के लोग इस लिए भेज रहे है क्यूँ की मिड डे मिल से उनके बच्चो की एक टाइम की भूख मिट सके ..... खुशकिस्मत वो तब तक ही सोच…"
Jul 31, 2013
दिव्या commented on दिव्या's blog post बेबसी (कहानी)
"आदरणीय किशन कुमार जी,  आप का तहे दिल से शुक्रिया "
Jul 31, 2013
Shubhranshu Pandey commented on दिव्या's blog post बेबसी (कहानी)
"आ. दिव्या जी, कहानी की शुरुआत जिस श्याम से शुरु होती है वो तो आधे रास्ते में ही दम तोड़ देता है फ़िर वो किस तरह् से खुशकिस्मत है ये स्पष्ट नहीं हो पा रहा है...कई बातों को समेटने की कोशिश की गयी लेकिन एक हड़बडा़हट सी थी कहानी को समाप्त करने में. दुःख…"
Jul 31, 2013
दिव्या posted a blog post

बेबसी (कहानी)

            श्याम खुद को बहुत खुशकिस्मत मान रहा था | बात थी भी ऐसी, वो भयानक रात और दो दिन तक मची तबाही का मंजर एक पल के लिए भी तो उसकी आँखों से नहीं हटा था | जहाँ-तहां लाशे बिछी हुई थी और हर तरफ चीख पुकार | श्याम अपनी पत्नी सुनीता चार बच्चो का पेट पालने के लिए एक खच्चर के सहारे खच्चर में माल ढोने का काम करता है और हर साल यात्रा सीजन में केदारनाथ परिवार सहित केदार बाबा की शरण में पहुँच जाता था | जहाँ पत्नी फूल प्रसाद बेचा करती है, और बच्चे होटल में बर्तन धोने का का काम और वो खुद खच्चर से…See More
Jul 31, 2013
Atendra Kumar Singh "Ravi" commented on दिव्या's blog post इश्क से अनजान
"क्या बात है दिव्या जी आपने तो अपनी कविता में प्रेम के वो सारे अनछुए एहसासों को पन्ने पर उकेर डाला है और कहती है हमें पता नहीं की ये प्रेम क्या होता है और इसके एहसास क्या होते हैं .....बहुत दिनों के बाद ऐसी रचना पढने को मिली .....आपको दिल से बधाई"
Jul 12, 2013
दिव्या is now friends with Tushar Raj Rastogi, umeshraghav, KISHAN KUMAR and 2 more
Jun 18, 2013
दिव्या commented on Roshni Dhir's blog post अब नहीं आयेगी बेटी
"रौशनी जी हमेसा कि तरह एक महत्वपूर्ण विषय को केन्द्र में रख कर लिखी गयी कविता या फिर ये कहे कि एक कविता के माध्यम से आज समाज में बेटियों के प्रति व्याप्त स्थिति पर कवि ह्रदय से निकली रोष के शब्द. बहुत ही सही चित्रण किया है आपने पर समाज में बेटियों का…"
Jun 7, 2013
राजेश 'मृदु' commented on दिव्या's blog post मेरा ख्याल
"आपका लेखन काफी अच्‍छा है, लिखते रहें और खूब लिखें पर अपनी शैली को मत छोड़ें, ढेरों शुभकामनाएं"
Jun 7, 2013
दिव्या commented on वीनस केसरी's blog post ऐ दोस्त ! खुशतरीन वो मंज़र कहाँ गए
"वाह बहुत ही उम्दा गजल .... बातें तो हमसे करते थे दुनिया जहान की जब वक्त आ गया तो वो तेवर कहाँ गये दुनिया को जीत कर भी अलग क्या मिला उन्हें सबको पता है मर के सिकंदर कहाँ गये............... बहुत खूब "
Jun 7, 2013
दिव्या commented on Abid ali mansoori's blog post ग़ज़ल// कोई मौसम नहीँ होता!
"अजनबी सी राहोँ मेँ हमसफर मिल जाते हैँ,किसी को अपना बनाने का,कोई मौसम नहीँ होता! वाह बहुत खूब "
Jun 7, 2013
दिव्या commented on Anjini Rajpoot's blog post मेरे अपने कब थे तुम
"सब्जबाग था प्यार तुम्हारा  सारे वादे दगा हुए........ बहुत खूब अंजनी जी "
Jun 7, 2013

Profile Information

Gender
Female
City State
देहरादून
Native Place
dehradun

दिव्या's Blog

बेबसी (कहानी)

            श्याम खुद को बहुत खुशकिस्मत मान रहा था | बात थी भी ऐसी, वो भयानक रात और दो दिन तक मची तबाही का मंजर एक पल के लिए भी तो उसकी आँखों से नहीं हटा था | जहाँ-तहां लाशे बिछी हुई थी और हर तरफ चीख पुकार |

श्याम अपनी पत्नी सुनीता चार बच्चो का पेट पालने के लिए एक खच्चर के सहारे खच्चर में माल ढोने का काम करता है और हर साल यात्रा सीजन में केदारनाथ परिवार सहित केदार बाबा की शरण में पहुँच जाता था | जहाँ पत्नी फूल प्रसाद बेचा करती है, और बच्चे होटल में बर्तन धोने का का काम और वो खुद खच्चर…

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Posted on July 31, 2013 at 4:29pm — 7 Comments

मेरा ख्याल

बारिशो के 

मौसम में 
मन जब 
चाहे किसी के 
साथ दूर तक …
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Posted on June 5, 2013 at 5:00pm — 24 Comments

माँ तुम मेरी सहेली हो

माँ तुम अबूझ पहेली हो 
माँ तुम मेरी सहेली हो 

स्नेह की  डोर से बंधी …

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Posted on May 9, 2013 at 3:30pm — 12 Comments

इश्क कि दास्तान है प्यारे

इन दिनों वो अपने आस पास रेशम बुनने लगी थी | बहुत ही महीन मगर चमकीली, हर समय बस एक ही धुन सवार हो गयी थी उस को  रेशम बुनने कि | जहाँ भी वो रहती  बस रेशम के धागों में उलझी हुई रहती |

कई कई बार वो घायल हो जाती, मगर वो रेशम बुनने में ही तल्लीन रहती उसके घायल मन से बना रेशम बहुत ही खूबसूरत होता…

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Posted on February 9, 2013 at 7:30pm — 16 Comments

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At 8:43pm on June 6, 2013, Sachchidanand Pandey said…

DIVYA JI 

KYA AP APNI RACHNAON KA SANKLAN KAR RAKHI HAI?

 
 
 

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