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आज मन में क्यूँ उठी मेरे लहर 

चाँद जाने दे गया कैसी खबर 

चलो घर को अपने करीने से सजा लूँ 

किसको  साथ लाती है मेरी सहर 

बहकी बहकी सी फ़िजा लगती है 

कौन जाने है ये किसका असर 

वो तो समझो  है शाइस्तगी मेरी 

वर्ना हक़ से कहती अभी और ठहर 

आजकल दरवाजे उनके बंद रहते हैं 

चुपचाप ना जाने वो गए किधर 

रुसवाइयों से उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता 

कसम से हैं वो बड़े बेखबर 

रास्ता शायद वो दरिया भूल गया 

मुड़ गया इस और जो उसका कहर

आज मन में क्यूँ उठी मेरे लहर   

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Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on March 21, 2012 at 9:46pm

aadarniya mahodaya sadar abhivadan,  bahut sundar bhavon ke saath sundar prastuti. badhai.


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on March 21, 2012 at 8:26pm

Avinash ji tahe dil se shukriya.


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on March 21, 2012 at 8:25pm

hardik aabhar Dr.Shashibhushan ji.

Comment by AVINASH S BAGDE on March 21, 2012 at 8:07pm

रास्ता शायद वो दरिया भूल गया 

मुड़ गया इस और जो उसका कहर

आज मन में क्यूँ उठी मेरे लहर  

kar gai ye aapki gazal

man ki gaharaiyo tak asar....wah! Rajesh kumari ji.

Comment by Dr. Shashibhushan on March 21, 2012 at 8:06pm

आदरणीय राजेश कुमारी जी,
सादर !
"वो तो समझो है शाइस्तगी मेरी
वर्ना हक़ से कहती अभी और ठहर"
अद्भुत भाव ! बहुत सुन्दर !
हार्दिक बधाई !


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on March 21, 2012 at 5:28pm

महिमा जी हार्दिक आभार 

Comment by MAHIMA SHREE on March 21, 2012 at 5:24pm
आदरणीया कुमारी जी
सादर नमस्कार..

आज मन में क्यूँ उठी मेरे लहर
चाँद जाने दे गया कैसी खबर
चलो घर को अपने करीने से सजा लूँ
किसको साथ लाती है मेरी सहर ....

इस प्यारी सी रूमानी रचना के लिए आपको मेरी बधाई.....

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on March 21, 2012 at 3:43pm

hardik aabhar Ashvani ji.


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on March 21, 2012 at 3:43pm

bahut bahut aabhar Neeraj ji.

Comment by अश्विनी कुमार on March 21, 2012 at 3:32pm

भाव और उनको व्यक्त करने की शैली काबिले तारीफ है .......आभार "जय भारत"

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