For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

shree suneel
Share

Shree suneel's Friends

  • jaan' gorakhpuri
  • Hari Prakash Dubey
  • vijay nikore
 

shree suneel's Page

Latest Activity

Ravi Shukla commented on shree suneel's blog post त़रह़ी ग़ज़ल..
"आदरणीय सुनील जी अच्‍छी गजल कही है आपने शेेर दर शेर बधाई आपको "
Oct 7, 2016

सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी commented on shree suneel's blog post त़रह़ी ग़ज़ल..
"आदरनीय श्री सुनील भाई , अच्छी गज़ल कही है , आपको गज़ल के लिये हार्दिक बधाइयाँ ।"
Oct 5, 2016
Arpana Sharma commented on shree suneel's blog post त़रह़ी ग़ज़ल..
"चलो अच्छा हुआ दो टूक तुमने कह दिया वरना "ज़ियादा वक़्त जो देते रफ़ाक़त और हो जाती." बहुत खूब। बधाई"
Oct 4, 2016
shree suneel posted a blog post

त़रह़ी ग़ज़ल..

1222 1222 1222 1222तेरे औ' मेरे नामों पर सियासत और हो जातीनिहाँ होता नहीं सब कुछ तो आफ़त और हो जाती.ह़दों से आगे जा कर ये ग़मे फ़ुर्क़त असर करताअगर मुझको तेरी स़ुह़्बत की आ़दत और हो जाती.ये रोने धोने का आ़लम, फ़िराक़े यार का मौसमए क़िस्मत! हैं अभी ये कम, अज़ीयत और हो जाती!ख़िरद पर ग़र यकीं करते नहीं फिर जाने क्या होताजो सुनते दिल की, दुनिया से अ़दावत और हो जाती.चलो अच्छा हुआ दो टूक तुमने कह दिया वरनाज़ियादा वक़्त जो देते रफ़ाक़त और हो जाती.मुझे तुम सिफ़् र कर देते मुझी से, दूर फिर जाते"जहाँ सब…See More
Oct 4, 2016
Samar kabeer commented on shree suneel's blog post तज़मींन बर तजमींन
"जी,फ़िलहाल नेटवर्क समस्या से जूझ रहा हूँ,उलझन दूर होते ही ज़रूर पढूंगा ।"
Jul 27, 2016
shree suneel commented on गिरिराज भंडारी's blog post ग़ज़ल - उस मंज़र को खूनी मंज़र लिक्खा है ( गिरिराज भंडारी ) ज़मीन , मोहतरम जनाब समर कबीर साहिब ।
"आदरणीय गिरिराज सर जी, उम्दा ग़ज़ल.. उम्दा अशआर. . पेश किये हैं. बहुत ख़ूब! दिल से बधाई आपको. सादर."
Jul 26, 2016
shree suneel commented on Dr. Vijai Shanker's blog post चोर को चोर कहना गुनाह होता है - डॉo विजय शंकर
"छोटी.. मगर सशक्त प्रस्तुति! दिल से बधाई आपको आदरणीय डा0 विजय शंकर सर जी. सादर."
Jul 26, 2016
shree suneel commented on रामबली गुप्ता's blog post गज़ल : मधु-मिलन -रामबली गुप्ता
"क्या बात है! बहुत सुन्दर. अपकी इस मनभावन प्रस्तुति पर आपको हार्दिक हार्दिक बधाई आदरणीय रामबली गुप्ता जी. सादर."
Jul 26, 2016
shree suneel commented on Sushil Sarna's blog post उनकी शाम दे दो ....
"ख़ूब! भावपूर्ण प्रस्तुति! हार्दिक बधाई आपको आदरणीय सुशील सरना सर जी. सादर."
Jul 26, 2016
shree suneel commented on shree suneel's blog post तज़मींन बर तजमींन
"आदरणीय समर कबीर सर जी, हौसला अफ्जाई के लिए शुक्रिया! मेरे दोनों तज़मींन इसी ब्लॉग पर उपलब्ध हैं. यहीं से previous post पर click कर दूसरे और ऐसे हीं पहले तजमींन तक पहुँचा जा सकता है. आशा है आपका मार्गदर्शन प्राप्त होता रहेगा. सादर."
Jul 26, 2016
Samar kabeer commented on shree suneel's blog post तज़मींन बर तजमींन
"आपका यह अमल सराहनीय है,आपकी पिछली तज़मीन मैं कहाँ और कैसे पढ़ सकता हूँ, कृपया मुझे बताऐं ।"
Jul 25, 2016
shree suneel posted a blog post

तज़मींन बर तजमींन

मफ़ाईलुन मफ़ाईलुन मफ़ाईलुन मफ़ाईलुन"तज़मीन बर तजमीन समर कबीर साहिब बर ग़ज़ल हज़रत सय्यद रफ़ीक़ अहमद "क़मर" उज्जैनी साहिब"कोई पूछे ज़रा हमसे कि क्या क्या हमने देखा हैसुलगता शह्र औ' बिखरा वो कुनबा हमने देखा हैनया तुम दौर ये देखो पुराना हमने देखा है"ख़ज़ाँ देखी कभी मौसम सुहाना हमने देखा हैअँधेरा हमने देखा है,उजाला हमने देखा हैफ़सुर्दा गुल कली का मुस्कुराना हमने देखा है""ग़मों की रात ख़ुशियों का सवेरा हमने देखा हैहमें देखो कि हर रंग-ए-ज़माना हमने देखा है"_____सियासत ने दिये रख हाँथ में दो मुल्क के…See More
Jul 25, 2016
shree suneel commented on shree suneel's blog post तज़मींन बर तजमींन
"आदरणीय समर कबीर सर जी, इस तजमींन बर तजमींन पर आपकी उत्साहित करती प्रतिक्रिया से प्रफुल्लित हूँ. अापको संतुष्ट पा कर मेरा हौसला बढ़ा है. इसके लिए बहुत बहुत शुक्रिया. आदरणीय, मैं भी चाहता हूँ कि ये विधा पुनः जीवित हो. इसलिए अाजकल तज़मींन पर कुछ…"
Jul 24, 2016
shree suneel commented on shree suneel's blog post तज़मींन बर तजमींन
"प्रस्तुति की सराहना के लिए हार्दिक धन्यवाद आदरणीय अशोक रक्ताले सर जी. सादर"
Jul 24, 2016
shree suneel commented on shree suneel's blog post तज़मींन बर तजमींन
"रचना तक आने, इसकी सराहना व उत्साहवर्धन के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद आदरणीय गिरिराज सर जी. सादर."
Jul 24, 2016
Samar kabeer commented on shree suneel's blog post तज़मींन बर तजमींन
"जनाब श्री सुनील जी आदाब,भाई जी ख़ुश कर दिया आपने,इस विधा को पुनः जीवित करने में आपका योगदान भुलाया नहीं जायेगा । बहुत ही फनकारी से मिसरे चस्पाँ किये हैं आपने,इस खूबसूरत तज़मीन बर तज़मीन के लिये ढेरों दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं । "न रुक ऐ…"
Jul 21, 2016

Profile Information

Gender
Male
City State
bihar
Native Place
barh
Profession
Teacher
About me
Like simplicity

Shree suneel's Blog

त़रह़ी ग़ज़ल..

1222 1222 1222 1222



तेरे औ' मेरे नामों पर सियासत और हो जाती

निहाँ होता नहीं सब कुछ तो आफ़त और हो जाती.



ह़दों से आगे जा कर ये ग़मे फ़ुर्क़त असर करता

अगर मुझको तेरी स़ुह़्बत की आ़दत और हो जाती.



ये रोने धोने का आ़लम, फ़िराक़े यार का मौसम

ए क़िस्मत! हैं अभी ये कम, अज़ीयत और हो जाती!



ख़िरद पर ग़र यकीं करते नहीं फिर जाने क्या होता

जो सुनते दिल की, दुनिया से अ़दावत और हो जाती.



चलो अच्छा हुआ दो टूक तुमने कह दिया… Continue

Posted on October 3, 2016 at 11:45am — 3 Comments

तज़मींन बर तजमींन

मफ़ाईलुन मफ़ाईलुन मफ़ाईलुन मफ़ाईलुन



"तज़मीन बर तजमीन समर कबीर साहिब बर ग़ज़ल हज़रत सय्यद रफ़ीक़ अहमद "क़मर" उज्जैनी साहिब"







कोई पूछे ज़रा हमसे कि क्या क्या हमने देखा है

सुलगता शह्र औ' बिखरा वो कुनबा हमने देखा है

नया तुम दौर ये देखो पुराना हमने देखा है

"ख़ज़ाँ देखी कभी मौसम सुहाना हमने देखा है

अँधेरा हमने देखा है,उजाला हमने देखा है

फ़सुर्दा गुल कली का मुस्कुराना हमने देखा है"

"ग़मों की रात ख़ुशियों का सवेरा हमने देखा है

हमें… Continue

Posted on July 18, 2016 at 2:00am — 9 Comments

तज़मींन

तज़मींन बर ग़ज़ल फ़िराक़ गोरखपुरी

2122 2122 2122 212



उसके लब औ' जाँफ़िजा़ आवाज़ की बातें करो

फिर उसी दमसाज़ के ऐजाज़ की बातें करो

सोगे इश्क़ आबाद है अब साज़ की बातें करो

"शामे ग़म कुछ उस निगाहें नाज़ की बातें करो

बेख़ुदी बढ़ती चली है राज़ की बातें करो."



ज़िंदगी में जाविदाँ हैं अाहो दर्दो रंजो ग़म

जिक्र से उस शोख़ के देखे गए होते ये कम

उसके ढब,उसकी हँसी,हर शौक़ उसका हर सितम

"नक्हते ज़ुल्फ़े परीशां दास्ताने शामे ग़म

सुब्ह़ होने तक… Continue

Posted on July 4, 2016 at 8:36pm — 4 Comments

तजमींन..

1212 1122 1212 22

तज़़्मीन बर ग़ज़ल जाँ निसार अख्तर



वो होंगे कैसे, सितम जिनपे मैंने ढाया था

कि मैं रुका न मुझे कोई रोक पाया था

थे अपने लोग मगर उनसे यूँ निभाया था

"ज़रा सी बात पे हर रस्म तोड़ आया था

दिल-ए-तबाह ने भी क्या मिज़ाज पाया था "



जमूद हूँ कि रवाँ हूँ मैं रहगुज़र की तरह

रुका कभी तो लगा वो भी इक सफ़र की तरह

दयारे गै़र में उभरा कुछ उस दहर की तरह

" गुज़र गया है कोई लम्हा-ए-शरर की तरह

अभी तो मैं उसे पहचान भी न पाया था… Continue

Posted on June 6, 2016 at 3:39am — 7 Comments

Comment Wall (2 comments)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 6:34pm on September 17, 2015, pratibha pande said…

आदरणीय ,उत्साहवर्धन के लिए आपका हार्दिक आभार 

At 4:39pm on July 20, 2015, kanta roy said…
आभार आपको आदरणीय श्री सुनील जी तहे दिल से ।
 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

amita tiwari posted a blog post

ये जो है लड़की

ये जो है लड़कीउसकी जो आँखेआँखों में सपनासपने में घरउसका अपना घरजिसके बाहरवो लिख सकेयह  मेरा घर है…See More
35 minutes ago
Manan Kumar singh posted a blog post

गजल(डरे जो बहुत....)

122 122  122  12डरे जो बहुत,बुदबुदाने लगे मसीहे,लगा है, ठिकाने लगे।1तबाही का' आलम बढ़ा जा रहाचिड़ी के…See More
39 minutes ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Dr.Prachi Singh replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"बहुत बहुत धन्यावाद आ० शेख उस्मानी जी "
8 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Dr.Prachi Singh replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"शुक्रिया आ० सुशील सरना जी "
8 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Dr.Prachi Singh replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"जन्मदिन पर आपकी और ओबीओ परिवार की नेह सिंचित सद्भावनाएं शुभकामनाएं मुझे मिली, मेरा सौभाग्य है... आप…"
8 hours ago
Samar kabeer commented on राज़ नवादवी's blog post राज़ नवादवी: एक अंजान शायर का कलाम- ६१
"जनाब राज़ नवादवी साहिब आदाब,ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें । 'जिसको…"
11 hours ago
Samar kabeer commented on V.M.''vrishty'''s blog post मौत की उम्मीद पर (ग़ज़ल)
"चेहरा पैमाना बना है खूबियों का आज-कल' ये मिसरा तो ठीक है,राज़ साहिब,"पैमाना" का अर्थ…"
11 hours ago
Samar kabeer commented on राज़ नवादवी's blog post राज़ नवादवी: एक अंजान शायर का कलाम- ६२
"//हिन्दुओं में मृत्यु के पश्चात लाश को नहाने की परंपरा है, मेरा अभिप्रेय इसी से है// मरने के पश्चात…"
11 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani commented on Chandresh Kumar Chhatlani's blog post सत्यव्रत (लघुकथा)
"//उसने झूठ भरी आवाज़ में कहा "लेकिन बेटे इस वृद्धाश्रम में कोई कमी नहीं।"//  इस…"
11 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani left a comment for Chandresh Kumar Chhatlani
"आदाब। आपकी अद्वितीय लघुकथा ''सत्यव्रत" भी मंच पर "फ़ीचर" किये जाने पर तहे…"
11 hours ago
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post पीढ़ी को समझा दे पंकज, खेती ख़ातिर खेत बचा ले----ग़ज़ल
"आदरणीय लक्ष्मण धामी सर ग़ज़ल को शुभकामनाएं देने के लिए बहुत-बहुत आभार"
11 hours ago
Dr. Vijai Shanker commented on Chandresh Kumar Chhatlani's blog post सत्यव्रत (लघुकथा)
"आदरणीय चंद्रेश कुमार जी , निसंदेह बहुत ही अच्छी लघु - कथा है , प्रेरक भी है। पर इसमें एक जबरदस्त…"
12 hours ago

© 2018   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service