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All Blog Posts Tagged 'हाइकु' (11)

हाइकु - मोर /मयूर

देख मयूर
अनुपम सौंदर्य
मन बावरा।

विश्व सौंदर्य
प्रकृति हो रमणी
नाचे मयूर।

सुंदर पंख
नागराज भी डरे
निराला मोर।

मन हर्षाता
पंख फैलाए मोर
जो इठलाता।

काला बादल
नर्तकप्रिय मोर
मन को भाता।

अनिता भटनागर 

मौलिक और अप्रकाशित 

Added by Anita Bhatnagar on July 1, 2023 at 1:00pm — No Comments

हाइकु (हिंसा-अहिंसा पर)

स्वार्थ बाधित

अहिंसा का अस्तित्व

पशुतावाद

**

हिंसा सिखाती

है स्वार्थलोलुपता-

वेदनाहीन

**

हिंसा की धाक

गांधीगीरी मज़ाक

व्यापारिकता

***

सह-अस्तित्व

हिंसा-आधुनिकता

धन-प्रभुत्व

**

लुप्त अस्तित्व…

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Added by Sheikh Shahzad Usmani on January 29, 2019 at 7:30pm — 5 Comments

कुछ हाइकु (23 जनवरी तिथि पर)

कुछ हाइकु :



1-

तेजस्वी नेता

ख़ून दो, आज़ादी लो

सदी-आह्वान

2-

नेताजी बोस

तेईस जनवरी

क्रांति उद्भव

3-

सच्चाई, फ़र्ज़

जीवन-बलिदान

बोस-आह्वान

4-

शहीद-मौत

स्वतंत्रता-मार्ग

इच्छा-शक्ति से

5-

शक्ति-संचार

असली राष्ट्रवाद

बोस-चिंतन

6-



नेताजी बोस

सैनिक आध्यात्मिक

भक्ति…

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Added by Sheikh Shahzad Usmani on January 22, 2019 at 8:06pm — 4 Comments

नववर्ष पर हाइकु - [हाइकु]/शेख़ शहज़ाद उस्मानी :

1-

स्वागत देख

भौंचक्का नववर्ष

बीते को देख

2-

अद्भुत हर्षा

वर्ष विदाई-रात

दुआ की बात

3-

हे नववर्ष

दुआयें बरसाता!

स्वप्न दिखाता!

4-

ख़र्चीले दिन

आते-जाते वर्ष के

दो जश्नों के!

5-

सत्य, असत्य

आते-जाते वर्ष के

मिथ्या धूम के



(छद्म धूम के)

(धूम/जश्नों)

6-

है नेतागिरी…

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Added by Sheikh Shahzad Usmani on December 29, 2018 at 6:30pm — 5 Comments

'राहगुज़र : दिव्यालोक' [कुछ हाइकु: भाग-3]

1-
आलोक पर्व
सेतु ये जन-हेतु
प्रकाश-स्तंभ


2-
राहगुज़र
अंधेरे का निस्तार
प्रकाश-पर्व


3-
अपनापन
दीप से विस्तारित
आत्मकेंद्रित

4-
रूप चौदस
सौंदर्य प्रसाधन
आध्यात्मिकता

5-
दूज सुबोध
भ्रातृ-भगिनि योग
दिव्य-आलोक


(मौलिक व अप्रकाशित)

Added by Sheikh Shahzad Usmani on November 6, 2018 at 10:09am — 8 Comments

'मर्म-सौगातें : सोने का देश' [कुछ हाइकु: भाग-2]

1-

मन-हर्षाता

धन्य धन-तेरस

मां लक्ष्मी दाता

2-

धन तेरस

दे अब के बरस

सोने का देश



3-

धन तेरस

सोने की ये चिड़िया

धन से धन्य

4-

धनोपार्जन

से धन-विसर्जन

चादर मैली



5-

धन की दास्तां

धनी-निर्धन व्यथा

कथा में कथा



6-

लड़ी में ज्वाला

प्रकाश, आग, भाग

आत्मायें लड़ीं



7-

पर्व ही गर्व

संदेश सम्प्रेषित

धन का दर्द



8-

दिल की…

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Added by Sheikh Shahzad Usmani on November 5, 2018 at 8:24pm — 8 Comments

'ईको-फ्रेंडली प्रकाश-मित्र' [कुछ हाइकु]

कुछ  'दीवाली-हाइकु' :

 

1-

दिल्ली-दीवाली

(दिली-दीवाली)

दीपक-दिलवाली

ईको-फ्रेंडली

2-

कुम्हार-कला

मिट्टी, भावों से खिला

ये दीपोत्सव

3-

प्रज्जवलित

दीप कुम्हार वाले

सीप के मोती

4-

सीप का मोती

दीवाली-महोत्सव

रिश्तों की खेती

5-

मानवीयता

दानवीयता परे

दीवाली भरे

6-

दिव्य-दीवाली

दशा-दिशा निमित्त…

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Added by Sheikh Shahzad Usmani on November 4, 2018 at 6:00am — 8 Comments

समर शेष !!

( 1 ) 

दो पुष्प खिले 

हर्षित हृदय 

लीं बलैयां 

( 2 )

धीरे धीरे 

बढ़ चले राह 

पकड़ी बचपन डगर 

( 3 )

मार्ग दुर्गम 

वे थामे अंगुली 

आशित जीवन 

( 4 )

हुये बड़े 

बीता बचपन 

डाले गलबहियाँ 

( 5 )

संस्कार भरे 

करते मान सम्मान 

न कभी अपमान 

( 6 )

जीवन बदला 

खुशियाँ…

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Added by annapurna bajpai on February 21, 2014 at 9:15pm — 5 Comments

पर्यावरण पर कुछ हाइकु

 नीर भरी थी 

विष्णुपदी  निर्मल 

क्लांत  है अब । 
 
***************
पेड़ों को काटा 
छीना था सरमाया 
धरती…
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Added by sangeeta swarup on July 6, 2012 at 10:45am — 4 Comments

कुछ हाइकु

कुछ हाइकु 


(१)
मंदिर द्वारे 
 जीवन अभिशाप 
 देव दासी का
 (२)…
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Added by asha pandey ojha on February 22, 2012 at 1:00pm — 10 Comments

हाइकु क्या है..??

हाइकु - ये जापानी काव्य प्रकार है । हाइकु अकसर कुदरत वर्णन के लिए लिखे गए हैं । जिसे " कीगो " कहते हैं । जापानी हाइकु , एक पंक्ति में लिखा जाता है और १९ वीं शताब्दी पूर्व इसे हिक्को कहा जाता था । मासाओका शिकी महोदय ने १९ वीं सदी के अंत तक इसे हाइकु नाम दिया ।



हाइकु , कविता में ३ पंक्तियाँ होतीं हैं । जिनका अनुपात है--



प्रथम पंक्ति में ५ अक्षर , दूसरी में ७ अक्षर और फ़िर तीसरी पंक्ति में ५ अक्षर हों..



अकसर , संधि अक्षर भी एक अक्षर ही गिना जाता है… Continue

Added by विवेक मिश्र on August 9, 2010 at 2:56am — 2 Comments

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"आ. भाई चेतन जी, सादर अभिवादन। गजल की प्रशंसा के लिए आभार।"
Mar 29
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-177
"आ. भाई अमीरुद्दीन जी, सादर अभिवादन। गजल की प्रशंसा के लिए आभार।"
Mar 29
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-177
"आ. भाई अमित जी, सादर अभिवादन। गजल की प्रशंसा के लिए धन्यवाद।"
Mar 29

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