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दिन भर का उत्साह है, पन्द्रह दिन का प्यार
हिंदी हित कुछ झूठ-सच, कुछ भावुक उद्गार ..

 

सरकारी है घोषणा, सजे-धजे हैं मंच
'हिंदी भाषा राष्ट्र की', दिन भर यही प्रपंच

 

'हिंदी-हिंदी' कर सभी, बजा रहे निज गाल
हम भकुआए देखते.. 'हिंदी-दिवस' उबाल

 

माँ-बोली को जानिए ज्यों माता का प्यार
फिर हिंदी की बाँह धर.. सीखें जग-व्यवहार !
***
(मौलिक और अप्रकाशित) 

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Comment by Saurabh Pandey on September 16, 2020 at 2:35pm

आदरणीय लक्ष्मण धामी जी, आपने दोहों में लेखन  

दोहों में कर टिप्पणी.. किया हमें अति मुग्ध 

ओबीओ का यह पटल, विद्वत सुधी प्रबुद्ध ! 

हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय 

Comment by Samar kabeer on September 15, 2020 at 12:06pm

जनाब सौरभ पाण्डेय जी आदाब, बहुत उम्द: तंज़ में डूबे अच्छे दोहे कहे आपने, इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

बचपन से हम 'हिन्दी' शब्द को आधे न से लिखते पढ़ते आये हैं,लेकिन आजकल जिसे देखो इस शब्द की "हिंदी" अनुस्वार से लिखने लगा है,आपने भी इसे "हिंदी" ही लिखा है,ऐसा क्यों? कृपया इस पर थोड़ा प्रकाश डालने का कष्ट करें ।

Comment by बसंत कुमार शर्मा on September 14, 2020 at 6:50pm

आ. सौरभ पांडे जी सादर नमस्कार 

बहुत सटीक प्रहार किया है आपने आज के दिखावे पर 

बधाई स्वीकारें 

Comment by Nilesh Shevgaonkar on September 14, 2020 at 2:59pm

आ. सौरभ सर,

दिवस मनाने के ढकोसले को बेहतरीन ढ़ंग से उजागर करते हुए दोहों के लिए बधाई 

सादर 

Comment by Sushil Sarna on September 14, 2020 at 2:31pm

आदरणीय सौरभ जी, सादर प्रणाम, हिंदी दिवस पर यथार्थ को उजागर करती बेहतरीन दोहावली। दिल से बधाई स्वीकार करें सर। सादर

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on September 14, 2020 at 11:38am

आ. भाई सौरभ जी, सादर अभिवादन । हिन्दी दिवस की सच्चाई उजागर करते उत्तम दोहे हुए हैं । हार्दिक बधाई ।

हिन्दी का गुणगान कर, बढ़चढ़ कर सब आज
कल से फिर नियमित करो, अंग्रेजी में काज।।
**
बच्चे सब कन्वेन्ट में, बढ़चढ़ पढ़ने भेज
हिन्दी के सम्मान में, इक दिन चीखो तेज।।
**
पखवाड़ा हिन्दी मना, मानद राशि डकार
केवल इक दिन के लिए, इंगलिश ताज उतार।।

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