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7 फेलुन 1 फ़ा

मेरी यादों से वो यारो जब भी घबराते हों गे

माज़ी के क़िस्सों से अपने दिल को बहलाते हों गे

काले बादल शर्म से पानी पानी हो जाते हों गे

बाम प आकर जब वो अपनी ज़ुल्फ़ें लहराते हों गे

जैसे हमको यार हमारे समझाने आ जाते हैं

उसके भी अहबाब यक़ीनन उसको समझाते हों गे

हम तो उनके हिज्र में तारे गिनते रहते हैं शब भर

वो तो अपने शीश महल में चैन से सो जाते हों गे

सुब्ह चमन की सैर को जब भी यार निकलते होंगे वो

उनके कदमों में तो ख़ुद ही फूल बिखर जाते हों गे

बाद अज़ तर्क-ए-तअल्लुक़ उनको जब अहसास हुआ होगा

वो भी कुढ़ते होंगे दिल में वो भी पछताते हों गे

शाम ढले परदेस में हम ये बैठ के सोचा करते हैं

यार हमारे महफ़िल में अब साग़र टकराते हों गे

'समर कबीर'

मौलिक/अप्रकाशित

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Comment by Samar kabeer on February 5, 2022 at 3:22pm

जनाब रवि भसीन 'शाहिद' जी आदाब, ग़ज़ल की सराहना के लिए आपका धन्यवाद ।

Comment by Samar kabeer on February 5, 2022 at 3:20pm

जनाब मनोज अहसास जी आदाब, ग़ज़ल की सराहना के लिए आपका धन्यवाद ।

Comment by Aazi Tamaam on February 4, 2022 at 3:40pm

वाह वाह वाह क्या बात है

इस ग़ज़ल को पढ़ने का सौभाग्य प्राप्त हुआ इसके लिये आ गुरु जी आपका बहुत बहुत आभार

बेहतरीन ग़ज़ल है वाह

Comment by Nilesh Shevgaonkar on June 9, 2021 at 10:39am

आ. समर सर,
अच्छी ग़ज़ल हुई है.. बधाई 

Comment by vijay nikore on February 25, 2020 at 10:38am

सोचा, बता दूँ, जाने कितनी बार आपकी इस गज़ल ने मुझको बुलाया, इसे पढ़ कर हर बार मुझको बहुत लुत्फ़ आया।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on February 17, 2020 at 11:51am

आ. भाई समर जी, सादर अभिवादन । बेहतरीन गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।

Comment by vijay nikore on February 15, 2020 at 4:06pm

मेरे भाई, समर कबीर जी, आपकी गज़ल पढ़ कर दिल खुश हुआ। रिश्ते में अपनी स्थिति और उनकी स्थिति को अच्छा बयाँ किया है।

Comment by TEJ VEER SINGH on February 15, 2020 at 12:04pm

हार्दिक बधाई आदरणीय समर कबीर साहब जी।आदाब। बेहतरीन गज़ल।

जैसे हमको यार हमारे समझाने आ जाते हैं

उसके भी अहबाब यक़ीनन उसको समझाते हों गे

Comment by रवि भसीन 'शाहिद' on February 14, 2020 at 4:11pm

आदरणीय समर साहब, आपको प्रणाम और हार्दिक बधाई! बहुत खूबसूरत ग़ज़ल कही है आपने।

Comment by मनोज अहसास on February 14, 2020 at 2:07pm

एक बेमिसाल ग़ज़ल के लिए हार्दिक बधाई आदरणीय

आपको तो पता ही है मैं इस बहर पर भी आजकल काम कर रहा हूँ 

मुझे इस ग़ज़ल से बड़ी प्रेरणा मिलेगी

सादर

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