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दो कुण्डलियाँ......

दो कुण्डलियाँ......
१-डॉलर  के कॉलर!

डॉलर  के कॉलर खड़े,रूपया है कमजोर.

महंगाई की डोर  का,दिखे ओर ना छोर.
दिखे ओर ना  छोर ,पकड़ कर कैसे रोकें.
आम-आदमी यहाँ,खा रहा पल-पल धोखे.
'कहता है अविनाश' ,हाल है बद से बदतर!
कितने होंगे कड़क,और डॉलर के कॉलर?
-----------------------------------------
२-बढे कलंकित कर्म!!!
---------------------------------------------
ऐसे ही अब हो रहे,इस धरती पर खून.
पता चले कन्या अगर,ख़त्म कोख में भ्रूण!!
ख़त्म कोख में भ्रूण, नाक की साख बचाने.
कुदरत से ही लगे , खेलने लोग सयाने.
कहता है ' अविनाश ',कमाने  केवल पैसे.
बढे कलंकित कर्म , भ्रूण - हत्या के ऐसे!!!!!!!!!!!
------------------------------------------------
अविनाश बागडे  नागपुर.

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प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on June 7, 2012 at 10:08am

वांछित सुधार कर दिया गया है अविनाश बागडे साहिब.

Comment by AVINASH S BAGDE on June 7, 2012 at 10:07am

Albela Khatri ji,PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA sir, Rekha Joshi & rajesh kumari mam,आशीष यादव ji tatha jUMASHANKER ji  MISHRA   .....snehi-jano meri in kundaliyo ko aapka shabd-bal naseeb hua....hriday se aabhar.  

Comment by AVINASH S BAGDE on June 7, 2012 at 10:02am

Yograj ji...aabhar.
aap ne sahi farmaya-
'rassi' ki jagah 'dor'hone se kasaw jyada aa jayega.
kripaya ADMIN se kah k karwa de.
sadhuwad.

Comment by UMASHANKER MISHRA on June 6, 2012 at 11:17pm

दोनों कुण्डलियाँ बहुत करारा व्यंग लिए हुवे है 

बहुत अच्छी रचना अविनास जी बहुत बहुत बधाई 

Comment by आशीष यादव on June 6, 2012 at 8:12am
दोनो कुण्डलियाँ बहुत अच्छी हैँ और सामयिक चोट करतीँ हैँ। रुपये का अवमूल्यन और भ्रूण हत्या मे ईजाफा दोनो ही खतरा है।
इन पर बधाई स्वीकारिये

प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on June 5, 2012 at 7:47pm

वाह वाह हालत-ए-हाजिर को मद्दे नज़र रखते हुए बहुत सारगर्भित कुंडलिया छंद कहे हैं अविनाश बागडे साहिब. बधाई स्वीकार करें.

//महंगाई की रस्सी का,दिखे ओर ना छोर.//
यहाँ "रस्सी" को "डोर" करने से गेयता और नहीं बढ़ेगी क्या ?

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on June 5, 2012 at 5:50pm

गजब की कुंडलियाँ     ...वाह अविनाश जी बहुत बढ़िया 

Comment by Rekha Joshi on June 5, 2012 at 5:37pm

अविनाश जी,सुंदर रचना ,बधाई |

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on June 5, 2012 at 5:25pm

आदरणीय अविनाश जी, सादर 

भ्रूण हत्या से पैसे, बहुत सुन्दर भाव पूर्ण रचना , बधाई 

Comment by Albela Khatri on June 5, 2012 at 9:27am

बधाई हो  अविनाश बागडे जी,
बहुत ही शानदार और अर्थपूर्ण कुंडलियाँ प्रस्तुत की आपने.
आज के  ज्वलंत विषयों को ख़ूब उकेरा .....जय हो !

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