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हमारे वारे न्यारे हो रहे हैं

1222 1222 122

1

हमारे वारे न्यारे हो रहे हैं
सनम को जाँ से प्यारे हो रहे हैं
2
बसा कर दिल में शोहरत की तमन्ना
फ़लक के हम सितारे हो रहे हैं
3
नवाज़ा है खुदा ने हर खुशी से
बड़े अच्छे गुज़ारे हो रहे हैं
4
गिला शिकवा नहीं है अब किसी से
सभी दिल से हमारे हो रहे हैं
5
तुम्हारी आँखों के इन मोतियों से
समंदर ख़ूूूब ख़ारे हो रहे हैं
6
भरी महफ़िल में 'निर्मल' आज कैसे
निगाहों से इशारे हो रहे हैं

मौलिक व अप्रकाशित

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Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on February 22, 2021 at 1:51pm

आ. रचना बहन ,सादर अभिवादन । अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।

Comment by अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी on February 22, 2021 at 12:24pm

मुहतरमा रचना भाटिया जी आदाब, अच्छी ग़ज़ल हुई है मुबारकबाद पेश करता हूँ,

'समंदर ख़ूूूब ख़ारे हो रहे हैं'  इस मिसरे में  'ख़ारे'  से नुक़्ता हटा लीजिए।  सादर। 

Comment by Aazi Tamaam on February 22, 2021 at 9:43am

सादर प्रणाम आदरणीय रचना जी

बेहद खूबसूरत लयबद्ध ग़ज़ल है

कृपया ध्यान दे...

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