For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

"मीडिया से आइडिया" - [लघुकथा] 30 __शेख़ शहज़ाद उस्मानी

"मीडिया से आइडिया" - (लघुकथा)

हालाँकि गुड्डन के तीनों बच्चे बहुत समझदार थे। काफी पहले से ही सब कुछ समझ रहे थे। कुछ ही दिनों में गुड्डन को फाँसी की सजा होने वाली थी। अम्मीजान के तो बुरे हाल हो रहे थे रो-रो कर। दादी माँ ने ही बच्चों को दिलासा देने के लिए उनसे कहा - " अच्छा-अच्छा सोचो, तो ग़म नहीं होगा। मुल्क के तमाम मशहूर लोगों की तरह तुम्हारे अब्बू मशहूर रहे हैं भले वो डकैती की दुनिया रही हो या दहशतग़र्दी की ! अखबारों में नाम छपता रहा है उनका। आज भी तो देखो , महान लोगों की तरह दुनिया भर के टीवी चैनलों में आतंकी गुड्डन को कवरेज मिल रहा है। लोग अपने-अपने कामों से ध्यान हटाकर टीवी, मोबाइलों, इन्टरनेट पर ताज़ी ख़बरें देख रहे हैं, स्कूली बच्चों के मुंह में बस गुड्डन का ही नाम है, कौन कहता है तुम्हारा बाप बदनाम है ! बदनाम होते , तो सब इन ख़बरों से परहेज़ करते !"- बोलते-बोलते दादी माँ ने पल्लू से अपनी आँखों के आँसुओं को पोंछा । फिर बोलीं - " कल तुम लोगों ने टीवी पर देखा था न कितने पुलिस वाले घेरे हुये थे तुम्हारे अब्बू को, जब विदेश से उसे लाया गया था। किसी बड़े नेता या सेलीब्रिटी से कम नहीं लग रहा था । उनकी तरह ही उसने भी अपने वतन के लिए लगाव ज़ाहिर किया था न ! बड़े- बड़े लोगों जैसी ज़िन्दगी तो जीता रहा वो, क्या कमी रखी तुम लोगों के लिए ? हराम का पैसा किस के पास नहीं है ? अपने बचाव के लिए किसी की जान ले लेने का काम कौन नहीं कर रहा ? बाबाओं ने भी क्या कोई कसर छोड़ी ? सब के सब "बदनामी" के तमग़े से "मशहूर" हो रहे हैं मीडिया की ही बदौलत । अरे, मरते तो सभी हैं एक दिन ! मीडिया की बदौलत ही "बदनामी" भी "शोहरत" में तब्दील हो रही है देखो ! गुड्डन को फाँसी हो जायेगी। शोहरत हासिल लोगों की तरह मय्यत में हज़ारों लोग शरीक़ होंगे । मीडिया पूरा कवरेज करेगा हफ़्तों तक। अगर लाश न भी दी तो बड़े-बड़े पुलिस अधिकारियों के सामने पूरे टीवी कवरेज के साथ उसे दफ़ना दिया जायेगा ! और तुम्हें पता भी है कुछ बड़े-बड़े नेताओं, ऐक्टरों की तरह तुम्हारा बाप तुम्हारे लिए कितनी धन-दौलत छोड़ कर जा रहा है !"

बच्चे सुन तो सब कुछ रहे थे, लेकिन स्कूली बच्चे होने व दीनी तालीमयाफ़्तां होने की वज़ह से अपनी मज़हबी अम्मीजान की तरफ़ देख-देख कर अंदर ही अंदर कुण्ठित हो रहे थे, रो रहे थे अपने नसीब पर ।

(मौलिक व अप्रकाशित)

Views: 690

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on April 8, 2017 at 4:17am
मेरी इस रचना पर समय देने हेतु सभी पाठकगण को तहे दिल से बहुत बहुत शुक्रिया।
Comment by Sheikh Shahzad Usmani on November 12, 2015 at 4:42pm
बहुत बहुत शुक्रिया जनाब सतविंदर कुमार साहब हौसला अफज़ाई हेतु।
Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on November 12, 2015 at 3:05pm
बेहद भावपूर्ण रचना।पारिवारिक संस्कार ही प्राथमिक तौर पर प्रभावित करते हैं किसी के भी आचरण को।हार्दिक बधाई आदरणीय उस्मान जी।
Comment by Sheikh Shahzad Usmani on November 11, 2015 at 12:31pm
बहुत बहुत शुक्रिया मोहतरमा राहिला साहिबा। पूरी बात सामने रखने के लिए इससे ज़्यादा कसावट मुझसे नहीं हो पायी। दरअसल ऐसे विषय लम्बे आलेखों या उपन्यास के लिए उपयुक्त होते हैं। लेकिन मैं अभी केवल लघुकथा व काव्य लेखन पर फोकस कर रहा हूँ न !
Comment by Rahila on November 11, 2015 at 6:13am
बहुत अच्छी रचना आदरणीय उस्मानी जी! लेकिन रचना को थोड़ा और कसा जा सकता था । बहुत बधाई इस रचना हेतु । सादर ।
Comment by Sheikh Shahzad Usmani on November 10, 2015 at 8:30pm
आदरणीय मिथिलेश वामनकर साहब व आदरणीय हरिकिशन ओझा जी सही समय पर रचना पर उपस्थित हो कर सटीक टिप्पणी कर प्रोत्साहित करने के लिए बहुत बहुत हार्दिक धन्यवाद।
Comment by harikishan ojha on November 10, 2015 at 6:11pm

आप ने आज के युग के  हिसाब  से बहुत ही सटीक और झकजोर देने वाली कथा लिखी है आप इसे  कथा नहीं सच्ची दास्ता कह सकते है,  जिस तरह से मीडिया ने याकूब के जनाज़े को कवरेज किया था, वो बहुत ही शर्मनाक था, आज देश में मीडिया एक ऐसा हथियार बन गया है जिस का ट्रैगर सिर्फ रसूकदार और राजनीतिगय ही दबा सकता है, जो देश की प्रगर्ति के लिए बहुत ही खतरनाक साबित हो सकता है, खेर छोड़िये ये तो चलता रहता है वोटो के लिए,  आप को इस कथा के लिए बधाई


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on November 10, 2015 at 1:50pm

आदरणीय उस्मानी जी बढ़िया कथा हुई है. कथ्य का मर्म भी स्पष्ट है. लेकिन थोड़ा और समय चाह रही है प्रस्तुति. इसे थोड़ा और सटीक और सुगठित किये जाने की सम्भावना शेष है. इस बेहतरीन कथानक पर दिल से बधाई.

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on November 10, 2015 at 12:42pm
कथा का उद्देश्य पूर्ण होने पर बड़ी ख़ुशी हासिल होती है। तहे दिल बहुत बहुत शुक्रिया जनाब तेज वीर सिंह जी सराहना व प्रोत्साहन देने के लिए।
Comment by TEJ VEER SINGH on November 10, 2015 at 11:31am

हार्दिक बधाई आदरणीय शेख उस्मानी जी !मीडिया के चरित्र को उजागर करती सुन्दर लघुकथा!मीडिया चाहे तो हीरो को ज़ीरो करदे और ज़ीरो को हीरो बनादे!

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Admin replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"साथियों, आप सभी के बहुमूल्य विचारों का स्वागत है, इस बार के लिए निर्णय लिया गया है कि सभी आयोजन एक…"
3 hours ago
Admin posted discussions
4 hours ago
Admin added a discussion to the group चित्र से काव्य तक
Thumbnail

'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177

आदरणीय काव्य-रसिको !सादर अभिवादन !!  ’चित्र से काव्य तक’ छन्दोत्सव का यह एक सौ…See More
4 hours ago
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"नीलेश भाई के विचार व्यावहारिक हैं और मैं भी इनसे सहमत हूँ।  डिजिटल सर्टिफिकेट अब लगभग सभी…"
yesterday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"सादर नमस्कार, अब तक आए सभी विचार पढ़े हैं। अधिक विचार आयोजन अवधि बढ़ाने पर सहमति के हैं किन्तु इतने…"
Friday
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"इन सुझावों पर भी विचार करना चाहिये। "
Thursday
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"यह भी व्यवहारिक सुझाव है। इस प्रकार प्रयोग कर अनुभव प्राप्त किया जा सकता है। "
Thursday
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"हाल ही में मेरा सोशल मीडिया का अनुभव यह रहा है कि इस पर प्रकाशित सामग्री की बाढ़ के कारण इस माध्यम…"
Thursday
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"आदरणीय प्रबंधन,यह निश्चित ही चिंता का विषय है कि विगत कालखंड में यहाँ पर सहभागिता एकदम नगण्य हो गयी…"
Thursday
amita tiwari posted a blog post

निर्वाण नहीं हीं चाहिए

निर्वाण नहीं हीं चाहिए---------------------------कैसा लगता होगाऊपर से देखते होंगे जबमाँ -बाबाकि…See More
Tuesday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . . .अधर

दोहा पंचक. . . . . अधरअधरों को अभिसार का, मत देना  इल्जाम ।मनुहारों के दौर में, शाम हुई बदनाम…See More
Tuesday
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"सभी सदस्यों को सादर सप्रेम राधे राधे सभी चार आयोजन को को दो भागों में विभक्त किया जा सकता है। ( 1…"
Tuesday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service