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Abha saxena Doonwi's Blog – May 2016 Archive (1)

गज़ल - जिन्दगी का सफ़र खूब है

जिन्दगी का सफर खूब है,

मैं हूँ तनहा , मगर खूब है.

 

जिन्दगी कट रही शान से ,

ये सुहाना सफ़र खूब है .

 

क्या कहूँ मैं शबे-वस्ल को,

वो जगा रात भर खूब है.

 

प्यार की इंतिहा हो गई,

बेकरारी उधर खूब है .

 

हर दिशा में चमकता रहा ,

ये गणित का सिफर खूब है.

 

खार के साथ हैं फूल भी, ,

 कंटकों की डगर खूब है

 

मानता हूँ मैं "आभा"तुझे,

वाह! तेरी नज़र खूब…

Continue

Added by Abha saxena Doonwi on May 18, 2016 at 8:30am — 11 Comments

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