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Rachna Bhatia's Blog – August 2021 Archive (3)

ग़ज़ल- शिवाला लगा

122 122 122 12

1 तुझे जिसके लहज़े में ताना लगा

मुझे दिल से वो शख़्स सच्चा लगा

 2 ये मत पूछ क्या उसमें अच्छा लगा

 वो मासूम इक ज़िद्दी बच्चा लगा

3 तू सुन शोर पहले मेरे दिल का फिर

 बता क्यों तुझे मैं अकेला लगा

 4 बता वास्ता उससे रक्खूँ भी क्यों

 मुझे आदमी जब वो झूठा लगा

 5 थी कुछ बात या इश्क़ का था सरूर

हरिक चेहरा जो मुझको तेरा लगा

 6 मुहब्बत ही की है गुनह तो…

Continue

Added by Rachna Bhatia on August 30, 2021 at 12:00pm — 7 Comments

ग़ज़ल-गीत आशिक़ाना हो

2122 1212 22/112

 1

उसका जब मेरी कू में आना हो

उठ चुका ग़म का शामियाना हो

2

मिल रहा प्यार जब पुराना हो

लब प तब गीत आशिक़ाना हो

3

हिज्र की रात में वो आए जब

होटों पर वस्ल का तराना हो

4

ऐ ख़ुदा हर गरीब के घर में

पेट भरने को आब ओ दाना हो

5

टूटी कश्ती में बैठ कर कैसे

उस किनारे प अपना जाना हो

6

कह रहा है मरीज़-ए-इश्क़ मुझे

उसका दिल मेरा आशियाना…

Continue

Added by Rachna Bhatia on August 18, 2021 at 1:20pm — 6 Comments

ग़ज़ल-तस्वीर है

2122 2122 212 

1

अपने रिश्ते की यही तस्वीर है

उसका मैं रांझा वो मेरी हीर है

2

पाँव में रस्मों की जो ज़ंजीर है 

मेरे दिल को देती हर पल पीर है

3

जाने किसकी शह में आ कर यार ने

सामने कर दी मेरे शमशीर है

4

हाथ की तहरीर पढ़कर तो बता 

रूठी क्यों मुझसे मेरी तक़दीर है 

5

होगी तेरे पास दौलत लाखों की 

अपनी तो तालीम ही जागीर है 

6

अब छिपाने से भी छिप सकती नहीं

आपकी आँखों में जो…

Continue

Added by Rachna Bhatia on August 8, 2021 at 12:30pm — 4 Comments

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