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अनसुने अनकहे के बीच

                        

अनसुने अनकहे के बीच

.

कहे अनसुने-से रहे कुछ जज़्बात

उसपर अनकहे एहसासों का भार

अजीब-सी बेचैन बेकाबू धड़कन का

तकलीफ़-भरा भयानक शोर ...

पन्नों पर उतर तो आते हैं यह

पर भरमाया घबराया मन

इनकार भरा

भार कोई हल्का नहीं होता

.

पगलाई अन्दरूनी हवाएँ

खयालों-सी वेगवान

झकझोरती आसमानी तूफ़ान बनी

लफ़्ज़ों से…

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Added by vijay nikore on October 26, 2026 at 8:08am — No Comments

क्यों दूर हो गए तुम , हमको सजा दिला के

24.10.26

मुज़ारे मुसम्मन अख़रब

मफ़ऊल फ़ाएलातुन मफ़ऊल फ़ाएलातुन

221-2122- //-221-2122

 

क्यों दूर हो गए तुम , हमको सजा दिला के

लानत  मिली है हमको   , रिश्ता सही निभा के

 

रखता हूँ पास अपने , मैं तारे आसमाँ …

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Added by Sushil on October 24, 2026 at 7:36pm — No Comments

चाहत के इशारे कभी हमको नहीं आते

हज़ज मुसम्मन अख़रब मकफ़ूफ़ महज़ूफ़

मफ़ऊल मुफ़ाईलु मुफ़ाईलु फ़ऊलुन

 

221  1221  1221  122

चाहत के इशारे कभी हमको नहीं आते

ये चाँद -सितारे  कभी हमको नहीं आते

 

बोलो तो कभी ला दूँ मैं रातों में  तबाही

ये  दिन के उजाले कभी हमको नहीं आते

 

आवाज कहाँ देते …

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Added by Sushil on October 24, 2026 at 7:35pm — No Comments

मैं किसे  तो याद करूँ कहो  किसे    भूलना पड़े है मुझे

24.10.26

कामिल मुसम्मन सालिम

मुतुफ़ाइलुन मुतुफ़ाइलुन मुतुफ़ाइलुन मुतुफ़ाइलुन

11212  11212  11212  11212

 

मैं किसे  तो याद करूँ कहो  किसे    भूलना पड़े है मुझे

ये मिरे नसीब की खामियाँ  तुझे बोलना पड़े है मुझे

 

है निगाह में  मिरे   शहर  की बनी सब  बड़ी    ये  इमारतें

तिरी ही गली…

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Added by Sushil on October 24, 2026 at 7:33pm — No Comments

लोग  ही जब  नजर को   चुराते रहे

मुतदारिक मुसम्मन सालिम

फ़ाइलुन फ़ाइलुन फ़ाइलुन फ़ाइलुन

212 212 212 212

 

लोग  ही जब  नजर को   चुराते रहे

पास मेरे खुदा   ख़ूब आते रहे

 

ऐब तेरे  कहीं जब  छुपाते रहे

वो गिनाते रहे हम लजाते रहे

 

याद में थी  गलतियाँ अनेकों जिसे

हम…

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Added by sushil yadav on September 25, 2026 at 8:51am — No Comments

दोस्ती का हाथ हमसे भी

रमल मुसम्मन महज़ूफ़

फ़ाएलातुन फ़ाएलातुन फ़ाएलातुन फ़ाइलुन

2122 2122 2122 212

दोस्ती का हाथ हमसे भी  मिलाते  जाइए

एक गुल जिंदा दिली की बस खिलाते  जाइए

 

मशवरा मै भूलता हूँ कब किसी का आजकल

बेसबब तोहमत  कहीं फिर   ना लगाते जाइए

 

इस सियासत की जड़ें ज्यादा कहीं गहरी …

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Added by sushil yadav on September 25, 2026 at 8:49am — No Comments

लापता मैं    हो गया इक गुमशुदा के वास्ते

रमल मुसम्मन महज़ूफ़

फ़ाएलातुन फ़ाएलातुन फ़ाएलातुन फ़ाइलुन

 

           2122 2122 2122  212

 

लापता मैं    हो गया इक गुमशुदा के वास्ते

मांग लूँ  मैं माफियाँ  हरदम ख़ता के वास्ते

 

जिंदगी की राह  में खोने लगा है आदमी

 खलबली सी है मची शर्मों -हया  के…

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Added by sushil yadav on September 25, 2026 at 8:48am — No Comments

जो  नाजुक दौर में  हिलता  रहा है

हज़ज मुसद्दस महज़ूफ़

मुफ़ाईलुन मुफ़ाईलुन फ़ऊलुन

 

1222 1222  122

जो  नाजुक दौर में  हिलता  रहा है

वो  कुर्सी का  मिरा   पाया रहा है

 

ये हाले जार पर मेरे किसी के

खयालों का कसीदा आ  रहा है

 

हमारी जिंदगी का फैसला भी

अदालत में…

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Added by sushil yadav on September 25, 2026 at 8:47am — No Comments

बद-नसीबी क्या कहें हम आज जो हालत हुई

रमल मुसम्मन महज़ूफ़

फ़ाएलातुन फ़ाएलातुन फ़ाएलातुन फ़ाइलुन

2122 2122 2122 212

 

बद-नसीबी क्या कहें हम आज जो हालत हुई

रोक कर पूछा किसी ने क्या कहीं दहशत हुई

 

ये जमाना है नहीं अपने लिए अब आजकल

छोड़ दें इसको अभी बस हार की हसरत हुई

 

हम अकेले ही सफर में …

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Added by sushil yadav on September 25, 2026 at 8:46am — No Comments

कातिल  मुझे तू शहर का  कहते  रहा तो है

Muzare.a musamman aKHrab makfuuf mahzuuf

maf'uul faa'ilaat mufaa'iil faa'ilun

221 2121 1221 212

कातिल  मुझे तू शहर का  कहते  रहा तो है

चेहरा मिरा  करीब से देखा हुआ तो है

 

मेरी जुबां  पे ताले  पड़े थे कई  दिनों

यकता  मिरा गरीब  कहीं बोलता  तो है

 

अब कोतवाल शहर का निकला …

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Added by sushil yadav on September 25, 2026 at 8:44am — No Comments

आज कितनी यहाँ नर्म  कमजोर है जिंदगी

फ़ाइलुन फ़ाइलुन फ़ाइलुन फ़ाइलुन फ़ाइलुन

212 212 212 212 212

 

आज कितनी यहाँ नर्म  कमजोर है जिंदगी

लोग सब पीटते  शहर लतखोर है जिंदगी

 

एक बे जान सा  आदमी  है खड़ा बोलता

ढोल लेकर  गले  सामने  शोर है जिंदगी

 

शर्त मेरी नहीं मानता कोई भी  अजनबी

पालतू  सा …

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Added by sushil yadav on September 25, 2026 at 8:43am — No Comments

तू   मुझे धोका दे कम  से कम मैं  पछता तो सकूँ

2122 2122 2122 212

रमल मुसम्मन महज़ूफ़

फ़ाएलातुन फ़ाएलातुन फ़ाएलातुन फ़ाइलुन

2122  2122  2122  212

तू   मुझे धोका दे कम  से कम मैं  पछता तो सकूँ

याद मुझको तू न आए दिल को समझा तो सकूँ

 

छोड़ कर अब जा रहा हूँ शहर को  इस हाल में

दौर-ए-आफ़त भी अगर आए तुझे पा तो…

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Added by sushil yadav on September 25, 2026 at 8:41am — No Comments

कुंडलिया. . . . झोला

कुंडलिया. . . . झोला

झोला   लेकर  हाथ  में, चले   मुरारी   लाल ।
भाव देख कर थम गई,  उनकी बढ़ती चाल ।।
उनकी बढ़ती  चाल , पसीना टप -टप टपके ।
कैसे  लें  सामान , जेब  को   लगते   झटके ।।
भर  कर  ठंडी  साँस , मुरारी फिर यह बोला ।
क्या  लेना  सामान , भला  है  खाली  झोला ।।

सुशील सरना / 19-9-26

मौलिक एवं अप्रकाशित 

Added by Sushil Sarna on September 19, 2026 at 12:59pm — No Comments

भाषा से भी बढ़ इक भाषा

है भाषा का उपकार बड़ा

बना दिया हमको इनसान।

भाषा से भी बढ़ इक भाषा

जिसकी होती नहीं जबान।



प्यारा-सा नवजात कभी जब

इस दुनिया में आता है।

ना शब्दों का बोध अभी बस

रोता है चिल्लाता है।

उसके रोते ही माँ तत्क्षण

अपना क्षीर पिलाती है।

कैसे जननी की थपकी से

धुन लोरी की आती है।

कैसे लाती है इक ममता

शिशु के होठों पर मुस्कान।

भाषा से भी बढ़ इक भाषा

जिसकी होती नहीं जबान।



कितनी गहरी उनकी भाषा

बोल नहीं जो पाते…

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Added by Dharmendra Kumar Yadav on August 19, 2026 at 12:45pm — No Comments

गोस्वामी तुलसीदास जी के प्रति श्रद्धांजलि

सहित लखन अरु जानकी, विपिन गए रघुनाथ।
राम धाम तुलसी गए, अवधी अवध अनाथ।

भावार्थ:- प्रभु श्रीराम, माता जानकी और लक्ष्मण जी के वनगमन के पश्चात जो दशा अवध (अयोध्या) और अवधी (अयोध्या वासियों) की हुई थी वही हालत गोस्वामी तुलसीदास जी के बैकुंठ धाम जाने के बाद अवध और अवधी (अवधी भाषा) की हो गई है।

"मौलिक व अप्रकाशित"

Added by Dharmendra Kumar Yadav on August 19, 2026 at 11:35am — No Comments

सांकल मन के द्वार पर

सांकल मन के द्वार पर



जब-जब जहाँ कहीं फूल खिले

याद तुझे किया था हमने ...



कहती थी न ...

"क्या...

तुम्हारे मन के द्वार तक

मेरे दिल की दस्तक नहीं पहुंची ?"



दस्तक पहुँची

पहुँची हर बार

भाग कर साँकल खोली

कोई था न द्वार पर

चिरकाल से जाने-पहचाने

अकेलेपन के सिवा

हाँ, इस दर्दीले

अकेलेपन के सिवा

कुछ और न था

लौट आया मैं खाली हाथ

न, न, न

मुठ्ठी में लिखा नाम तो

तुम्हारा ही था

केवल… Continue

Added by vijay nikore on July 27, 2026 at 9:00am — 2 Comments

हरिगीतिका छंद

  

हरि नाम लो हरि नाम लो हरि, नाम लो  हरि नाम लो।

यह नाम  ही  है  सत्य  मानव,  भोर लो नित शाम लो।

करते  रहो  नित  भक्ति  प्रभु  की, नित्य प्रभु आराधना।

तब  बिन  कहे   हर  एक  होगी,  पूर्ण   मंगल  कामना।।   

*

आ  जाइये  प्रभु …

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Added by Ashok Kumar Raktale on July 24, 2026 at 7:26pm — 4 Comments

दोहा पंचक - - - - शोखी

दोहा पंचक. . . . . शोखी

शोख उमर की शोखियाँ, चंचल दृग संकेत ।

भीगा यौवन मद भरा, दिल को करे अचेत ।।

अधरों ने की दिल्लगी, अधरों से कल रात ।

जिसका डर था हो गई, शर्मीली सी बात ।।

बारिश में अच्छा लगे, नजरों को संवाद ।

इच्छाओं का मन करे, मिल कर फिर अनुवाद ।।

हल्की- हल्की जब पड़ी, यौवन पर बौछार ।

प्रणय निवेदन में गया, तन ही तन से हार ।।

मिलने की बेताबियाँ, नजरों के  अनुरोध ।

उन्मादों में कब हुआ, सही - गलत का बोध ।।

सुशील…

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Added by Sushil Sarna on July 21, 2026 at 1:21pm — No Comments

चौपाइयाँ

दोहा

बरखा के बढ़ते क़दम, आये  हैं  अब पास।

दूर नहीं है साजना, सुरभित सावन मास।। 

चौपाई

वह फुहार वह साथ तुम्हारा। हरपल था सुरभित अति प्यारा।।

मन   साजन  यह  कैसे  भूले। साथ-साथ   तुम  हम  थे   झूले।।

*

तुम   थे  झूले   थाम   कलाई। मैं   साजन   कितनी  शरमाई।।

तुम  जब-जब  थे  पींग बढ़ाते। हम   इक  दूजे  में   खो  जाते।।

*

झुकीं-झुकीं  मेरी  ये  अँखियाँ। देख रहीं थीं हँस-हँस  सखियाँ।।

पर  साजन  तुम  रुके न माने।…

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Added by Ashok Kumar Raktale on July 14, 2026 at 12:30pm — 4 Comments

बरसात

बरसात

 

घन गरजे अंधियारी छाई,

बिजली अम्बर पर इठलाई  

बूँदें टपकी टप-टप भाई

रिमझिम रिमझिम बारिश आई

 

पत्ते खड़के भीगे लरजे

चिड़िया सहमी बादल गरजे,

कुत्ते दुबके गैया भागी

इक नन्हीं सी गुड़िया जागी

सुनकर उसकी तेज रुलाई

रिमझिम रिमझिम बारिश आई

 

सड़कों से बह निकला पानी

राहगीरों ने छतरी तानी,

छप-छप करते कदम बढ़ाते

ठोकर खाते गिरते जाते

बूँदें ले आयीं…

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Added by Ashok Kumar Raktale on July 4, 2026 at 10:33pm — 4 Comments

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