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Veena Gupta
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Welcome, Veena Gupta!

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Veena Gupta commented on Veena Gupta's blog post प्यार का सागर
"आभार आपका कबीर जी ,रचना के अवलोकन के लिए धन्यवाद "
Dec 31, 2020
Samar kabeer commented on Veena Gupta's blog post प्यार का सागर
"मुहतरमा वीणा जी आदाब, अच्छी रचना हुई है, बधाई स्वीकार करें ।"
Dec 30, 2020
Veena Gupta posted a blog post

प्यार का सागर

इक मैं थी इक मेरा साथी,सुन्दर इक संसार था संसार नहीं था एक समंदर,बसता जहां बस प्यार था छोटे बडे़ सभी रिश्तों की,मर्यादा यहाँ पालन होती थी प्यार की हर नदिया का,सम्मान यहाँ पर होता था मिलती जब कोइ नदिया समुद्र से,हर्षोल्लास बरसता था बाहें फैला समुद्र भी अपनी,सबका स्वागत करता था ना जाने फिर इकदिन कैसा एक बवंडर आया था सारा समंदर सूख गया,बस मरुस्थल ही बच पाया था आज प्रयत्न मैं कर रही,मरुभूमि में कुछ पुष्प खिलाने का कुछ सुकूं जो दे सकें,स्वागत मरुभूमि में आने वालों का मौलिक/अप्रकाशित    वीणा See More
Dec 29, 2020
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धार्मिक साहित्य

इस ग्रुप मे धार्मिक साहित्य और धर्म से सम्बंधित बाते लिखी जा सकती है,See More
Dec 28, 2020
Veena Gupta commented on Veena Gupta's blog post अंतिम सत्य
"स्नेही कबीर जी एवं धामी जी,रचना की सराहना के लिए हार्दिक आभार "
Dec 27, 2020
Veena Gupta commented on Veena Gupta's blog post रफ़्तारे ज़िन्दगी
"कबीर जी,रचना की सराहना के लिए धन्यवाद.आप ऐसे ही अपने सुझाव देते रहें,आभार आपका "
Dec 27, 2020
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Veena Gupta's blog post अंतिम सत्य
"आ. वीणा जी, सादर अभिवादन । अच्छी रचना हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Dec 23, 2020
Samar kabeer commented on Veena Gupta's blog post मौन की भाषा
"मुहतरमा वीणा गुप्ता जी आदाब, अच्छी रचना हुई है, बधाई स्वीकार करें ।"
Dec 21, 2020
Samar kabeer commented on Veena Gupta's blog post अंतिम सत्य
"मुहतरमा वीणा जी आदाब, सुंदर रचना हुई है, बधाई स्वीकार करें ।"
Dec 21, 2020
Veena Gupta posted a blog post

अंतिम सत्य

जीवन की इस नदिया को,बस बहते ही जाना है लक्ष्य यही है इसका इकदिन,सागर में मिल जाना है चाहे जितनी बाधाएँ हों,चाहे जितने हों भटकाव लक्ष्य प्राप्त करना ही होगा,होगा ना उसमें बदलाव मीठे पानी की नदिया इकदिन,खारा सागर बन जायेगी इसी तरह ये जीवन नदिया इकदिन,अमर आत्मा बन जायेगी पर जाने से पहले जीवन में,कुछ ऐसे मीठे काम करो नदिया जैसे सब याद करें,आत्मा अमर हो जाने दो मौलिक /अप्रकाशित    वीणा See More
Dec 19, 2020
Veena Gupta posted a blog post

मौन की भाषा

मौन की भाषा सुनो,मौन मुखरित हो रहा है जाने कितने शिकवे छिपे हैं,जाने कितने हैं फसाने अपने अंतर में छुपाये,जाने कब से सह रहा है खामोशी चारों तरफ है,अब न कोइ शोर है कोइ नहीं है पास में अब,एकाकीपन का ये दौर है लग रहा है फिर भी ऐसा,ज्यों गूंजता कानों में कोइ शोर है ध्यान और एकांत ने,धीरे से फिर समझा दिया मौन तो इक शक्ति है विश्वास है नयी राहों पर देता ज्ञान का प्रकाश है एकांत मौन में मिलती नयी उर्जा सदा मौन चिंतन ही देता नये आयाम है मौन मानो खुद से खुद की इक नयी पहचान है मौन की भाषा अनूठी दे रही नव…See More
Dec 18, 2020
Samar kabeer commented on Veena Gupta's blog post रफ़्तारे ज़िन्दगी
"मुहतरमा वीणा जी आदाब, अच्छी रचना हुई है, बधाई स्वीकार करें ।"
Dec 4, 2020
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रफ़्तारे ज़िन्दगी

बड़ी तेज़ रफ़्तार है ज़िन्दगी की,मुट्ठी से फिसलती चली जा रही है उम्र की इस दहलीज़ पर जैसे,ठिठक सी गयी है,सिमट सी गयी है बीते हुए पुराने मौसम याद आ रहे हैं,हासिल क्या किया तूने समझा रहे हैं ऐ ज़िन्दगी तू ज़रा तो ठहर जा,जीने की कोई राह बता जा बचे जो पल हैं चंद ज़िन्दगी के,कैसे संवारूँ ज़रा तू बता जा जिन्दगी ने कहा कुछ यूँ मुस्कुरा कर,प्यार ख़ुद से तू कर ले दुनिया भुला कर परमात्मा से लौ तू लगा ले,जीवन का सच्चा आनन्द पा ले स्वर्णिम ये पल मत व्यर्थ गँवा,बात मेरी तू मान जा प्रभु का प्यार जब तुझको…See More
Dec 2, 2020
Veena Gupta commented on Samar kabeer's blog post तरही ग़ज़ल
"खूबसूरत ग़ज़ल,कबीर जी बधाई "
Dec 1, 2020
Samar kabeer commented on Veena Gupta's blog post आइना
"मुहतरमा वीणा गुप्ता जी आदाब, अच्छी रचना हुई है, बधाई स्वीकार करें ।"
Nov 30, 2020
Dr. Vijai Shanker commented on Veena Gupta's blog post आइना
"आदरणीय सुश्री वीणा गुप्ता जी , आपकी यह कविता भी एक गम्भीर विषय पर है , उम्र , बीती हुयी लम्बी उम्र बहुत कुछ देख चुकी होती है , अनुभव और ज्ञान का भण्डार होती है। बधाई , इस सारगर्भित रचना पर , सादर।"
Nov 30, 2020

Profile Information

Gender
Female
City State
Lucknow
Native Place
India
Profession
House wife
About me
I live in Lucknow but last year my husband passed away so I am here with my son

Mera desh

हिंदुस्तानी नाम है मेरा,हिंदी है मेरी पहचान

भरतमाता माँ है मेरी,बसते जिसमें मेरे प्राण

प्राण बिना ज्यों व्यर्थ है जीवन,तन हो जाता है निष्प्राण

भारतीय कहलाने में ही,दुनिया में है मेरी शान

मानो या ना मानो पर,भारत है दुनिया का दिल

देख सको तो देखो,आकार भी दिल जैसा बिल्कुल

मौलिक ऐवम अप्रकाशित

           वीणा

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प्यार का सागर

इक मैं थी इक मेरा साथी,सुन्दर इक संसार था 

संसार नहीं था एक समंदर,बसता जहां बस प्यार था 

छोटे बडे़ सभी रिश्तों की,मर्यादा यहाँ पालन होती थी 

प्यार की हर नदिया का,सम्मान यहाँ पर होता था 

मिलती जब कोइ नदिया समुद्र से,हर्षोल्लास बरसता था 

बाहें फैला समुद्र भी अपनी,सबका स्वागत करता था 

ना जाने फिर इकदिन कैसा एक बवंडर आया था 

सारा समंदर सूख गया,बस मरुस्थल ही बच पाया था 

आज प्रयत्न मैं कर रही,मरुभूमि में कुछ पुष्प खिलाने का 

कुछ सुकूं…

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Posted on December 26, 2020 at 10:54pm — 2 Comments

मौन की भाषा

मौन की भाषा सुनो,मौन मुखरित हो रहा है 

जाने कितने शिकवे छिपे हैं,जाने कितने हैं फसाने 

अपने अंतर में छुपाये,जाने कब से सह रहा है 

खामोशी चारों तरफ है,अब न कोइ शोर है 

कोइ नहीं है पास में अब,एकाकीपन का ये दौर है 

लग रहा है फिर भी ऐसा,ज्यों गूंजता कानों में कोइ शोर है 

ध्यान और एकांत ने,धीरे से फिर समझा दिया 

मौन तो इक शक्ति है विश्वास है 

नयी राहों पर देता ज्ञान का प्रकाश है 

एकांत मौन में मिलती नयी उर्जा सदा 

मौन चिंतन ही…

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Posted on December 18, 2020 at 3:33am — 1 Comment

अंतिम सत्य

जीवन की इस नदिया को,बस बहते ही जाना है 

लक्ष्य यही है इसका इकदिन,सागर में मिल जाना है 

चाहे जितनी बाधाएँ हों,चाहे जितने हों भटकाव 

लक्ष्य प्राप्त करना ही होगा,होगा ना उसमें बदलाव 

मीठे पानी की नदिया इकदिन,खारा सागर बन जायेगी 

इसी तरह ये जीवन नदिया इकदिन,अमर आत्मा बन जायेगी 

पर जाने से पहले जीवन में,कुछ ऐसे मीठे काम करो 

नदिया जैसे सब याद करें,आत्मा अमर हो जाने दो 

मौलिक /अप्रकाशित  

  वीणा 

Posted on December 18, 2020 at 3:00am — 3 Comments

रफ़्तारे ज़िन्दगी

बड़ी तेज़ रफ़्तार है ज़िन्दगी की,मुट्ठी से फिसलती चली जा रही है 

उम्र की इस दहलीज़ पर जैसे,ठिठक सी गयी है,सिमट सी गयी है 

बीते हुए पुराने मौसम याद आ रहे हैं,हासिल क्या किया तूने समझा रहे हैं 

ऐ ज़िन्दगी तू ज़रा तो ठहर जा,जीने की कोई राह बता जा 

बचे जो पल हैं चंद ज़िन्दगी के,कैसे संवारूँ ज़रा तू बता जा 

जिन्दगी ने कहा कुछ यूँ मुस्कुरा कर,प्यार ख़ुद से तू कर ले दुनिया भुला कर 

परमात्मा से लौ तू लगा ले,जीवन का सच्चा आनन्द पा ले 

स्वर्णिम ये पल मत…

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Posted on December 2, 2020 at 2:37am — 2 Comments

 
 
 

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