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Hariom Shrivastava's Blog – July 2017 Archive (3)

दोहे - (गुरुपूर्णिमा के उपलक्ष में)

आई है गुरु पूर्णिमा, इसका लें संज्ञान।

गुरु हैं सागर ज्ञान के, जान सके तो जान।।1।।



कोई कितना भी रहे, अद्भुत प्रतिभावान।

गुरु ही उसे निखारते, जान सके तो जान।।2।।



मठाधीश जो बन गए, बाँट रहे हैं ज्ञान।

उनके असली रूप को, जान सके तो जान।।3।।



गुरु की महिमा जानिए, गुरु बिन मिले न ज्ञान।

गुरु में प्रभु का रूप है, जान सके तो जान।।4।।



गुरु चाहें तो डाल दें, मुर्दे में भी जान।

क्षमताएं उनकीं अनत, जान सके तो जान।।5।।

(मौलिक व… Continue

Added by Hariom Shrivastava on July 9, 2017 at 6:34pm — 5 Comments

दुमदार दोहे --

1-

कौन सुखी संसार में, जिसे न हो व्यवधान।

होती बुद्धि विवेक से, हर मुश्किल आसान।।

निरापद किसको देखा।।

2-

विपदा हो जब सामने, मुश्किल में हो जान।

ऐसे में हिम्मत रखें, सँग में प्रभु का ध्यान।।

आपदा टल जाएगी।।

3-

मुश्किल का मिलता नहीं, जब कोई भी तोड़।

अंदर ही अंदर वही, लेती रक्त निचोड़।।

आदमी घुटता रहता।।

4-

होती मुश्किल वक्त में, रिश्तों की पहचान।

सब दिन होते हैं नहीं, हरदम एक समान।।

परख सबकी हो जाती।।

5-

चुप रहकर… Continue

Added by Hariom Shrivastava on July 8, 2017 at 11:46pm — 7 Comments

कुण्डलिया छंद - (जी एस टी पर)

1-

आया है जी एस टी, ऐसा एक विधान।

सुगम रहेगा टैक्स यह, मिटे सभी व्यवधान।।

मिटे सभी व्यवधान, प्रणाली सरल रहेगी।

फैलेगा व्यापार, चैन की गंग बहेगी।।

कर की दरें समान, हटा जाँचों का साया।

भारत भर में आज, एक ऐसा कर आया।।

2-

सारी जनता खुश हुई, जागी आधी रात।

लगता है जी एस टी, बदलेगा हालात।।

बदलेगा हालात, यही कहकर भरमाया।

ऐसे खुश हैं लोग, लगा जैसे कुछ पाया।।

बना दिया माहौल, प्रचारित करके भारी।

देना होगा टैक्स, मगर खुश जनता… Continue

Added by Hariom Shrivastava on July 2, 2017 at 12:30am — 5 Comments

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