For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Dr Vandana Misra
  • Female
  • Uttar pradesh
  • India
Share on Facebook MySpace

Dr Vandana Misra's Groups

 

Dr Vandana Misra's Page

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Dr Vandana Misra's blog post लघुकथा- खाली गमला
"आ. वंदना जी, अच्छी कथा हुई है । हार्दिक बधाई।"
Dec 3, 2020
Samar kabeer commented on Dr Vandana Misra's blog post लघुकथा- खाली गमला
"मुहतरमा डॉ. वंदना मिश्रा जी आदाब, अच्छी लघुकथा हुई है, बधाई स्वीकार करें ।"
Nov 30, 2020
Dr. Vijai Shanker commented on Dr Vandana Misra's blog post लघुकथा- खाली गमला
"शुभ प्रयास में सहयोग का अपना तरीका। कहानी प्रेरक है। बधाई , आदरणीय सुश्री डॉo वंदना मिश्रा जी , सादर।"
Nov 30, 2020
Sheikh Shahzad Usmani commented on Dr Vandana Misra's blog post लघुकथा- खाली गमला
"आदाब। अप्रत्यक्ष रूप से 'खाली गमलों'के माध्यम से गंभीर बातें कहती बढ़िया रचना। हार्दिक बधाई आ. डॉ. वन्दना मिश्रा जी। विवरण की बातें समुचित कम शब्दों में भी या सांकेतिक रूप से भी कही जा सकती हैं।"
Nov 30, 2020
Dr Vandana Misra posted a blog post

लघुकथा- खाली गमला

मिश्रा जी यूं तो बैंक से रिटायर हुए थे, लेकिन रिटायरमेंट के बाद उन्होंने पूरी तरह से अपने जीवन को वृक्षारोपण के लिए समर्पित कर दिया, इसलिए लोगों के लिए उनका परिचय था " वही जो पेड़ लगाते हैं"। घर के पास स्थित राधा कृष्ण मंदिर में भी उन्होंने कई पेड़ लगाए थे, जब तक उनका लगाया पौधा पूरी तरह से बड़ा न हो जाता, तब तक उसकी देखभाल के लिए जाया करते थे। पार्कों में, रोड साइड पर, अपने स्कूटर पर पानी के जरीकेन रखकर ले जाते थे और पौधों में पानी डालते थे, बाद में पैदल ही जाने लगे। कभी-कभी आसपास के घरवालों…See More
Nov 27, 2020
Dr Vandana Misra commented on Dr Vandana Misra's blog post लघुकथा- "एक और गैंगरेप"
" Samar kabeer जी, यदि विस्तार से कुछ मार्गदर्शन कर सकें, तो आभारी रहूँगी, अपने कथ्य पर मुझे कोई संदेह नहीं किंतु इस विधा के शिल्प में मैं अभी नयी हूँ। मनोविज्ञान में गहन अभिरुचि के चलते मनोवैज्ञानिक समाधान साहित्य के माध्यम से जन जन में…"
Nov 27, 2020
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Dr Vandana Misra's blog post लघुकथा- "एक और गैंगरेप"
"विषय बहुत ही संवेदन शील एवं सटीक है आदरणीया लेकिन आदरणीय समर जी से मैं भी सहमत हूँ।"
Nov 1, 2020
Samar kabeer commented on Dr Vandana Misra's blog post लघुकथा- "एक और गैंगरेप"
"मुहतरमा डॉ. वंदना मिश्रा जी आदाब, आज के हालात पर लघुकथा का प्रयास अच्छा है,लेकिन कसावट की कमी है, इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Oct 20, 2020
Dr Vandana Misra posted a blog post

लघुकथा- "एक और गैंगरेप"

नमिता गाड़ी की पिछली सीट पर आंखें मूंदे हुए सिर टिकाए सोच में डूबी हुई थी। यूं तो उसे फिल्म इंडस्ट्री में आए 3 साल हो गए थे। वह एक छोटे से कस्बे से आती थी, शुरू में उसको काम मिलने में बहुत दिक्कत हुई, दरअसल वह बोल्ड सीन देने से बचना चाहती थी, लेकिन बॉलीवुड में यह संभव न था। इधर 6 महीनों में उसने दो बड़ी फिल्में साइन की थीं, लेकिन आज उसका मन बहुत ज्यादा उद्वेलित था, क्योंकि अपनी मर्जी के विरुद्ध उसे आज काफी बोल्ड दृश्य करने पड़े थे। यही सब सोचते सोचते वह अपने घर पहुंच गई। फ्लैट का ताला खोला और…See More
Oct 17, 2020
Dr Vandana Misra replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-120
"सुन्दर रचना"
Oct 11, 2020
Dr Vandana Misra replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-120
"बढ़िया रचना"
Oct 11, 2020
Dr Vandana Misra replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-120
"उत्कृष्ट दोहे, साधुवाद।"
Oct 11, 2020
Dr Vandana Misra replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-120
"सुन्दर रचना"
Oct 11, 2020
Dr Vandana Misra replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-120
"वाह, बहुत सुंदर कुंडलिया, बधाई"
Oct 11, 2020
Dr Vandana Misra replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-120
"बहुत सुंदर ग़ज़ल"
Oct 11, 2020
Dr Vandana Misra replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-120
"काल तरंगिनि बह रही, अंजुलि भर भर लूट। अवसर कभी न लौटता, गया हाथ से छूट।। सेवा का अवसर कभी, नहीं गँवाना व्यर्थ। साधन है संतोष का, मिलता जीवन अर्थ।। अवसर से जो चूकते, वे सहते नुकसान। वही सफल जिसने किया, सही समय सन्धान।। अवसर मिलते हैं बहुत, लेकिन जाते…"
Oct 11, 2020

Profile Information

Gender
Female
City State
Lucknow
Native Place
Lucknow
Profession
Doctor
संदेश समय यह देता है!
प्रभु ने तुम्हें बनाया था जब
साथ तुम्हारे और बहुत कुछ
भी सिरजा था,
तुम अपने मद में भूल गए
किरदार में अपने फूल गए
दोहन तो सबका खूब किया
पोषण पर किंतु न ध्यान दिया
सब जीव-जंतु और वृक्ष, नदी
ये सब तुमको कुछ देते हैं
बदले में कुछ ना लेते हैं
अस्तित्व से तेरे जुड़े हैं ये
सबके पीछे कुछ कारण हैं
उस कारण को भी भूल गए
तुम सीमित ज्ञान में फूल गए
संतुलन प्रकृति का छेड़ोगे
या अपनी आंखें मूंदोगे
यदि अब भी तुम ना चेतोगे
तो काल यही दिन लाएगा
ये वक़्त मिला है इसीलिये
तुम सीखो, गुनो और समझो
फिर औरों को भी समझाओ
जिनको तुम जाहिल कहते हो
है प्रकृति तुम्हें ये सिखा रही
एक सूक्ष्म तार से जुड़े हैं सब
न भेद करो न बाँटो अब
अपनी भाषा में बता रही
तुम ज्ञानवान, वो ज्ञानहीन
तुम पर ही जिम्मेदारी है
देना होगा तुमको ही उन्हें
तुम समय की अब ये पुकार सुनो
निष्क्रियता में यूँ न बैठो
ख़ुद करो सृजन और करवाओ
तुम मेरा यूँ उपयोग करो 
सन्देश समय ये देता है...
सन्देश समय ये देता है....
सन्देश समय ये देता है!!
मौलिक व अप्रकाशित

Comment Wall

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

  • No comments yet!

Dr Vandana Misra's Blog

लघुकथा- खाली गमला

मिश्रा जी यूं तो बैंक से रिटायर हुए थे, लेकिन रिटायरमेंट के बाद उन्होंने पूरी तरह से अपने जीवन को वृक्षारोपण के लिए समर्पित कर दिया, इसलिए लोगों के लिए उनका परिचय था " वही जो पेड़ लगाते हैं"। घर के पास स्थित राधा कृष्ण मंदिर में भी उन्होंने कई पेड़ लगाए थे, जब तक उनका लगाया पौधा पूरी तरह से बड़ा न हो जाता, तब तक उसकी देखभाल के लिए जाया करते थे। पार्कों में, रोड साइड पर, अपने स्कूटर पर पानी के जरीकेन रखकर ले जाते थे और पौधों में पानी डालते थे, बाद में पैदल ही जाने लगे। कभी-कभी आसपास के…

Continue

Posted on November 27, 2020 at 12:00pm — 7 Comments

लघुकथा- "एक और गैंगरेप"

नमिता गाड़ी की पिछली सीट पर आंखें मूंदे हुए सिर टिकाए सोच में डूबी हुई थी। यूं तो उसे फिल्म इंडस्ट्री में आए 3 साल हो गए थे। वह एक छोटे से कस्बे से आती थी, शुरू में उसको काम मिलने में बहुत दिक्कत हुई, दरअसल वह बोल्ड सीन देने से बचना चाहती थी, लेकिन बॉलीवुड में यह संभव न था। इधर 6 महीनों में उसने दो बड़ी फिल्में साइन की थीं, लेकिन आज उसका मन बहुत ज्यादा उद्वेलित था, क्योंकि अपनी मर्जी के विरुद्ध उसे आज काफी बोल्ड दृश्य करने पड़े थे। यही सब सोचते सोचते वह अपने घर पहुंच गई। फ्लैट का ताला खोला…

Continue

Posted on October 16, 2020 at 9:00pm — 3 Comments

सृष्टि का चलन

सृष्टि का चलन

चाँद चमकता

सूर्य की ही रोशनी से

हर दिन,

एक दिन क्यों आ जाता

सूर्य और पृथ्वी के बीच,

लगाता सूर्य को ग्रहण

बहुत पास जाकर

रोकता उसका प्रकाश, 

बना देता है उसे

अपने ही जैसा,

यह प्यार है चाँद का

या जलन,

नहीं नहीं....

चन्द्र किरणों की तो

शीतल है छुअन

यह तो है बस

रचयिता की लीला

और सृष्टि का चलन !…

Continue

Posted on August 31, 2020 at 4:12pm — 4 Comments

शुतुरमुर्ग

शुतुरमुर्ग

सामने आई
विपदा देख
शुतुरमुर्ग सा
रेत में सिर धँसाये पड़ा,
बिल्ली को देख
कबूतर सा
आँखें मूँदे
सहमा बड़ा,
आज मानव
युद्ध सामने देखकर भी
क्यों कायर सम खड़ा,
काश! फिर कोई

जामवंत आये
हनुमान को
उनका बल
याद दिलाये।

मौलिक व अप्रकाशित

Posted on May 8, 2020 at 3:30pm — 2 Comments

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Sushil Sarna posted a blog post

दोहा एकादश. . . . . पतंग

मकर संक्रांति के अवसर परदोहा एकादश   . . . . पतंगआवारा मदमस्त सी, नभ में उड़े पतंग । बीच पतंगों के…See More
yesterday
Admin posted discussions
yesterday
Admin added a discussion to the group चित्र से काव्य तक
Thumbnail

'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 175

 आदरणीय काव्य-रसिको !सादर अभिवादन !!  ’चित्र से काव्य तक’ छन्दोत्सव का यह एक सौ…See More
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey posted a blog post

नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ

   जिस-जिस की सामर्थ्य रही है धौंस उसी की एक सदा से  एक कहावत रही चलन में भैंस उसीकी जिसकी लाठी…See More
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post देवता क्यों दोस्त होंगे फिर भला- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आपने कहे को सस्वर किया इस हेतु धन्यवाद, आदरणीय  //*फिर को क्यों करने से "क्यों "…"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"रचना को आपने अनुमोदित कर मेरा उत्साहवर्धन किया, आदरणीय विजत निकोर जी हार्दिक आभार .. "
yesterday
Sushil Sarna commented on vijay nikore's blog post सुखद एकान्त है या है अकेलापन
"आदरणीय जी सादर प्रणाम -  अद्भुत सृजन - हृदय तटों को छूती गहन भावों की अभिव्यक्ति ने अहसासों की…"
Tuesday
vijay nikore commented on vijay nikore's blog post सुखद एकान्त है या है अकेलापन
"प्रिय अशोक कुमार जी,रचना को मान देने के लिए हार्दिक आभार। -- विजय"
Monday
vijay nikore commented on vijay nikore's blog post सुखद एकान्त है या है अकेलापन
"नमस्ते, सौरभ जी। आपने सही कहा.. मेरा यहाँ आना कठिन हो गया था।       …"
Monday
vijay nikore commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"प्रिय सौरभ भाई, नमस्ते।आपका यह नवगीत अनोल्हा है। कई बार पढ़ा, निहित भावना को मन में गहरे उतारा।…"
Monday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post देवता क्यों दोस्त होंगे फिर भला- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई सौरभ जी सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और विस्तृत टिप्पणी से मार्गदर्शन के लिए हार्दिक आभार।…"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post सच काफिले में झूठ सा जाता नहीं कभी - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद।"
Saturday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service