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Dr Amar Nath Jha
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Dr Amar Nath Jha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-107
"हार्दिक आभार आदरणीय नवीन मणि त्रिपाठी जी। बस ग़ज़ल कहना सीख रा हूँ। "
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"काशी भी अब मुझको काबा लगता हैदीवाने का दावा सच्चा लगता है उजले कपड़े दिल का काला लगता हैबनता अपना पर बेगाना लगता है कब तक झूठे सपने यूँ भरमाएँगेझूट नहीं अब सच पर ताला लगता है पास नहीं फिर भी क्यों तुझसे प्यार हमें"चाँद बता तू कौन हमारा लगता…"
13 hours ago
Dr Amar Nath Jha updated their profile
15 hours ago
Dr Amar Nath Jha is now a member of Open Books Online
May 16

Profile Information

Gender
Male
City State
Delhi
Native Place
Deoghar, Jharkhand
Profession
Research and Teaching
About me
I am still a learner.

काशी भी अब मुझको काबा लगता है
दीवाने का दावा सच्चा लगता है

उजले कपड़े दिल का काला लगता है
बनता अपना पर बेगाना लगता है

कब तक झूठे सपने यूँ भरमाएँगे
झूट नहीं अब सच पर ताला लगता है

पास नहीं फिर भी क्यों तुझसे प्यार हमें
"चाँद बता तू कौन हमारा लगता है"

पीकर ज़ह्र ग़ज़ल तुम कहते हो कैसे
हम को तो मुश्किल हर मिसरा लगता है

तूफ़ाँ में जब फँस जाती है नाव "अमर"
तब तो रब ही एक सहारा लगता है

मौलिक व अप्रकाशित 

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"हार्दिक आभार आदरणीय नवीन मणि त्रिपाठी जी। बस ग़ज़ल कहना सीख रा हूँ। "
7 hours ago

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