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                                                             सूरज की गरमी को देखो, पड़ती सब पे भारी

सूखे ताल तलैया भाई,  पिघली सड़कें सारी

सूख चली देखो हरियाली, सहमा उपवन सारा. 

पंथिन को तो छांह नहीं अब,  क्योंकर चलता आरा

 

पशु पक्षी सब प्यास के मारे,  हुए  हाल बेहाल 

जल संसाधन मंत्री ए.सी., बैठे फेंके जाल 

उनकी बात भी छोड़ो भैया, ऐसा कुछ करवा दो 

आँगन अन्दर बाहर तालन, मां पानी भरवा दो 

 

वृहद पौध रोपण की भाई,  कर लो अब तैयारी

देंगे सब आशीष तुम्हें जो, दुनिया तुम पे वारी 

जैसे बचाते अपना जीवन वैसे बचा अब बारी 

जल संरक्षण किया नहीं तो, जल पे मारामारी ||

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Comment by JAWAHAR LAL SINGH on May 8, 2012 at 5:11am

वृहद पौध रोपण की भाई,  कर लो अब तैयारी

देंगे सब आशीष तुम्हें जो, दुनिया तुम पे वारी 

जैसे बचाते अपना जीवन वैसे बचा अब बारी 

जल संरक्षण किया नहीं तो, जल पे मारामारी ||

आदरणीय कुशवाहा जी सुन्दर सन्देश देती रचना ..काश मंत्री जी भी बाहर झांके और सूर्य भगवान उनको जोर से ताकें

bhramr jee kee pratikriya se sahmat! badhai sweekaren!

Comment by राज लाली बटाला on May 8, 2012 at 1:30am

 आपने मुझे गर्मी का पूरा दृश्य बखूबी दिखा दिया ...शुक्रिया !! कुशवाहा जी

Comment by SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR on May 7, 2012 at 11:19pm

वृहद पौध रोपण की भाई,  कर लो अब तैयारी

देंगे सब आशीष तुम्हें जो, दुनिया तुम पे वारी 

जैसे बचाते अपना जीवन वैसे बचा अब बारी 

जल संरक्षण किया नहीं तो, जल पे मारामारी ||

आदरणीय कुशवाहा जी सुन्दर सन्देश देती रचना ..काश मंत्री जी भी बाहर झांके और सूर्य भगवान उनको जोर से ताकें --भ्रमर ५ 

Comment by डॉ. सूर्या बाली "सूरज" on May 7, 2012 at 11:06pm

बहुत अच्छी रचना प्रदीप जी !!!

Comment by Ashok Kumar Raktale on May 7, 2012 at 10:09pm

पंथिन को तो छांह नहीं अब,  क्योंकर चलता आरा
वृक्षों की अंधाधुंध कटाई सारा पर्यावरण संतुलन नष्ट कर रही है.आपकी सकारात्मक सोच और सुन्दर रचना के लिए बधाई आदरणीय प्रदीप जी.थिन को तो छांह नहीं अब,  क्योंकर चलता आरा

Comment by Abhinav Arun on May 7, 2012 at 6:25pm

वृहद पौध रोपण की भाई,  कर लो अब तैयारी

देंगे सब आशीष तुम्हें जो, दुनिया तुम पे वारी 

वाह वाह सन्देश देता गीत ./ इसे पढना भर भी सुखद लगता है .इस भीषण गर्मी में .बहुत बहुत बधाई श्री प्रदीप जी !

Comment by ganesh lohani on May 7, 2012 at 2:59pm

आपकी रचना में आव्ह्वान ही नहीं शिक्षाप्रद और पर्यावरण की रक्षा सन्देश है | बधाई |


Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on May 7, 2012 at 2:01pm

स्नेही  महिमा   जी, सादर

अगर   जगह  न  हो तो टरेस पर एक मिटटी के बर्तन में रोज ठंडा पानी   रखिये. 

रचना की सराहना हेतु धन्यवाद  

Comment by MAHIMA SHREE on May 7, 2012 at 1:24pm
पशु पक्षी सब प्यास के मारे, हुए हाल बेहाल

जल संसाधन मंत्री ए.सी., बैठे फेंके जाल

उनकी बात भी छोड़ो भैया, ऐसा कुछ करवा दो

आँगन अन्दर बाहर तालन, मां पानी भरवा दो
आदरणीय प्रदीप सर ,
सादर प्रणाम ..
प्रवाहमय सुंदर , समस्या और निदान को उजागर करती रचना के लिए बधाई स्वीकार करें

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