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इस प्यार भरे बासंती बयार में- 
तेरे स्वप्निल नयनो की पाती.
नयनो नयनो में मधुरगीत गाती 

स्वप्निल मधुर गीतों की पाती 
गायन के मौसम में खूब सुहाती 

तेरे स्वप्निल नैयनो की पाती,
मेरे नयनो से न ओझल हो पाती 

गर जो महक तन-बदन से आती 
बन लट यादो की हमको  सताती

तेरे स्वप्निल नयनो की पाती.
नयनो नयनो में मधुरगीत गाती 
.

-लक्ष्मण प्रसाद लडीवाला,जयपुर  

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Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on March 26, 2012 at 9:03pm

bahut sundar bhavon ke sath prastuti, badhai mahodaya ji sadar abhivadan ke sath.

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on March 26, 2012 at 7:47pm
उत्त्साह वर्धन के लिए बहुत धन्यवाद महिमाश्रीजी, 
लक्ष्मण लडीवाला,जयपुर   
Comment by MAHIMA SHREE on March 26, 2012 at 10:58am
स्वप्निल मधुर गीतों की पाती
गायन के मौसम में खूब सुहाती ....

नमस्कार लक्ष्मण सर......सुंदर गीत और उससे भी सुंदर अभिवयक्ति के लिए बधाइयाँ....

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