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Rash Bihari Ravi's Blog – September 2010 Archive (12)

लिखने वाला लिख दिया है करले तू तैयारी ,

लिखने वाला लिख दिया है करले तू तैयारी ,

गिन चुन के बचे हैं बन्दे अब तो दिन चारी ,

धर्म कर्म तू कर ले बन्दे ले आगे की सुधारी ,

बच जायेगा इस जहाँ से कर ले सत्य सवारी ,

लिखने वाला लिख दिया है करले तू तैयारी ,

नाम काम ना आएगा जब भेजेगा ओ सवारी ,

बोल ना तुम पाओगे सन्देश भेजेगा अगरी ,

आँख की ज्योति कम हुई तुने चस्मा लगली ,

बाल सफ़ेद जब दिखा बन्दे मेहँदी से रंगवाली ,

लिखने वाला लिख दिया है करले तू तैयारी ,

एक ही रास्ता हैं इस जग में ओ हैं पालनहारी… Continue

Added by Rash Bihari Ravi on September 29, 2010 at 2:49pm — No Comments

यही हैं यही हैं यही हैं असलियत ,

अब कहाँ किसी में रही सोचने कि फुरसत ,

देखी गई हैं अक्सर इन्सान की ये फितरत ,

जाने कहाँ चली गई इंसानों से इंसानियत ,

यही हैं यही हैं यही हैं असलियत ,



अबलाओ पे अत्याचार चोर बन गए पहरेदार ,

होने लगी है अक्सर अपनों में ही तकरार ,

देखो यारो बदली कैसी इंसानियत कि सूरत ,

अंधी हो गई अपनी इंसाफ कि ये मूरत ,

यही हैं यही हैं यही हैं असलियत ,



आप रहो अब होशियार जानने को तैयार ,

अजब लगेगा आपको लोगो का व्यवहार ,

क्या न करवाए सब कुछ पाने कि… Continue

Added by Rash Bihari Ravi on September 26, 2010 at 5:00pm — 6 Comments

तुम आग हो ये मैं जानता हूँ ,

तुम आग हो ये मैं जानता हूँ ,

फिर भी जलने को दिल करता है ,

तुम्हारी तपिश से दिल में ,

एक हलचल सी उठती है ,

उसी हलचल में खो जाता हूँ ,

तुम आग हो ये मैं जानता हूँ ,



मगर तुम्हे आग कहना ग़लत होगा ,

कारण, तुम्हारा वो रूप भी देखा है ,

जो बर्फ की शीतलता लिए ,

तन मन को रोमांचित कर देता है ,

और मैं तुम्हारा हो जाता हूँ ,

तुम आग हो ये मैं जानता हूँ ,



कभी कभी लगता हैं मुझे ,

सावन की रिमझिम फुहार हो ,

और तुम जब बरसती हो… Continue

Added by Rash Bihari Ravi on September 23, 2010 at 6:30pm — 1 Comment

कर कुछ नया रे मनवा ,

कर कुछ नया रे मनवा ,

जा मति जा मति जा ,

छोड़ के सभको यु ही अकेले ,

उसपे दुनिया के लाख झमेले ,

द्वन्द को और ना बढ़ा ,

कर कुछ नया रे मनवा ,

जा मति जा मति जा ,

जब आया तू था सब सुन्दर ,

फिर माया मोह में लपटाया ,

जीवन को तू जीना चाहा ,

खुद को इसमें फसाया ,

अब क्यों कर तू सोचे हैं ,

फस गया मैं ये कहा ,

कर कुछ नया रे मनवा ,

जा मति जा मति जा ,

कर कुछ यैसा रह के जहाँ में ,

और ये सब को बता ,

नही हैं तेरे वास्ते कुछ भी… Continue

Added by Rash Bihari Ravi on September 20, 2010 at 5:43pm — No Comments

रोने भी नहीं देते हसने भी नहीं देते ,

रोने भी नहीं देते ,

हसने भी नहीं देते ,

मन के माफिक ये तो ,

चलने भी नहीं देते ,

कल तक था मेरे मन में ,

देश के लिए जिऊंगा ,

चल पड़ा सीना ठोक कर ,

देश का सेवा करूँगा ,

देखा एड पढ़ कर भर दी ,

आ गया बुलावा भी ,

दौड़ में मैं आगे निकला ,

गर्व हुआ अपने ऊपर ,

आकर एक जन पूछा मुझसे ,

कौन तुझे भेजा अन्दर ,

मैं डट कर बोला उनसे ,

कोई नहीं हैं मेरे ऊपर ,

बोला चलो बगल में आओ ,

आगे आपना हाथ बढ़ावो ,

ये धागा मैं बांघ देता हु… Continue

Added by Rash Bihari Ravi on September 18, 2010 at 8:37pm — No Comments

वाह रे जमाना खूब मस्त काम कर दिया ,

वाह रे जमाना खूब मस्त काम कर दिया ,
सहाद में जहर मिलाकर बर्बाद कर दिया ,
बिस्वास जिनपे किये आखं बंद कर के ,
दुसमन दोस्त अपने लूटे हमदर्द बन के ,
ये काम हिंद के आग्रिम लोग कर दिया ,
वाह रे जमाना खूब मस्त काम कर दिया ,
सिखाते हैं ओ हमें अच्छा काम कर लो ,
देश के हित में तू कुछ नाम कर लो ,
क्या पता ओ भी हमें जहर ही पिलायेंगे ,
नाम होगा सहाद का मीठा जहर खिलायेगे ,
फासी पे चढाओ ऐसा घिर्नित काम किया ,
वाह रे जमाना खूब मस्त काम कर दिया ,

Added by Rash Bihari Ravi on September 18, 2010 at 8:00pm — No Comments

जी अब तू दुसरो के लिए अब बोल सब को हमारा हैं ,

जब तक दुसरो के लिए जिया सब बोले हमारा हैं ,

अपना काम पड़ा तो समझ में आया कौन हमारा हैं ,

मैं अपना तन और धन दुसरो पे जब तक लुटाता हु ,

दोस्त मिलते हैं लाखो खुद सबके नजदीक पाता हु ,

पॉकिट खाली छाया कंगाली गया दोस्तों की हुजूम ,

वही जो आगे पीछे घुमा करते थे अब कहते हैं तुम ,

गुरु ज़माने को पहचान जब तक हैं दम तब तक ही ,

नहीं तो लोग हाथ झटक चल देंगे साथ था अब तक ही ,

ले प्रभु का नाम उसी को सहारा बना ओ साथ देगा ,

अंत समय जब तेरा अपना ना होगा तो पाड़ करेगा… Continue

Added by Rash Bihari Ravi on September 16, 2010 at 3:29pm — 4 Comments

क्यों आपको समझ नहीं आता हैं ,

हमे खाना नहीं मिलता हैं ,

अब जीना मुस्किल हो रहा ,

बाह रे हिंद के सासक ,

हम खाए बिना मरते हैं ,

आप के अन्य सड़ अब रहा ,

सडा कर आप मंगवाएंगे ,

बिक्री के लिए टेंडर ,

सस्ते में निकल जायेगा ,

ये अनाज सब सड़ कर ,

हुजुर सड़े हुए से भी ,

अपना पेट भर जाता हैं ,

आप हमें बर्बाद करने की ,

जुगत अच्छी बनाई हैं ,

शराब बनेगे इन सब की ,

जिसको आप ने सडाइ हैं

आप ही सोचो हम गरीबो पे ,

दोहरा माड पर जाता हैं ,

एक दिन बाजार में जब… Continue

Added by Rash Bihari Ravi on September 16, 2010 at 1:00pm — 2 Comments

देश की खातिर जान देते हैं हम हिन्दुस्तानी ,

कल की बाते हुई पुरानी ये तो दुनिया मानी ,

देश की खातिर जान देते हैं हम हिन्दुस्तानी ,

आलग थलग हम बटे हुए थे छोटे छोटे राजो में ,

दम थी अपनी अपनी अलग अलग आवाजो में ,

मगर न थी एकता जो सब हमपे की मनमानी ,

देश की खातिर जान देते हैं हम हिन्दुस्तानी ,



समझ में आई बीत चूका आये मुंगल और अंग्रेज ,

त्राहिमाम हम कर रहे थे भूलने लगे मतभेद ,

अलग अलग जो हम बटे थे आये एक धारा में ,

पूरा हिदुस्तान हमारा बुलंदी आई इस नारा में ,

मर मिटने पर तैयार हुई एक टोली… Continue

Added by Rash Bihari Ravi on September 14, 2010 at 3:41pm — 5 Comments

देखो ना यार मेरा दिल खो गया ,

देखो ना यार मेरा दिल खो गया ,

प्यार प्यार प्यार प्यार प्यारहो गया ,

आखो में मेरे ओ आके बसे हैं ,

ना जाने क्यू ये मन यु झूमे हैं ,

लगता हैं ये दिल उनका हो गया ,

प्यार प्यार प्यार प्यार प्यारहो गया ,



उनके ही संग ये दिल चलना चाहे ,

उनकी ही राह देखे ये मेरी बाहे ,

ओ आये तो मौसम सुहाना ,

खुसबू से दिल हो जाये दीवाना ,

जानू ना यार मुझे क्या हो गया ,

प्यार प्यार प्यार प्यार प्यारहो गया ,



उनके ही चाहत में जियेंगे मरेंगे ,

उनके… Continue

Added by Rash Bihari Ravi on September 13, 2010 at 8:30pm — 3 Comments

ऐसे हराम के खाने वाले गरीबो को निशाना बनाते हैं ,

आइये यु.पी. की सैर कराते हैं ,

उस घर में लेकर चलते हैं ,

जहाँ घर नें गवाएँ मालिक हैं ,

भला हो मीडिया की बात सामने आती हैं ,

"आजतक" पर जो देखा आँख से आसू आती हैं ,

छोटेलाल ने अरजी किया था ,

घर में बिजली पाने की ,

घर में बिजली नहीं आयी ,

नजर लगी बिजली वालो की ,

आया बिल सवा लाख का ,

बेचारा का सर चकरा गया ,

गया बिचली ऑफिस में ,

कुर्की जप्ती का फरमान पा गया ,

बहुत कोशिश की पर नहीं… Continue

Added by Rash Bihari Ravi on September 7, 2010 at 2:00pm — 1 Comment

अजब हिंद की गजब कहानी कैसे मैं बतलाऊ ,

अजब हिंद की गजब कहानी कैसे मैं बतलाऊ ,

जो जो लुटता हैं हमें उसको मेहमान बनाऊ ,

अफजल गुरु की करनी को आप नहीं भूले होंगे ,

अजमल कसाब क्या किया सोच के जलते होंगे ,

अंग्रेजो की क्या बोलू मुगलों की राज सुनाऊ ,

अजब हिंद की गजब कहानी कैसे मैं बतलाऊ ,

लुट मची लुट लो जो मुग़ल अंग्रेज किये ,

माँ भारती के दामन पर सौ सौ दाग दिए ,

दिल्ली वाले लुट रहे हैं कमनवेल्थ के नाम पर ,

यु पि में भी लुट मची हैं मूर्ति वाला काम पर ,

ये सोचने की समय नहीं हैं दर्द कैसे… Continue

Added by Rash Bihari Ravi on September 3, 2010 at 5:54pm — 4 Comments

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