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अब हम काहे ना डरी डरे के कारन बा ,

हम काहे डरी डरे के कारन का ,
एक बेर एगो मुह्हला में ,
एगो आदमी घर बनावत रहे ,
मुह्हला के दादा रूपी इन्सान ,
ओकरा लगे बराबर आवत रहे ,
बार बार ओकरा से पाईसा मांगे ,
आउर ओके धमकावत रहे ,
उ इहे काहे हम काहे दिही ,
हम काहे डरी डरे के कारन का ,
उ दादा कहलस बाबु इ जान ला ,
पाईसा देबा हम सुरक्षा देम ,
कवनो परेशानी न होखे देम ,
रात में आराम से सुताबा ,
हम कहानी हमारा तोहसे ना,
जब पुलिश बा ता तहार का काम,
हम काहे डरी डरे के कारन का ,
घर बन गइल थोरा नुकसान भइल,
बालू सीमेंट आउर लोहा खुबे चोरी भइल,
पर हमर ना सब ठिकदार के गइल ,
उहो चलाक रहे ओने समझावता कईलस ,
सब हमारा बिल में धाईलस ,
जैसे तैसे बन गइल हमार काम ,
हम काहे डरी डरे के कारन का ,
अब हम इहा आ के रहे लगनी ,
बिना मतलब के परेशानी सहे लगनी ,
पुलिश में गइनी एके गो जबाब ,
क्लब में जाके समझ ली आप ,
हम थानेदार से कहानी रौआ का करेम
ता उ कहले बेसी बोलबा ता अन्दर क देम ,
अब हमहू ठोकत बानी दादा के सलाम ,
अब हम काहे ना डरी डरे के कारन बा ,

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Comment by Ratnesh Raman Pathak on April 22, 2010 at 6:44pm
गुरु जी ठीक कहल गइल बा की जेकरा जिव्हा पर सरस्वती के बास हो जाला ओकरा खातिर कौनो चीज कठिन न होखे ला .राउर इ कविता चिल्ला-चिल्ला के कह रहल बा की राउया जिव्हा पर साक्षात् सरस्वती के बास बा .परिस्थिति के तुरंत कविता में बदल देना कवनो मामूली बात नइखे ,हमर भगवन से इहे कामना बा की राउया के ओह उचाई पर ले जास जहा राउर प्रतिभा के सराहल जाओ और उचित सम्मान मिलो .धन्यवाद्

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on April 22, 2010 at 6:17pm
Rauwaa ta police aa dada log dono jana key kalaie khol key rakh dehaley baani aapan kavita mey, sahi kahat baani, am kahey na dari darey key karan ba, rauwaa jaha rahat baani woh jagah key sachaai key poora bardan kar rahal ba E raur kavita, bahut sahi, jai ho guru jee,

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