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गीत...धीरे धीरे आओ चन्दा (सार छंद 16,12 पर आधारित गीत)

धीरे धीरे आओ चन्दा
धीरे धीरे आओ

होंठों पर मुस्कान सजाये
सोया है मृग छौना
आहट से तेरी टूटेगा
उसका ख्वाब सलोना
बात समझ भी जाओ चन्दा
धीरे धीरे आओ

तुम चलते हो पीछे पीछे
चलते हैं सब तारे
और तुम्हारी सुंदरता पर
इठलाते हैं सारे
तुम तो मत इतराओ चन्दा
धीरे धीरे आओ

ऐसे भी कुछ घर आँगन हैं
बसते जहाँ अँधेरे
भूख वहाँ करताल बजाये
संध्या और सबेरे
उस दर भी मुस्काओ चन्दा
धीरे धीरे आओ
(मौलिक एवं अप्रकाशित)
बृजेश कुमार 'ब्रज'

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Comment

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Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on June 14, 2018 at 7:20pm

हार्दिक आभार सतविंद्र भाई..

Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on June 13, 2018 at 7:53pm

बहुत सुंदर गीत हुआ है आदरणीय ब्रज भाई जी, बधाई

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on June 12, 2018 at 6:12pm

आदरणीय विजय जी ह्र्दयतल से आभार आपका...

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on June 12, 2018 at 6:12pm

हार्दिक अभिनन्दन एवं आभार आदरणीया नीलम उपाध्याय जी..

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on June 12, 2018 at 6:11pm

हार्दिक आभार आदरणीय शर्मा जी..सादर

Comment by vijay nikore on June 12, 2018 at 10:06am

इतने सुन्दर गीत के लिए दिल से बधाई।

Comment by Neelam Upadhyaya on June 11, 2018 at 4:32pm

आदरणीय बृजेश कुमार जी नमस्कार ।  बहुत ही सुंदर गीत की प्रस्तुति । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।

Comment by बसंत कुमार शर्मा on June 11, 2018 at 3:48pm

बहुत सुंदर गीत हुआ है आदरणीय 

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on June 10, 2018 at 4:19pm

आपका हार्दिक आभार आदरणीय सत्यनारायण सिंह जी...

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on June 10, 2018 at 4:17pm

स्नेह बनाये रखें आदरणीय लक्ष्मण धामी जी..

कृपया ध्यान दे...

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