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SHARIF AHMED QADRI "HASRAT"
  • Male
  • SHEOPUR(M.P)
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SHARIF AHMED QADRI "HASRAT" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"हर तरफ़ संग हैं दीवारें हैं तन्हाई हैये कहाँ आ गया मैं मुझको तो घर जाना था बहुत खूब अंजली जी हर शेर लाजवाब बधाई स्वीकार करें "
Feb 22
SHARIF AHMED QADRI "HASRAT" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"उम्दा ग़ज़ल दिगंबर जी मुबारक हो "
Feb 22
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"वाह वाह तस्दीक़ साहेब क्या कहने हर शेर उम्दा हे मुबारक हो "
Feb 22
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"देख कर फौज बड़ी पीठ दिखाई क्यों थीइससे अच्छा तो तुझे रण में ही मर जाना था बहुत खूब क्या कहने सुरेन्द्र जी बधाई "
Feb 22
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"वाह वाह बशर साहब उम्दा ग़ज़ल मुबारक हो "
Feb 22
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"उम्दा ग़ज़ल मुबारक हो बासुदेव जी "
Feb 22
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"बहुत बहुत धन्यवाद् सुरेन्द्र जी "
Feb 22
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"बहुत बहुत धन्यवाद अंजली जी ..........जी हाँ टंकण त्रुटी है "
Feb 22
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"शुक्रिया मोहतरम "
Feb 22
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"ज़र्रा नवाज़ी और रहनुमाई के लिए बहुत बहुत शुक्रिया सर आपने बहुत खूब  इस्लाह की हे बहुत बहुत शुक्रिया सर "
Feb 22
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"मोहतरम जावेद साहब उम्दा ग़ज़ल के लिए मुबारकबाद पेश करता हूँ"
Feb 22
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"बहुत बहुत शुक्रिया दिगम्बर जी"
Feb 22
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"बहुत बहुत शुक्रिया"
Feb 22
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"शुक्रिया मोहतरम"
Feb 22
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"बहुत खूब मिथलेश जी उम्दा ग़ज़ल"
Feb 22
SHARIF AHMED QADRI "HASRAT" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"इश्क़ में यार मुझे काम ये कर जाना थाक्यों रहा हद में मुझे हद से गुज़र जाना था शुक्रिया दोस्त मुझे राह दिखा दी तूनेमुझको ये भी न था मालूम किधर जाना था हमसफ़र बन के तेरा साथ निभाते कैसेहम मुसाफिर थे हमे लोट के घर जाना था जान भी तुझपे लुटा दूंगा कहा…"
Feb 22

Profile Information

Gender
Male
City State
sheopur (m.p.)
Native Place
sheopur
Profession
mobile ripearing
About me
mujhe urdu adab se mohabbat hai

SHARIF AHMED QADRI "HASRAT"'s Blog

ग़ज़ल

इश्क़ करता है कोन दुनिया में

दिल से मरता है कोन दुनिया में

मुफ़्त शेखी बगारने वाले

तुझसे डरता है कोन दुनिया में

महवे हैरत है आसमां मुझ पर

आहें भरता है कोन दुनिया में

आईना बन गए हैं हम लेकिन

अब संवरता है कौन दुनिया में

सबको करना है कूच दुनिया से

कब ठहरता है कौन दुनिया में

अब न मुंसिफ़ कोई उमर जैसा

अद्ल करता है कौन दुनिया में

दिल की गहराई से तुझे हसरत

याद करता है कौन…

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Posted on January 20, 2016 at 5:00pm — 5 Comments

हो के मजबूर उसूलों से बग़ावत की है

जाने क्या सोच के उसने ये हिमाक़त की है

हो के दरिया जो समंदर से अदावत की है

खींच लायी हे तेरे दर पे ज़रुरत मुझको

हो के मजबूर उसूलों से बग़ावत की है

हमने ख़ारों पे बिछाया हे बिछोना अपना

हमने तलवारों के साये में इबादत  की है

अच्छे हमसाये की तालीम मिली हे हमको

हमने जाँ दे के पडोसी की हिफाज़त की है

आज आमाल ही पस्ती का सबब हैं वरना

हमने हर दौर में दुनिया पे हुकूमत की है

दम मेरा कूच…

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Posted on September 23, 2015 at 12:00pm — 13 Comments

हयात हमने गुज़री हे इन्तेहाँ की तरह

लहू से जिसको के सींचा था बागबां की तरह

वही चमन नज़र आता हे अब खिज़ां की तरह 
हवा का झोंका भी आया तो रोक लूँगा उसे 
खड़ा हूँ तेरी हिफाज़त में पासबां की तरह 
कभी हयात में हमको सुकूं  मिला ही नहीं 
के रोज़ो शब् नज़र आते हैं कारवां की तरह 
खुदा की याद में खुद को मिटा लिया जबसे 
मेरा वजूद ज़मीं पर हे आसमां की तरह 
ये तज़र्बे  बड़ी मुश्किल से पाये हैं हमने
हयात हमने गुज़ारी हे इन्तेहाँ की…
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Posted on March 11, 2015 at 1:00pm — 13 Comments

शायरी मिल गयी

तुम मिले तो मुझे हर ख़ुशी मिल गयी 
यूँ लगा के मुझे जिंदगी मिल गयी 
कांच सा टूटकर दिल बिखर जायेगा 
अब इसे गर तेरी बेरुखी मिल गयी 
तेरी चाहत ने दिल को बनाया हे दिल 
क्या हुआ गर मुझे बेकली मिल गयी 
इस तरह दिल को रोशन किया आपने 
यूँ लगा रात को चांदनी मिल गयी 
सुन के आवाज़ तेरी मुझे यूँ लगा 
मेरे नगमो को अब रागनी मिल गयी 
तुझको देख तो दिल से ये आई सदा 
मुझको हसरत मेरी शायरी…
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Posted on October 14, 2012 at 11:54am — 5 Comments

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At 12:57am on February 11, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार की ओर से आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें...

At 12:25pm on May 17, 2012,
सदस्य कार्यकारिणी
rajesh kumari
said…

aapka hardik swagat hai.

At 8:16pm on February 23, 2012, Admin said…

 
 
 

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