(1)
कुत्ते संग सोते हुए, फोटो एक खिचवा के,
फेस बुक पे झट से, चेंप दी मैडम जी |
लाइक और कमेंट बीच एक श्रीमान ने,
लिख दिया काश होता, कुत्ता मैं मैडम जी |
उल्टा पुल्टा सोचो नहीं, कुछ भी यूँ लिखो नहीं,
ये तो मेरा टॉमी बेटा, बोल दी मैडम जी |
मौका देख चौका मारा, लगे हाथ पूछ डाला,
आप पे गया है या कि, बाप पे मैडम जी ||
(2)
चौकस चौबंद सदा, रहूँ मैं संभल कर,
जबसे पी हिस्सा हुए, ओ बी ओ के दल के ।
गुमसुम खोये-खोये, करे धरें कुछ न ये,
सदा पीछे पड़े रहें, कविता-ग़ज़ल के ।
बच्चे का तो पोटी किया, चड्ढी भी न बदलें जो,
चीख रहें रख दूँ मैं, दुनिया बदल के ।
सुधरी न लत यदि, प्राण दूँगी मार कूदी,
फिर सिर धुनियेगा, खाली हाथ मलके ||
पिछला पोस्ट : लघुकथा : झूठ / गणेश जी बागी
Comment
सराहना हेतु बहुत बहुत आभार आदरणीय डॉ खरे साहब |
आदरणीया डॉ प्राची जी, हलाकि हास्य विधा पर मैंने बहुत ही कम काम किया है, ये दोनों रचनायें आपको अच्छी लगीं, मेरा प्रयास सफल हुआ, उत्साहवर्धन हेतु कोटिश: आभार |
हा हा हा हा
बहुत शानदार छंद हुए हैं सर जी
बहुत बहुत बधाई इन हास्य प्रधान छंदों हेतु
आदरणीया डॉ भावना तिवारी जी, रचना आपको गुदगुदा सकी, लेखन सफल हुआ |
प्रिय राम शिरोमणि पाठक जी, हास्य रचना आपको अच्छी लगी, बहुत बहुत आभार |
बहुत ही रोचक और सरस ..:) बहुत -2 बधाई आपको बागी जी
वाह पहले छंद में मैडम जी और दूसरे में श्री मान जी दोनों को ही ले लिया क्या खूब हास्य रस में लपेट कर कटाक्ष मारा है ,हंसी इस लिए आ रही है की एक फोटो मैंने भी बहुत पहले अपने डाग के साथ खिंचवाया था अच्छा हुआ अभी तक अपलोड़ नहीं किया हाहाहा
घनाक्षरी का नया रूप बड़ा ही भाया आदरणीय बागी जी, सही कदम उठाया है आपने, गंभीर कविताओं के बीच थोड़ा हास्य भी होना ही चाहिए वरना भृकुटि रानी तो प्रत्यंचा चढ़ाए ही रहती है, सादर
बहुत सुन्दर हास्य रचना सर..हार्दिक बधाई स्वीकारें ..
बहुत सुन्दर हास्य व्यंग है घनाक्षरी में हार्दिक बधाई श्री गणेश जी बागी जी
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