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गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s Blog – February 2021 Archive (5)

किस लिए तर्क-ए-तअल्लुक़ के तू पहलू देखे (131 )

ग़ज़ल( 2122 1122 1122 22 /112 )
किस लिए तर्क-ए-तअल्लुक़ के तू पहलू देखे
ज़ीस्त भर के लिए क्यों हिज्र के बिच्छू देखे
**
था कभी वक़्त तुझे दिखती थी बस अच्छाई
जब भी देखे तू मेरी अब तो बुरी खू देखे
**
सूखे टुकड़े भी हैं देखे किसी थाली में कभी
जाम-ए-मय संग कहीं सजते हैं काजू देखे
**…
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Added by गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' on February 23, 2021 at 9:30pm — No Comments

वो कहते हैं वतन के ख़्वाब हम मिस्मार कर देंगे( 130 )

वो कहते हैं वतन के ख़्वाब हम मिस्मार कर देंगे
सभी के बीच नफ़रत की खड़ी दीवार कर देंगे
**
सियासत सिर्फ़ चमके एक है उनका यही मक़सद
घरों में दुश्मनों की फौज़ को तय्यार कर देंगे
**
वो ऐसे बीज बोएँगे उगेगी फ़स्ल काँटों की
उन्ही काँटों से फिर हर रास्ता दुश्वार कर देंगे
**
वो इतनी नफ़रतें भी पाल कर…
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Added by गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' on February 16, 2021 at 10:00pm — 6 Comments

अम्न का माहौल हो आराम-ए-जाँ के वास्ते (129 )

ग़ज़ल( 2122 2122 2122 212 )
अम्न का माहौल हो आराम-ए-जाँ के वास्ते
जूँ कि गुल दरकार है इक गुलसिताँ के वास्ते
**
है शराब अच्छी अगर तो रिन्द ख़ाली कर सुबू
पर नमूना छोड़ दे पीर-ए-मुग़ाँ के वास्ते
**
है चना कोई अकेला भाड़ क्या फोड़ेगा वो
लोग होते हैं ज़रूरी कारवाँ के वास्ते
**…
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Added by गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' on February 10, 2021 at 3:30pm — 6 Comments

न तनाब-ए-इश्क़ छुड़ाइए ये सितम हुज़ूर न ढाइए (128 )

ग़ज़ल  ( 11212 11212 11212 11212 )
न तनाब-ए-इश्क़ छुड़ाइए ये सितम हुज़ूर न ढाइए
यही इल्तज़ा है कि दिल से यूँ न उमीद-ए-ज़ीस्त मिटाइए
**
हमें इश्क़ में हैं तलाशने कई संग-ए-रह बनें हमसफ़र
है मुफ़ीद ये कि क़दम सनम ज़रा साथ साथ बढ़ाइए
**
ये जो कनखियों से है देखना ये झुकी नज़र फिर उठी नज़र
ये अदा है आपकी पुरख़तर किसी और को न…
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Added by गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' on February 6, 2021 at 12:30pm — No Comments

थक चुके हैं आपका हुज़ूर इंतज़ार कर (127 )

ग़ज़ल ( 212 1212 1212 1212 )
थक चुके हैं आपका हुज़ूर इंतज़ार कर
हाल-ए-दिल की आप अब तो आके लीजिए ख़बर
**
किस तरह से एतबार हम दिलाएँ आपकी
याद की शमीम से महकती दिल की रहगुज़र
**
हसरतें मुकाम तक पहुँच सकेंगी क्या कभी
या कि हम बनाएँगे हुज़ूर रेत के ही घर
**
बढ़ गईं हैं…
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Added by गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' on February 4, 2021 at 7:00pm — 2 Comments

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