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VIRENDER VEER MEHTA's Blog – September 2015 Archive (4)

विसर्जन - लघुकथा

"गणपति भप्पा मौर्या... अगले बरस तू जल्दी आ....।" हर प्रतिमा विसर्जन के साथ कई आवाजें उठती और इन्ही आवाजों के साथ उसके चेहरे पर कभी बच्चो जैसी खुशी झलकने लगती तो कभी चेहरा गंभीरता का आवरण ओढ़ न जाने क्या सोचने लगता?

धुंधली शाम अब रात में ढलने लगी थी लेकिन उसे अभी तक वहीं टहलते देख 'नाव वाले' से रहा नही गया। "विसर्जन तो कब का हो गया बाबा! रात हो गयी है, अब घर जाओ।"

"घर!.....कौन से घर?" बुजुर्ग ने एक गहरी सांस ली और ग॔गाजी को लहरो को देख बुदबुदाने लगा। "विसर्जन तो मेरा भी हो गया है, बस… Continue

Added by VIRENDER VEER MEHTA on September 26, 2015 at 4:59pm — 2 Comments

फांसी - लघुकथा

जेल की दीवारे चीख चीख कर कह रही थी कि बीती रात रहमत अली ने हाल ही में सजा काटने आये कैदी को मार डाला। लेकिन उसके माथे पर एक भी शिकन नही थी, वो तो अपनी बैरक में खामोश बैठा सोच रहा था।

"अब मिला मुझे सकूं, उसको उसके किये की सजा दे कर मैंने अपनी बीबी को ही इंसाफ नही दिया बल्कि अदालत के झुठे फैसले को भी सच कर दिया है।"

"रहमत अली। अपनी खामोशी तोड़ो और बताओ कल रात क्या हुआ?" थानेदार ने सवाल पूछते हुये उसे लगभग झिंझोड़ दिया।

"अब छोड़िये भी साहब! रात गयी बात गयी।" रहमत अली एक गहरी…

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Added by VIRENDER VEER MEHTA on September 22, 2015 at 10:00am — 11 Comments

"वास्तविक पहचान"

"एक आखिरी सवाल!" साक्षात्कार लेते अधिकारी ने उसके चेहरे पर एक गहरी नजर डालते हुये कहा। "अपनी पहचान खोते हमारे 'प्राॅड्क्ट' को 'मार्केट' में बरकरार रखने के लिये तुम किस स्तर तक नीचे जा सकते हो?"

"जाहिर है जब कम्पनी मुझे इतने आकर्षक और बेहतर जीवन जीने का अवसर देने जा रही है तो उसकी पहचान कायम रखने के लिये मैं किसी भी निचले स्तर तक जा सकता हूँ।" उसने मुस्कराते हुये जवाब दिया।

"गुड! बहुत अच्छे जवाब दिये तुमने, लेकिन 'साॅरी यंगमैन'! हम तुम्हे ऐसा कोई अवसर नही दे पायेंगे क्योंकि अभी अभी… Continue

Added by VIRENDER VEER MEHTA on September 15, 2015 at 11:08am — 9 Comments

बीती ताहि बिसार दे (लघुकथा)

"भैया ये दुनियादारी के रिश्ते निभाने से निभते है बातो से नही, ये मैं ही थी जो अब तक निभाती आयी मगर अब नही।" 'आप्रेशन' के बाद जब से भावना को होश आया उसके दिमाग में यही बात बार बार आ रही थी जो उसने दो वर्ष पहले क्रोध में आ भाई को कही थी और उसकी कही बात ने उनके रिश्ते को एक अंतहीन चुप्पी में बदल दिया था। यही नही भाई की घोर परेशानी में भी उसने अपनी जिद के चलते दोबारा भाई के घर का रूख नही किया था।

"रिपोर्टस आर नाॅर्मल भावना, डाॅक्टर ने कहा है जल्दी ही छूट्टी मिल जायेगी।" पति की आवाज ने उसकी…

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Added by VIRENDER VEER MEHTA on September 10, 2015 at 10:00pm — 4 Comments

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