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आज़ादी के पुनीत पर्व पर वीर रस की कविता

आज पुनः जब मना रहे हम, वर्षगाँठ आज़ादी की
आओ थोड़ी चर्चा करलें, जनगण मन आबादी की
जिन पर कविता गीत लिखूँ तो, झर-झर आँसू आते हैं
रोम-रोम में सिहरन होती, भाव सभी मर जाते हैं।।1

ऐसे भी हैं यहाँ कई जो, घर को सर पर ढोते हैं
घोर अँधेरा फुटपाथों पर, बिना बिछौना सोते हैं
गर्मी में तन झुलसे उनका, सर्दी हाड़ कँपाती है
तब जश्ने आज़ादी अपनी, उनको ख़ूब चिढ़ाती है।।2

भूखा प्यासा उलझा बचपन, भटक रहा अँधियारों में
फूटी क़िस्मत खोज रहा वह, कूड़े के गलियारों में
या ढाबों पर बर्तन धोता, माड़ भात ही पाता है
कुत्तों से भी बदतर हालत, जूठा पत्तल खाता है।।3

बाँध पीठ पर अपना बच्चा, जच्चा गारा ढोती है
और वहीं पर छोटी मुनिया, भूख प्यास से रोती है
दूध नहीं मिलता बच्चों को, तब वह लहू पिलाती है
जेठ दुपहरी में सूरज से, खुलके फिर लड़ जाती है।।4

दर्द प्रसव का सहते-सहते, मात कहीं मर जाती है
और मीडिया बिकी हुई बस, गीत भाट का गाती है
आज़ादी की बात यहाँ फिर, लगती है बेमानी सी
दूध दही की नदियों वाली, गाथा एक कहानी सी।।5

देश चमकता दिखता केवल, नेताओं के नारों में
लोकतंत्र भी गिरवी बैठा, सत्ता के गलियारों में
ऐसी आज़ादी पर आओ, आज ध्वजा फहराते हैं
अगले दिन से फिर हम अपने, धन्धे में लग जाते हैं।।6

(मौलिक व अप्रकाशित)

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Comment by आशीष यादव on August 26, 2020 at 1:29am

आज के हालात को स्पष्टता से बयां करती हुई कविता है। बेहतरीन रचना पर बधाई स्वीकार कीजिए।

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on August 19, 2020 at 5:26pm

बहुत सुन्दर भवप्रिय रचना आदरणीय...

Comment by नाथ सोनांचली on August 19, 2020 at 2:35pm

आद0 समर कबीर साहब सादर प्रणाम। आपकी उपस्थिति मेरे लिए पुरस्कार स्वरूप होती है। बहुत-बहुत आभार आपका

Comment by नाथ सोनांचली on August 19, 2020 at 2:34pm

आद0 लक्ष्मण धामी मुसाफ़िर जी सादर अभिवादन। आभार आपका

Comment by Samar kabeer on August 18, 2020 at 4:13pm

जनाब सुरेन्द्र नाथ सिंह जी आदाब, अच्छी रचना हुई है, बधाई स्वीकार करें ।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on August 18, 2020 at 8:57am

आ. भाई सुरेंद्र नाथ जी, सादर अभिवादन । बहुत सुन्दर प्रस्तुति हुई है । हार्दिक बधाई ।

Comment by नाथ सोनांचली on August 17, 2020 at 4:34pm

आद0 सुशील सरना जी सादर अभिवादन। रचना पर आपकी उपस्थिति और प्रतिक्रिया से आह्लादित हूँ। आभार आपका

Comment by Sushil Sarna on August 16, 2020 at 4:19pm
वाह आदरणीय बहुत ही मार्मिक और यथार्थ परिस्थितियों की जीवन्त अभिव्यक्ति हुई है ।दिल से बधाई सर ।

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