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फिर भी प्यारी ये जिंदगानी है ...

 

साँसे बोझिल हैं , आँखों में पानी है 

फिर भी प्यारी ये जिंदगानी है |

हर सुबह नई परेशानी है ,

फिर भी प्यारी ये जिंदगानी है |

 

कैसी सोची थी कैसी पाई है 

जाना था कहाँ , कहाँ ले आई है |

कौन सोचे और कैसी बितानी है ,

फिर भी प्यारी ये जिंदगानी है |

 

बंदिशें सभी हैं टूटी टूटी- सी 

ख्वाहिशें सारी हैं रूठी रूठी-सी |

बेमानी सी है इक कहानी है ,

फिर भी प्यारी ये जिंदगानी है |

 

यादों से लडूं , जज़्बातों से लडूं 

बिखरे बिखरे से हालातों से लडूं |

अपनी होके भी लगती बेगानी है ,

फिर भी प्यारी ये जिंदगानी है |

 

चेहरे पे शिकन, परेशानी है 

फिर भी प्यारी ये जिंदगानी है |

साँसे बोझिल हैं , आँखों में पानी है 

फिर भी प्यारी ये जिंदगानी है |

 

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Comment

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Comment by Tilak Raj Kapoor on April 17, 2012 at 11:42pm

वाह भाई वाह।

Comment by ratnesh on March 5, 2012 at 6:59am

jain aap ki  nai racna kab aa rahee hai

mai aap ki rachna prakashit karna chahata hoon

Comment by Abhinav Arun on August 26, 2011 at 4:38pm
बेहतरीन  और प्रभाव शाली रचना वीरेंद्र जी ! बधाई !!
Comment by Veerendra Jain on August 25, 2011 at 11:34pm

shukriya...Saurabh sir...


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on August 25, 2011 at 5:48pm

जिंदगी के प्रति सकरात्मक दृष्टिकोण रखती इस रचना हेतु शुभकामनाएँ.

Comment by Veerendra Jain on August 25, 2011 at 11:43am

bahut bahut aabhar..Shashi ji..yadi is rachna ne aapke dil ko chhua to mera likhna saarthak hua..dhanyawad...

Comment by Veerendra Jain on August 25, 2011 at 11:42am

Ashish ji..bilkul sahi kaha aapne..taklife kitni bhi ho per zindagi se daaman nahin chhudaya ja sakta..dhanyawad..rachna pasand karne ke liye..

Comment by Shashi Mehra on August 25, 2011 at 8:57am
बहुत ही उम्दा रचना है| मुबारक हो |
ज़िन्दगी इनाम है या इक सजा |
इसको जीने पे 'शशि' मजबूर है ||
Comment by आशीष यादव on August 24, 2011 at 7:02pm

veerendra bhai, kuchh bhi ho jindgi to pyari hoti hi hai, aur sabse pyari yahi hoti hai, yahi sach bhi hai.

aapne sundar shabdo me is pyari jindgi ko kaha hai. bahut bahut badhai.

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