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डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's Blog – July 2016 Archive (2)

दीप जलकर थक गया

बहरे रमल मुसम्मन महज़ूफ़

फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन फ़ाइलुन

2122 2122 2122 212



दीप जलकर थक गया ऐसे समय आये तो क्या

हो गया जीवन धुंआ तब गीत यदि गाये तो क्या



चाहता था मैं तृषित उस दृष्टि का आभास हो

नेह की सूखी फसल पावस कहर ढाये तो क्या



है प्रतीक्षा में कठिन तिल-तिल सुलगना उम्र भर

स्वाति यदि निष्प्राण चातक को नहा जाए तो क्या



हो सके कब स्वयम के, परिवार के या प्यार के

गीत के या देश के हित कुछ न कर पाए तो क्या



राग… Continue

Added by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on July 30, 2016 at 5:32pm — 5 Comments

कुछ कमाल तो आये

फ़ाइलुन मुफ़ाईलुन फ़ाइलुन मुफ़ाईलुन

212 1222  212 1222 

जिन्दगी में कुछ लम्हे बेमिसाल तो आये

ख्वाब में खयालों में कुछ सवाल तो आये

बेखुदी में हैं अब भी, काश होश आ  जाता    

माँ को अपने बच्चे का कुछ खयाल तो आये

 

रूप में उधर चांदी , इश्क में इधर सोना

रोशनी बहुत होगी कुछ उछाल  तो आये

 

फूल खूबसूरत है,  है नहीं मगर खुशबू

हुस्न तो नुमायाँ है  बोल-चाल तो  आये

 

यूँ तो खून बहता है आदमी की धमनी…

Continue

Added by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on July 1, 2016 at 4:00pm — 13 Comments

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