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व्यंग रचना- अर्थ-तंत्र पर भारी

अर्थ-तंत्र पर भारी राज-तंत्र में गठबंधन सरकार,
गठबंधन-धर्म निभाने की मज़बूरी में यह सरकार |
 
ममता-सोनिया की डपट, कैसे करे दरकिनार,
उदासीन मनमोहन मौन हुए, संकट में सरकार |
 
लून,तेल,लकड़ी गायब हुए, बढ़ा तस्करी व्यापार,
आँख दिखाते पडौस के, हवा हुए सद्व्यवहार |
 
जन-हित से ऊपर हुआ, सत्ता-मद का मधुपान, 
सत्ता-मद के आगे नहीं, चाहे हो अमृत सोपान |

सच से कुछ मिलाता नहीं, झूठ में अम्रत प्याला,
सांचा  कुए पर प्यासा, झूठा जाता मधुशाला |
 
-लक्ष्मण प्रसाद लडीवाला,जयपुर  

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Comment

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Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on June 1, 2012 at 7:04pm

अलबेला खत्री जी, टंकण की अशुद्धियों की और ध्यान दिलाने 

ब और उत्साहवर्धन हेतु हार्दिक धन्यवाद  और हुत बहुत आभार
- लक्ष्मण प्रसाद लडीवाला,जयपुर 
Comment by Albela Khatri on June 1, 2012 at 6:50pm


वाह वाह लक्ष्मण प्रसाद जी......बहुत अच्छी और सामयिक रचना ...
बाँच कर आनन्द आगया .
टंकण में एक आध  त्रुटि रह गई है यदि ठीक कर लेंगे  तो बेहतर है .

लून,तेल,लकड़ी गायब हुए, बढ़ा तस्करी व्यापार,
आँख दिखाते पडौस के, हवा हुए सद्व्यवहार ______पड़ौस
 

सच से कुछ मिलाता नहीं, झूठ में अम्रत प्याला,____मिलता
सांचा  कुए पर प्यासा, झूठा जाता मधुशाला   _____साचा

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on June 1, 2012 at 6:47pm

राजेश कुमारी जी, श्री पी के सिंह कुशवाहजी, श्री गणेशजी बागी.
बहुत बहुत आभार और उत्साहवर्धन हेतु हार्दिक धन्यवाद | आप
सभी का आशीर्वाद मेरे यात्रा से लौट कर आने के बाद अर्थात २० दिन
पस्चार्ट मिल पाया |


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on June 1, 2012 at 5:24pm

अच्छा कटाक्ष किया है रचना में बहुत उत्तम रचना 

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on June 1, 2012 at 4:48pm

बहुत सुन्दर निति पर प्रहार. यही हो रहा है मान्यवर. बधाई.


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on June 1, 2012 at 4:16pm

बहुत ही करारा लहजा, एक आम आदमी की आवाज को आपने शब्द दे दिया है, बधाई स्वीकार करें श्रीमान |

कृपया ध्यान दे...

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